प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी समूह से जुड़े धन-शोधन मामले में जेपी समूह के पूर्व प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया, लेकिन देश के प्रमुख राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस महत्वपूर्ण कार्रवाई को लगभग नज़रअंदाज़ कर दिया। 13 नवंबर 2025 को की गई इस गिरफ्तारी से जुड़ा प्रेस विज्ञप्ति ईडी द्वारा जारी हो चुका है, जिसमें विस्तृत जानकारी मौजूद है।
ईडी के अनुसार, नेहरू जयंतीनगर जैप्रीशियल लिमिटेड (एनजेसीएल) और इसकी सहयोगी कंपनियों से जुड़े धन-शोधन की जांच लंबे समय से चल रही थी। आरोप है कि जेपी समूह के कई प्रोजेक्टों और वित्तीय लेन-देन में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। मनोज गौड़ पर कंपनी के फंड के दुरुपयोग और अवैध वित्तीय गतिविधियों में केंद्रीय भूमिका निभाने का संदेह है। ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत मनोज गौड़ को गिरफ्तार किया है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ईडी और जेपी विहार तथा अन्य परियोजनाओं के निवेशकों, खरीदारों और शिकायतकर्ताओं द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की अपराध शाखा तथा ईडी की संयुक्त टीम ने वित्तीय अनियमितताओं के अनेक सबूत जुटाए। जांच एजेंसियों का कहना है कि परियोजनाओं के लिए लिए गए बड़े कर्ज, अग्रिम भुगतान और निवेशकों के धन का समुचित उपयोग नहीं किया गया। कई बार धन को गलत तरीके से मोड़ा गया, जिससे हजारों निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
ईडी का दावा है कि जांच में कई संदिग्ध लेन-देन, फर्जी भुगतान, ओवर-इनवॉयसिंग और धन के दुरुपयोग के प्रमाण मिले। विभिन्न परियोजनाओं में जुटाई गई लगभग 14,599 करोड़ रुपये की राशि का बड़ा हिस्सा निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य असंगत दिशाओं में खर्च हुआ। ईडी के मुताबिक, अलग-अलग खातों और शेल कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर धन को डायवर्ट किया गया। इसी आधार पर मनोज गौड़ के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की गई।
इससे पहले, 23 मई 2025 को दिल्ली, नोएडा, गाज़ियाबाद और मुंबई में ईडी ने 15 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इन तलाशी अभियानों में जेपी समूह और उससे जुड़ी कंपनियों के कई डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड जब्त किए गए। तलाशी के दौरान ऐसे कई दस्तावेज़ मिले जो धन-शोधन और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि करते हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि जेपी समूह और उससे जुड़े संस्थाओं ने देश-विदेश के कई चैनलों के माध्यम से धन को सर्कुलेट किया और कंपनी की वित्तीय स्थिति को वास्तविक से बेहतर दिखाने के प्रयास किए। ईडी का कहना है कि मनोज गौड़ इस पूरी प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा थे।
अंततः पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर ईडी ने मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया और उन्हें पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत हिरासत में लिया गया। ईडी ने कहा है कि जांच आगे भी जारी रहेगी।
इस बड़े मामले पर राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख समाचार चैनलों और अख़बारों की चुप्पी सवाल खड़े करती है, क्योंकि इतना बड़ा वित्तीय घोटाला और एक बड़े उद्योग समूह के शीर्ष अधिकारी की गिरफ्तारी आमतौर पर सुर्खियों में रहती है। यहां मामला अलग दिख रहा है, और यही इसकी गंभीरता को और बढ़ा देता है।


