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भारत सरकार ने हिंदुस्थान समाचार को दिया यूएनआई व पीटीआई के बराबर का दर्जा

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी नई विज्ञापन नीति में कहा गया है कि इस नीति में पहली बार ऐसे समाचार पत्रों को बढ़ावा देने के लिए नई अंकीय व्यवस्था पेश की गई है, जो बेहतर व्यावसायिक मानकों का पालन करते हैं और उनकी प्रसार संख्या की पुष्टि एबीसी/आरएनआई द्वारा की गई हो। इससे डीएवीपी द्वारा विज्ञापन जारी करने में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी। अंकीय व्यवस्था छह विभिन्न मानदंडों पर दिए गए अंकों पर आधारित है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी नई विज्ञापन नीति में कहा गया है कि इस नीति में पहली बार ऐसे समाचार पत्रों को बढ़ावा देने के लिए नई अंकीय व्यवस्था पेश की गई है, जो बेहतर व्यावसायिक मानकों का पालन करते हैं और उनकी प्रसार संख्या की पुष्टि एबीसी/आरएनआई द्वारा की गई हो। इससे डीएवीपी द्वारा विज्ञापन जारी करने में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी। अंकीय व्यवस्था छह विभिन्न मानदंडों पर दिए गए अंकों पर आधारित है।

इसके मानदंडों में एबीसी/आरएनआई द्वारा प्रमाणित प्रसार संख्या (25 अंक), कर्मचारियों के लिए ईपीएफ अंशदान (20 अंक), पृष्ठों की संख्या (20अंक), यूएनआई / पीटीआई / हिंदुस्तान समाचार की वायर सेवाओं की सदस्यता (15 अंक), अपनी प्रिंटिंग प्रेस (10 अंक), पीसीआई को सालाना सदस्यता भुगतान (10 अंक) शामिल हैं। हर समाचार पत्र को मिले अंकों के आधार डीएवीपी द्वारा विज्ञापन जारी किए जाएंगे। यानि अब देश में तीन न्यूज एजेंसी हो गयी है जिनकी सदस्यता लिए बगैर नहीं मिलेंगे सरकारी विज्ञापन। पूरी पालिसी इस प्रकार है–

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बनाई नई प्रकाशन मीडिया विज्ञापन नीति : सरकारी विज्ञापन जारी करने में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करने पर जोर

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने प्रकाशन मीडिया में विज्ञापन जारी करने में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के लिए एक नई प्रकाशन मीडिया विज्ञापन नीति बनाई है। नीति में सरकारी विज्ञापन जारी करने को आसान बनाने और समाचार पत्रों/पत्रिकाओं की विभिन्न श्रेणियों के बीच समानता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नीति की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ावा देना

इस नीति में पहली बार ऐसे समाचार पत्रों को बढ़ावा देने के लिए नई अंकीय व्यवस्था पेश की गई है, जो बेहतर व्यावसायिक मानकों का पालन करते हैं और उनकी प्रसार संख्या की पुष्टि एबीसी/आरएनआई द्वारा की गई हो। इससे डीएवीपी द्वारा विज्ञापन जारी करने में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी। अंकीय व्यवस्था छह विभिन्न मानदंडों पर दिए गए अंकों पर आधारित है। इसके मानदंडों में एबीसी/आरएनआई द्वारा प्रमाणित प्रसार संख्या (25 अंक), कर्मचारियों के लिए ईपीएफ अंशदान (20 अंक), पृष्ठों की संख्या (20अंक), यूएनआई/पीटीआई/हिंदुस्तान समाचार की वायर सेवाओं की सदस्यता (15 अंक), अपनी प्रिंटिंग प्रेस (10 अंक), पीसीआई को सालाना सदस्यता भुगतान (10 अंक) शामिल हैं। हर समाचार पत्र को मिले अंकों के आधार डीएवीपी द्वारा विज्ञापन जारी किए जाएंगे।

नीति में डीएवीपी के पैनल में शामिल होने के लिए प्रसार की पुष्टि की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया है। प्रतिदिन की प्रसार संख्या 45,000 प्रतियों से ज्यादा होने की स्थिति में आरएनआई/एबीसी द्वारा इसके सत्यापन की प्रक्रिया का भी नीति में उल्लेख है;  प्रतिदिन प्रसार संख्या 45,000 प्रतियों से ज्यादा होने की स्थिति में कॉस्ट/चार्टर्ड अकाउंटैंट/स्टैच्युअरी ऑडिटर सर्टिफिकेट/एबीसी से मिला प्रमाण पत्र अनिवार्य है। नीति कहती है कि आरएनआई प्रसार प्रमाण पत्र जारी होने की तारीख से दो साल तक के लिए वैध होगा, मौजूदा प्रमाण पत्र को प्रसार प्रमाण पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। नीति में कहा गया कि डीजी डीएवीपी को प्रसार के आंकड़ों की आरएनआई या उसके प्रतिनिधि के माध्यम जांच करने का अधिकार सुरक्षित है।

नीति एक समाचार पत्र के बहु-संस्करणों के लिए सूचीबद्धता की प्रक्रिया भी बताती है। यह कहती है कि पीआरबी कानून के मुताबिक जब भी एक समाचार पत्र के एक संस्करण की प्रतियां एक से ज्यादा केंद्र पर छपती हैं और यदि समाचार पत्र की सामग्री अलग-अलग है तो उसे अलग संस्करण माना जाएगा। समाचार पत्र के हर संस्करण के लिए एक अलग आरएनआई पंजीकरण संख्या की जरूरत है और आरएनआई को प्रसार के सत्यापन के साथ हर संस्करण के लिए अलग इकाई माना जाएगा। हालांकि नीति के दिशानिर्देशों में उल्लेख है कि यदि एक समाचार पत्र अपनी सुविधा के लिए एक संस्करण को एक से ज्यादा प्रिंटिंग प्रेस में छापता है तो उस संस्करण को अंक देते समय इस बात को ध्यान में रखा जा सकता है।

बिलों के भुगतान और समायोजन के लिए नीति में यह अनिवार्य बनाया गया है कि डीएवीपी को अनिवार्य तौर पर ईसीएस या एनईएफटी के माध्यम से विज्ञापन बिलों का भुगतान सीधे समाचार पत्र/कंपनी के खाते में सीधे जमा करना होगा। यह भी उल्लेख किया गया है कि समाचार पत्र डीएवीपी द्वारा जारी रिलीज ऑर्डर मिलने के बाद ही डीएवीपी विज्ञापनों का प्रकाशन करेंगे।

सभी श्रेणियों के समाचार पत्रों को प्रोत्साहन

नीति में इस बात का भी उल्लेख है कि डीएवीपी द्वारा जारी विज्ञापनों के एवज में भुगतान के लिए दर संरचना का निर्धारण दर संरचना समिति की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा। नीति में उन समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में विज्ञापनों को प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने पर प्रीमियम की व्यवस्था भी की गई है, जिनकी प्रसार संख्या एबीसी/आरएनआई द्वारा प्रमाणित है। डीएवीपी पहले पृष्ठ पर रंगीन/काला-सफेद के लिए डीएवीपी दरों से 50 प्रतिशत ज्यादा, तीसरे पृष्ठ के लिए 20 प्रतिशत ज्यादा, पाचवें पृष्ठ के लिए 10प्रतिशत ज्यादा और अंतिम पृष्ठ के लिए 30 प्रतिशत ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करेगा, जो उन्हीं समाचार पत्रों को मिलेगा, जिनकी प्रसार संख्या एबीसी/आरएनआई द्वारा मान्यता प्राप्त है।

यह नीति बड़ी श्रेणी के ऐसे समाचार पत्रों को प्रोत्साहन देने वाली है जो डीएवीपी की दरों पर शैक्षणिक संस्थानों के ज्यादा विज्ञापनों के प्रकाशन के इच्छुक हों, उन्होंने दूसरे समाचार पत्रों की तुलना में वॉल्यूम के लिहाज से 50 प्रतिशत अतिरिक्त कारोबार देने का प्रावधान है। नीति में समाचार पत्रों/पत्रिकाओं को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जो छोटी (प्रतिदिन 25,000 प्रतियों से कम), मध्यम (25,001-75,000 प्रतियां प्रतिदिन) और बड़ी (प्रतिदिन 75,000 प्रतियों से ज्यादा) हैं।

सरकारी विज्ञापनों को जारी करने में समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना

नई नीति के क्रम में समचार पत्रों/पत्रिकाओं की विभिन्न श्रेणियों के बीच निष्पक्षता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में बोर्ड ने सरकार के सामाजिक उद्देश्यों को भी शामिल किया है। नीति में क्षेत्रीय भाषाओं/बोलियों के छोटे औ मझोले समाचार पत्रों, व्यापक प्रसार वाले समाचार पत्रों (प्रसार 1 लाख से ज्यादा), पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूहों के समाचार पत्रों को विशेष प्रोत्साहन देने के लिए पैनल की प्रक्रिया में लचीलापन देने का उल्लेख भी किया गया है। नीति में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि डीएवीपी सामाजिक संदेशों और संबंधित विज्ञापनों को ज्यादा संख्या में जारी करने का प्रयास करेगा, जो पत्रिकाओं के लिहाज से किसी विशेष तारीख के लिए न हों।

समान क्षेत्रीय पहुंच को बढ़ावा देने के लिए नीति में जोर दिया गया है कि पूरे भारत के लिए निर्धारित विज्ञापन बजट को सभी राज्यों के बीच हर राज्य/भाषा में समाचार पत्रों की प्रसार संख्या के आधा पर बांटा जाएगा। नीति में इस बात का भी उल्लेख है कि पीएसयू और स्वायत्त संस्थाएं डीएवीपी के पैनल में शामिल समाचार पत्रों को सीधे डीएवीपी दरों पर विज्ञापन जारी कर सकती हैं। हालांकि, उन सभी को सभी वर्गीकृत जारी करने और सभी छोटी, मझोली व बड़ी श्रेणियों के विज्ञापनों के प्रकाशन के लिए डीएवीपी द्वारा तय प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

ग्राहक मंत्रालयों द्वारा डीएवीपी को जल्दी और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना

नीति में डीएवीपी के सभी ग्राहकों को नए वित्त वर्ष के पहले महीने के भीतर डीएवीपी को बीते साल के वास्तविक खर्च का 50 प्रतिशत भुगतान अधिकार पत्र / चेक / डीडी / एनईएफटी / आरटीजीएस के माध्यम से करने के लिए निर्देशित किया गया है। साथ ही वित्त वर्ष की 28 फरवरी से पहले बाकी भुगतान करने के भी निर्देश दिए गए हैं। वैकल्पिक तौर पर ग्राहक मंत्रालयों को विज्ञापनों पर अनुमानित खर्च का 85 प्रतिशत तक अग्रिम भुगतान भी करना पड़ सकता है। डीएवीपी विभिन्न मंत्रालयों / विभागों / पीएसयू / स्वायत्त संगठनों की तरफ से विज्ञापन जारी करने के लिए भारत सरकार की नोडल एजेंसी है, जिन्हें भारत सरकार से वित्त मिलता है।

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