रोहिणी सिंह वही रिपोर्टर हैं जिन्होंने डीएलएफ के साथ राबर्ट वाड्रा के लेन-देन की खबर ब्रेक की थी

Sanjaya Kumar Singh : अमित शाह के बेटे से संबंधित दि वायर की स्टोरी पढ़ने लायक और दिलचस्प है। इससे पता चलता है कि सत्ता हाथ में आ जाए तो पैसा कमाना कैसे आसान हो जाता है और कैसे-कैसे तर्क बनाए जा सकते हैं। मानहानि के मुकदमे का विकल्प तो है ही। इस मामले में वायर ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से उपलब्ध आंकड़े पेश किए हैं और उनकी संपत्ति में भारी वृद्धि से संबंधित जानकारी मांगने पर पहले तो जय शाह ने कहा कि वे व्यस्त हैं और फिर उनके वकील का जवाब आया और उसमें धमकी भी थी।

रोहिणी सिंह

जवाब में मोटे तौर पर कमोडिटी बिजनेस में 80 करोड़ का कारोबार ज्यादा नहीं है, जैसी दलीलें हैं। वायर ने वकील का जवाब तो छापा ही है और धमकी भी छाप दी है। वकील ने कहा है कि जय शाह सार्वजनिक जीवन में नहीं हैं। वायर ने लिखा है कि उसे शाह (जय) से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है और जब मिलेगी तो वह प्रकाशित करके खुशी महसूस करेगा। खास बात यह है कि दि वायर की यह खबर रोहिनी सिंह ने की है और ये वही रिपोर्टर हैं जिसने डीएलएफ के साथ रॉबर्ट वाड्रा के कारोबारी लेन-देन की स्टोरी ब्रेक की थी।

रोहिनी अभी हाल तक इकनोमिक टाइम्स में थीं। रॉबर्ट वाड्रा का मामला आपको याद ही होगा। और यह भी कि उसे जेल जाना था पर तीन साल से लोग इंतजार कर रहे हैं। हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष का बेटा भले ही अलग मामले में जेल चला गया पर रॉबर्ट का कुछ नहीं हुआ। अब वैसा ही मामला जय शाह का आया है तो भाजपा वाले मानहानि के दावे से मामले को दबाने की कोशिश में लग गए हैं – जो रॉबर्ट ने नहीं किया था। भाजपाई भक्तों की दलील मानें तो रॉबर्ट इसीलिए दोषी हैं और जय शाह इसी लिए निर्दोष हैं। जय हो। पर इससे बात बनती होती तो क्या बात थी।

राबर्ट वाड्रा और जय शाह

खबर में लिखा है कि दुनिया भर में राजनीतिकों के रिश्तेदारों के कारोबारी मामलों की जांच जनता करती है और उस पर उंगली उठाती है खासकर तब जब सत्ता के साथ किस्मत भी बदलती दिखे। इस खबर के मुताबिक रॉबर्ट वाड्रा का मामला ऐसा ही था। उन्हें डीएलएफ ने अनसिक्योरड एडवांस दिया था और इससे वे अपना कारोबार बढ़ा पाए थे। जय शाह को 15.78 करोड़ रुपए केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज से मिले हैं। और उसकी वार्षिक रिपोर्ट में टेम्पल एंटरप्राइजेज (शाह की कंपनी) को दिए गए कर्ज का विवरण नहीं है। केआईएफएस फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रोमोटर राजेश खंडवाला हैं। वे पहले वायर के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हो गए थे पर बाद में फोन और संदेश का जवाब देना बंद कर दिया।

वकील के पत्र के मुताबिक, खंडवाला कई साल से जय शाह के परिवार के शेयर ब्रोकर हैं। जय शाह की कंपनी को नवीन और अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के तहत आने वाली आईआरईडीए से भी 10.35 करोड़ रुपए का कर्ज मिला है। उस समय पीयूष गोयल इस विभाग के मंत्री थे। शाह के वकील ने इस कर्ज को जायज बताया है पर यह नहीं बताया है कि कमोडिटी बिजनेस करने वाली किसी कंपनी को यह कर्ज किस आधार औऱ योग्यता पर दिया गया। वायर ने लिखा है कि इस संबंध में आईआरईडीए का जवाब बाद में देगा। पर लगता है कि वह रह गया है।

Sheetal P Singh : क्या संयोग है. इन दोनों बांकों (राबर्ट वाड्रा और जय शाह) के कारनामे उजागर करने वाली पत्रकार एक ही हैं. रोहिणी सिंह. UPA के समय वाड्रा और NDA के समय जय शाह.

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह और शीतल पी सिंह की एफबी वॉल से.

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