
चंचल-
हेमंत शर्मा जी का जन्मदिन है । यह गारंटी है ।
– कऊँवा ?
– वाँ
– वाँ से मतलब ?
हेमंत जी काशी के हैं लेकिन असल खूबी है बनारस उनके खीसे में रहता है , खीसे में जेब घड़ी है , घड़ी में जो तीन सुइयाँ रहती हैं उनमें से एक सुई टूट गई है या उसे तोड़ कर एक तरफ़ कर दिया है समय पूछो तो , जवाब मिलेगा – बज कर तेरह मिनट चालीस सेकंड !
– मियाँ कितने बज कर ?
– यह घड़ी बजने का हिसाब नहीं करती ।
इसी घड़ी को लोग हेमंत शर्मा कहते हैं । समय का हिसाब न अपने लिए न दूसरों के लिए । क्या छोटा , क्या बड़ा सब बराबर , चुनांचे यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि हेमंत जी कितने के हुए । लेकिन हैं । कल तक इकसठ – बासठ कर रहे थे , और उसी पर कायम हैं ।

हमारे घर परिवार में हेमंत जी छतरीवाले पंडित जी बोले जाते हैं । हमारे घर के सामने मैदान में एक छतरी लगी है , बनारस घाटवाली । हेमंत जी ने भेजी है । एक बूढ़ी हुई , दूसरी आई । अब तो हमारे घर का शिनाख्त ही बदल गया – छतरी वाला घर । आज उन्ही पंडित जी का जन्मदिन है ।
नवेद शिकोह-
तिरेसठ के हुए हेमंत शर्मा, मुबारकबाद
देश के दिग्गज पत्रकार हेमंत शर्मा 62 पार करके 63 में प्रवेश कर गए हैं। साठ के बाद सठियाने की धारणा को बिल्कुल गलत साबित करते हुए इन्होंने दुनिया को बता दिया है कि साठ के बाद परिपक्वता निखरती है और जवां होती है। ऐसी उम्र अपने अनुभव के रंग बिखेरकर बहुत कुछ सिखाने की पाठशाला बन जाती है।

हेमंत जी की कलम का कोई सानी नहीं। हिन्दी पत्रकारिता में शुद्ध हिन्दी के बजाय आम भाषा और प्रचलित शब्दों का प्रयोग करने की ताकीद की जाती रही है। हेमंत जी ने इस धारणा को भी तोड़ा। रिदम, लय, श्लोकों और पौराणिक धार्मिक उपमाओं के साथ उनकी कलम ने हिन्दी का पूरा प्रतिनिधित्व किया है। अयोध्या के युद्ध की गवाही देती उनकी पुस्तकों को दुनिया ने सराहा।
पत्रकार, कलमकार, साहित्यकार के रूप में उनकी ख्याति ऐसे ही नहीं फैली। किसी पत्रकार के कलम और खबरों की खूबियां ही नहीं, तमाम ताम-झाम, गुणा-भाग, प्रबंधन, मौके की नज़ाकत की समझ हो तब कोई हेमंत शर्मा बन पाता है। नहीं तो कलम से मोती उगलने वाले पत्रकारों को गुमनामी और भुखमरी का शिकार भी होते देखा है।
कलम के जादूगर होने के साथ तमाम विशिष्टताओं के धनी हेमंत सर को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।
देश की पत्रकारिता पर आपका साया बना रहे।
- नवेद शिकोह


