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लखनऊ दूरदर्शन के 50 वर्ष पूरे : अनिल रस्तोगी समेत इन्हें मिला डीडीयूपी सम्मान!

लखनऊ | 27 नवंबर 1975 को अपना सफर शुरू करने वाले दूरदर्शन लखनऊ ने एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से समृद्ध प्रोग्रामिंग और सांस्कृतिक योगदान के 50 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया. राजधानी के लोहिया पार्क में मनाए गए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल और दूरदर्शन के एमडी कंचन प्रसाद विशिष्ट अतिथि रहे.

अखिल भारतीय काव्यमय प्रस्तुति कार्यक्रम में बुद्धिनाथ मिश्र, सर्वेश अस्थाना, हसन काजमी, चंद्र शेखर वर्मा, बलराम श्रीवास्तव, डॉ सुमन दुबे, अज्म शाकिरी और शाबाज तालिब जैसे कवियों ने अपनी कविता का पाठ किया.

इस दौरान अभिनेता अनिल रस्तोगी को नाटक और थिएटर में उनके योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार नवनीत सहगल के हाथों दिया गया. कार्यक्रम में एक संगीतमय शाम का भी आयोजन किया गया.

इसके अलावा सुधा सिंह को डीडीयूपी खेल सम्मान, डॉ देवाशीष शुक्ल को डीडीयूपी चिकित्सा सम्मान, प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित को साहित्य सम्मान, विनोद सिंह को डीडीयूपी कृषि सम्मान और डॉ श्रीकांत शुक्ला को डीडीयूपी संगीत सम्मान प्रदान किया गया.

प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल ने कहा कि 22 अशोक मार्ग पर एक अंतरिम स्टूडियो में अपनी मामूली शुरुआत से, दूरदर्शन इस क्षेत्र में टेलीविजन उत्कृष्टता का प्रतीक बन गया है और लगातार नमस्ते यूपी, वन्स मोर और कृषि दर्शन जैसे प्रतिष्ठित शो का निर्माण कर रहा है.

दूरदर्शन लखनऊ के कार्यकारी कार्यक्रम निदेशक एपी मिश्रा ने संस्थान की यात्रा पर कहा कि हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि लखनऊ दूरदर्शन द्वारा निर्मित कई कार्यक्रमों को देश में सर्वश्रेष्ठ प्रोग्राम्स में से एक माना गया है.

मिश्रा ने कहा- नीम का पेड़, बीबी नातियों वाली, बंधुजी, अक्कड़ बक्कड़ और हातिमताई जैसे कार्यक्रमों ने न केवल राष्ट्रीय पुरस्कार पाए बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान हासिल की. हालांकि निजी चैनलों के उदय ने दूरदर्शन के दर्शकों की संख्या पर असर डाला, लेकिन मीडिया परिदृश्य में इसकी प्रमुख उपस्थिति बनी हुई है.

आज दूरदर्शन कुछ बेहतरीन लाइव कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है, जिसमें कुम्भ कवरेज, विधानसभा और विधानभवन से लाइव सत्र और मंदिर अभिषेक समारोह के दौरान अयोध्या से सीधा प्रसारण शामिल है. शोभना जगदीश और निर्मला कुमारी जैसी प्रसिद्ध न्यूज एंकर, जो प्रशिक्षित शास्त्रीय संगीतकार भी थीं, लखनऊ दूरदर्शन का हिस्सा थीं. 1980 के दशक में, मोहम्मद नूर बख्श और नरेश श्रीवास्तव की आवाजों ने फिल्मी सितारों की तरह प्रसिद्धि हासिल की, और हालांकि वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत कायम है.

ब्लैक एंड व्हाइट के अपने शुरुआती दिनों से लेकर 15 अगस्त, 1982 को एशियाई खेलों के दौरान रंगीन प्रसारण के आगमन तक, दूरदर्शन लखनऊ ने तकनीकी प्रगति को अपनाया है. 1987 में, रिलायंस कप के दौरान, स्टेशन ने अपना पहला रंगीन ओबी वैन पेश किया, जो चार कैमरों से सुसज्जित था, जो इसके विकास में एक और मील का पत्थर साबित हुआ.

निजी चैनलों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, दूरदर्शन लखनऊ सांस्कृतिक विरासत, साहित्य और ज्ञान को बढ़ावा देने वाले शो का निर्माण करके अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने में कामयाब रहा है.

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