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दिल्ली

दूसरी विपक्षी पार्टियों के यहाँ छापे पड़ते हैं तो ‘आप’ वाले मुँह सिल लेते हैं!

साक्षी जोशी-

ये कटु सत्य है, AAP कभी नहीं बोलती। अरविंद केजरीवाल तो ऐसे मौन धारण कर लेते हैं जैसे अब सालों साल बोलने ही नहीं वाले। ये पार्टी सिर्फ तब बोलती है जब खुद पर आती है। साथ होंगे, तो मुट्ठी बनेंगे, ज़्यादा मज़बूत होंगे आप लोग। स्वार्थ से किसी का भला नहीं होगा।


सिसोदिया के पास 18 मंत्रालय हैं, केजरीवाल के पास एक भी नहीं!

-निशीथ जोशी-

अरविंद केजरीवाल ने जून के पहले हफ्ते में कहा था कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के बाद अब डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी किसी मामले में फंसा कर गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही है। केजरीवाल ने दावा किया था कि उनके विश्वसनीय सूत्रों ने उनको जानकारी दी थी। तो क्या ये वही सूत्र थे जो नई आबकारी नीति के बारे में अंदरखाने जांच शुरू होते ही अपने फंसने के भय से अरविंद केजरीवाल के मुखबिर बन गए थे।

सत्येंद्र जैन के मामले में पुख्ता सबूत मिलने के बाद से ही अरविंद केजरीवाल ने उनको उनके हाल पर छोड़ दिया है। सत्येंद्र जैन को मंत्री पद से इसलिए नहीं हटाया जा रहा है कि कहीं वे अपना मुंह न खोल दें। इसलिए अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। अदालत के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल बेचारा बन कर मजबूरन सत्येंद्र जैन को मंत्री मंडल से अलग करने का नाटक भी कर सकते हैं।

केजरीवाल के दांव पेंच देख कर लगता है कि अब मनीष सिसोदिया के मामले में भी वही रणनीति अपनाई जाएगी। वैसे भी अरविंद केजरीवाल ने कोई भी मंत्रालय अपने पास नहीं रखा है ताकि जब भी कोई मामला पकड़ा जाए तो संबंधित विभाग के मंत्री का गला फंसने पर वे साफ सुथरी छवि के साथ खुद को अलग साबित कर सकें।

जहां तक बात है मंत्रियों द्वारा की गई आर्थिक गड़बड़ी पकड़ने जाने की तो स्वयं अरविंद केजरीवाल ( आई आर एस ) भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रहे हैं। वे जानते ही होंगे कि अगर जांच एजेंसियां गहराई से अध्ययन करने लगें तो वित्तीय अनियमितता पकड़ी जा सकती है। हो सकता है इसलिए उन्होंने खुद को मंत्रालयों से अलग बनाए रखा है।

फिलहाल न्यूयॉर्क टाइम्स और गल्फ न्यूज में दिल्ली के स्कूलों की विज्ञापन नुमा खबर प्रकाशित होने के बाद दिल्ली की शिक्षा प्रणाली पर भी बहुत से खुलासे हो रहे हैं। उधर न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी विश्वसनीयता दांव पर लगते देख सफाई देनी शुरू कर दी है। ये वही न्यूयॉर्क टाइम्स है जो भारत और भारत सरकार के खिलाफ जहर उगलता रहता है। कहीं न्यूयॉर्क टाइम्स को किसी और माध्यम से तो भुगतान नहीं किया जा रहा है। क्योंकि चीन ने भी अमरीका सहित अन्य मीडिया में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बहुत धन खर्च किया है। इसके लिए उसने कई अलग अलग चेहरे और लोग खड़े कर रखे हैं। इन सब मुद्दों को लेकर आने वाले दिनों में चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।


केजरीवाल को छापे का आभास हो गया था

-अवधेश कुमार-

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई छापामारी और पूछताछ होगी तो आम आदमी पार्टी का विरोध सामने आएगा ही। सीबीआई छापा के पहले ही कई सप्ताह से अरविंद केजरीवाल लगातार आरोप लगा रहे थे कि केंद्र सरकार जानबूझकर मनीष को सीबीआई के फंदे में फंसाने वाली है।

जाहिर है, उन्हें इसका आभास हो गया था। हालांकि दिल्ली के मुख्य सचिव ने उपराज्यपाल को नई आबकारी नीति की सीबीआई से जांच कराने की अनुशंसा की थी। उसी आधार पर उपराज्यपाल ने अनुशंसा कर दी।

उपराज्यपाल के अनुशंसा के बाद सीबीआई को आना ही था। दिल्ली की आबकारी नीति को देखने से ही लगता है कि इसमें नियमों का तो अतिक्रमण है ही इसके पीछे भ्रष्टाचार भी हुआ है। हालांकि अब अरविंद केजरीवाल सरकार ने इसे बदल दिया है। फिर से पुरानी नीति लागू हो गई है। लेकिन बदली हुई नीति की आज जांच तो होगी।

आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल सरकार को अगर यह गलत लगता है तो अभी तक वह सुप्रीम कोर्ट या दिल्ली हाईकोर्ट क्यों नहीं गई?

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