ओम थानवी-
राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हरिदेव जोशी की वरिष्ठ पत्रकार सनी सेबास्टियन की लिखी जीवनी And Quite Flows the Mahi (हिंदी में- ‘माही के मनस्वी: हरिदेव जोशी’) का लोकार्पण कल जवाहर कला केंद्र में हुआ। सनी ने जीवनी के बारे में बताया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और विधानसभा के पूर्व स्पीकर चंद्रप्रकाश जोशी बोले।
किताब बहुत मेहनत से लिखी गई है। सनी चालीस साल पहले जयपुर में आ बसे थे। अब भी राजस्थान के बारे में हर जानकारी को कौतूहल से देखते हैं। अपनी बात उन्होंने मुख्यतः हिंदी में रखी।
सीपी का भाषण तैयारी का था। धाराप्रवाह और तथ्यों से भरा। अशोकजी हमेशा सहज बोलते हैं। बिलकुल बातचीत के लहज़े में। पर कम बोले। हरिदेव जोशी के नाम से प्रदेश में कुछ नहीं था। अशोकजी ने दो बार उनके नाम पर विश्वविद्यालय खोला। बड़ा काम किया। पर इसका ज़िक्र न उन्होंने अपने भाषण में किया, न सीपी जोशी ने।
शायद इस महत्त्वपूर्ण पहलू पर उनका ध्यान ही न गया हो। सनी ने भी विवि के उस अवतरण का ज़िक्र किया, जिसके वे प्रथम कुलपति रहे। दुर्भाग्य से राजे सरकार द्वारा वह विवि एक अधिनियम लाकर मिटा दिया गया। अशोक गहलोत फिर मुख्यमंत्री हुए। नए सिरे से पत्रकारिता विवि खड़ा किया। फिर से हरिदेव जोशी के नाम से। प्रथम कुलपति के नाते इस अवतरण को स्थापित करने का ज़िम्मा मुझे मिला। वह विवि अब पूरी तरह सुचारु है। 360 करोड़ रुपए लगाकर अशोकजी ने उसकी इमारत भी बनवा दी थी। इतना कुछ किया, जिसका सारा श्रेय उन्हें ही जाता है।
जो हो, कार्यक्रम में देखा कि जीवनी पर बोलने को दो राजनेता ही मंच पर थे। पर वे किताब पर नहीं बोले। जयपुर में बुद्धिजीवी बहुत हैं। किसी विद्वान को भी बुलाया जा सकता था। लोकार्पण के वक़्त हरिदेव जोशी के परिवार के लोग मंच पर आए। किताब की कल्पना और प्रकाशन जोशीजी के भतीजे जयेश का था। हॉल में, स्वाभाविक ही, कांग्रेस के अनेक समर्थक मौजूद थे। मगर इस सब से किताब के कार्यक्रम पर पार्टी की छाया शायद बढ़ गई। पेशेवराना कामकाज में राजनीति से उचित दूरी नज़र आनी चाहिए।
वह छाया इस जीवनी में भी नज़र आती है। कल ख़रीद लाया था। कुछ रात में पढ़ी, कुछ दिन में। लगा कि जानकारियाँ तो जुट गईं, पर राजनीतिक गतिविधियों का सम्यक् विवेचन नहीं हो सका। राजनेता अपने क्षेत्रवासियों के लिए महान हो सकते हैं, पर समूचे दाय को उस दौर के पत्रकारों के निजी ब्योरों से प्रामाणिकता नहीं मिलती।
जीवनी का आमुख प्रकाशक ने लिखा है: “हरिदेव जोशी एक महान विभूति, युगद्रष्टा, विचारक, उपासक, पूजनीय और बहादुर नेता रहे हैं।” संयोग से जीवनी इसी दिशा में आगे बढ़ती है। इस तरह के चित्रण से कोई भी जीवनी सम्यक् न रहकर अभिनंदन में बदल जा सकती है। आयोजन की फलीभूत रूपरेखा इसी पहलू को वज़न देती है। जीवनी का अंग्रेज़ी नाम भी हिंदी में बदली होकर उसी तरफ़ जाता है।
(फ़ोटो सौजन्य: राजेंद्र बोड़ा)



