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मध्य प्रदेश

‘संज्ञा’ और ‘सर्वनाम’ के फेर में उलझे डिप्टी सीएम देवड़ा टीवी और सोशल मीडिया पर लपक लिए गये!

चैतन्य भट्ट-

भी मध्य प्रदेश के आदिवासी मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया पर दिए गए विवादास्पद बयान की स्याही सूखी भी नहीं थी कि प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के एक बयान ने राजनीति में फिर से तूफान ला दिया।

जबलपुर में सिविल डिफेंस वॉलिंटियर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने बयान में कहा “मन में बहुत क्रोध था जो दृश्य उन्होंने देखा कि जो पर्यटक के रूप में घूमने गए थे और वहां चुन चुनकर धर्म पूछ-पूछ करके महिलाओं को एक तरफ खड़ा कर उनके सामने गोली मारी, बच्चों के सामने गोली मारी, उस दिन से बहुत तनाव था पूरे देश के लोगों के दिमाग में कि जब तक इसका बदला नहीं लिया जाएगा और जिन माताओं के सिंदूर को मिटाने का काम जिन आतंकवादियों ने किया और आतंकवादियों को जिन्होंने पाला जो पाल रहे उनको नेस्तनाबूत नहीं कर देंगे, तब तक चैन की साथ नहीं लेंगे।

मैं यशस्वी प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगा और पूरा देश, देश की वो सेना वो सैनिक उनके चरणों में नतमस्तक हैं उनके चरणों में पूरा देश नतमस्तक है, उन्होंने जो जवाब दिया उसकी जितनी सराहना की जाए एक बार उनके लिए जोरदार तालियां बजाकर स्वागत कीजिए।

जैसे ही यह बयान मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के निजी चैनल IBC 24 में जारी हुआ वैसे ही पूरे राजनीतिक जमात में हड़कंप मच गया। आरोपों की झड़ी लग गई कि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सेना का अपमान कर दिया। देखते ही देखते उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तमाम चैनलों और सोशल मीडिया के निशाने पर आ गए।

इधर जैसे ही उनका यह बयान वायरल हुआ कलेक्टर जबलपुर दीपक सक्सेना की ओर से एक खंडन जारी किया गया जिसमें कहा गया कि उपमुख्यमंत्री के बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया जिससे भ्रम की स्थिति निर्मित हुई लेकिन जब तक ये खंडन जारी हुआ तब तक देश के तमाम रीजनल और राष्ट्रीय चैनलों में यह खबर सुर्खियों में आ गई। जाहिर है कि जैसे ही यह खबर सुर्खियों में आई कांग्रेस में इसे लपक लिया और तमाम बड़े नेताओं ने जिसमें प्रियंका गांधी, सुप्रिया श्रीनेत, विवेक तंखा, जीतू पटवारी जैसे नेताओं ने कहा कि जगदीश देवड़ा द्वारा सेना का अपमान अत्यंत शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है। इस देश की सेना और सैनिक प्रधानमंत्री मोदी के चरणों में नतमस्तक है सेना के शौर्य का अपमान है।

विवेक तंखा ने कहा “आप क्या कह रहे हैं देवड़ा जी मोदी जी और देश की जनता हमारे वीर सेना के प्रति समर्पित और नतमस्तक है आप लोग देश की और सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल क्यों गिरा रहे हैं”? कांग्रेस के इस बयान पर भाजपा नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे कांग्रेस का राजनीतिक षड्यंत्र बताया।

सवाल इस बात का है कि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने वास्तव में क्या कहा और वह वास्तव में क्या कहना चाहते थे, लेकिन यदि हिंदी व्याकरण के संज्ञा और सर्वनाम के हिसाब से देखा जाए तो संज्ञा किसी व्यक्ति वस्तु या स्थान के लिए प्रयुक्त की जाती है और अगर उसे पुनः व्यक्त करना है तो उसके लिए सर्वनाम का उपयोग किया जाता है। जगदीश देवड़ा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहेंगे और देश की सेना, सैनिक “उनके” चरणों में नतमस्तक हैं। यानी उनके शब्द का प्रयोग प्रधानमंत्री के लिए सर्वनाम के रूप में उपयोग किया गया था।

यह सर्वनाम “अन्य पुरुष” के रूप में प्रयोग किया जाता है जिसमें इनके, उनके, इनका, उनका, जैसे शब्द शामिल हैं। यदि जगदीश देवड़ा इस वाक्य को इस तरह से कहते कि “देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने देश की सेना को खुली छूट दी थी जिसके परिणाम स्वरूप देश की सेना ने जो शौर्य और वीरता दिखाई उसके लिए उस सेना और उन तमाम सैनिकों के सामने पूरा देश नतमस्तक है इस वाक्य से सेवा के शौर्य को सलाम होता, लेकिन चूंकि प्रधानमंत्री को हम धन्यवाद देना चाहेंगे और पूरा देश, देश की वो सेना, वो सैनिक उनके चरणों में नतमस्तक हैं।

यहीं आकर सारा मामला बिगड़ गया क्योंकि “उनके” शब्द को प्रधानमंत्री से जोड़ दिया यानी संज्ञा और सर्वनाम के बीच का जो छोटा सा अंतर होता है उस अंतर ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को झमेले में फंसा दिया। यद्यपि वे अपनी सफाई में स्पष्ट कह रहे हैं कि कांग्रेस मुद्दा विहीन है और इस तरह की बयान बाजी कर रही है वे कार्यवाही के लिए शिकायत भी करेंगे।

कुल मिलाकर यदि देखा जाए तो सर्वनाम के एक शब्द “उनके” ने इस पूरे मसले को हवा दे दी दरअसल शब्दों का चयन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। जिस तरह से शब्दों का चयन विजय शाह ने किया था जो विवाद का विषय बना इस तरह शब्दों का चयन उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा किए जाने के कारण यह पूरा मामला देश के मीडिया में छा गया, चूंकि वर्तमान में सेना के शौर्य और पराक्रम को लेकर पूरे देशवासियों के दिलों दिमाग में बेहद सकारात्मक छवि बनी हुई है ऐसे में जगदीश देवड़ा के बयान ने सेना के मनोबल को गिराने का मुद्दा बना लिया देखना ये है कि अब इस मुद्दे पर राजनीति कहां तक पहुंचती है।

भारतीय जनता पार्टी इस पर क्या एक्शन लेती है यह भविष्य के गर्भ पर निर्भर करता है।

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