भारत में हाल के दिनों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर हुई कार्रवाई अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई है। कई विदेशी मीडिया संस्थानों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
The Diplomat की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने एक ऐसा वीडियो हटवा दिया, जिसमें प्रधानमंत्री Narendra Modi के विदेशी नेताओं से मुलाकात के दौरान के व्यवहार का मजाक उड़ाया गया था।
वहीं Deutsche Welle (डीडब्ल्यू हिंदी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में कई न्यूज प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पाबंदी लगाई गई है। इस पर Press Club of India ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “ऑनलाइन सेंसरशिप” बताया है और कहा है कि यह कदम “मनमाना और संविधान का उल्लंघन” है।
इसके अलावा France 24 ने भी अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भारत के नए डिजिटल नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर शिकंजा कसते नजर आ रहे हैं।
लगातार सामने आ रही इन रिपोर्ट्स के बाद यह मुद्दा अब सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती पाबंदियों से भारत में फ्री स्पीच की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ सकती है।
फिलहाल सरकार की ओर से इन रिपोर्ट्स पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह साफ है कि डिजिटल स्पेस में हो रही कार्रवाइयों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
डंका बज रहा है डंका ही ही खी खी और 150 करोड़ के देश को खामोश कराने का। विदेशी मैगजीन और अखबार पटे पड़े हैं सरकार द्वारा मोदी जी के मेल मुलाकात वाले पैरोडी वीडियो को हटाने की खबर से। यह सूचना और प्रसारण मंत्रालय की बड़ी हार है। वह वीडियो पाबंदी से पहले किसी ने नहीं देखा था अब पूरी दुनिया देख रही है। -आवेश तिवारी, पत्रकार
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