भारतीय मीडिया का बुरा हाल है। गजब तो इस बात का है कि यह लोग खुद को अंतर्राष्ट्रीय चैनल समझते हैं। युद्ध के हालातों पर इस तरह की रिपोर्टिंग की जा रही है- जो दुनियाभर में जगहंसाई का कारण बन रहा है। नीचे कुछ वरिष्ठ पत्रकारों की टिप्पणियां हैं। पढ़ें- यह लोग देशी चैनलों के लिए क्या कुछ कह/लिख रहे हैं…
डॉ मुकेश कुमार-
भारत ने 8000 ट्विटर अकाउंट बंद करवाए हैं, क्योंकि वे फ़र्ज़ी सूचनाएं फैला रहे थे। मगर उन भारतीय चैनलों को क्यों छोड़ दिया गया जो दिन रात ग़लत ख़बरें दिखा रहे हैं….
क्या इसलिए कि इससे मोदी सरकार को फ़ायदा होता है, अंधभक्त बिना सोचे-समझे बम-बम होते रहते हैं….
भारतीय मीडिया के पतन की कोई सीमा नहीं रही…

विनोद कापड़ी-
जब ये इस्लामाबाद पर कब्जा हो ही चुका है, तब तो युद्ध बंद हो सकता है? इस खबर के लिए शुक्रिया जी न्यूज!
प्रशांत टंडन-
जब इस्लामाबाद पर कब्जा हो गया तो फिर बचा ही क्या – युद्ध शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया. गोदी मीडिया चैनलों से सावधान रहे हैं – ये सिर्फ अफवाह फैला रहे हैं.
सोहित मिश्रा-
देशभक्ति की आड़ में टीआरपी कमाना, अपने देश के ही लोगों को दिन रात बेवकूफ बनाना, लोगों की हुई मौत पर तांडव करते हुए एक शख्स की वाहवाही करना, जंग को वीडियो गेम समझकर इसे बढ़ावा देना, शायद इससे बड़ा देशद्रोह कुछ नहीं..
पिछले 72 घंटे में एक टीवी चैनल भारत में मौजूद नहीं है जो ढंग की खबर दे.. सब केवल और केवल तमाशा करने में लगे हुए हैं.. ना सरकार से कोई सवाल ना कोई पुख्ता जानकारी.. बस कुछ हो रहा है, अब कुछ हो रहा है, अब तो यह हो गया..
इसी में आपके घंटों बर्बाद किए जा रहे हैं.. ना ही इस मीडिया से हमारे सेना को कोई फायदा है, ना ही देश के लोगों को…
यशवंत सिंह-
एक युद्ध गोदी मीडिया और ट्रोल्स लड़ रहे हैं सोशल मीडिया पर जिन्होंने पाकिस्तान का नक्शा दुनिया से खत्म कर दिया है और वहाँ प्लॉट बुक करने के लिए निकल पड़े हैं! अरे यार झूठ की भी सीमा होती है रक्तपिपासु अंधभक्तों!




