
शालिनी श्रीनेत-
अच्छा सुनो! तुमसे एक बात कहनी थी, जिस तरह मोनालिसा के पीछे पुरुष पड़े हैं, डर लग रहा है। क्या सच में सुंदर होना इतने कमाल की चीज है? बिना शिक्षा ग्रहण किए, बिना किसी रियाज़ के कुछ भी मिल सकता है?
वो मोनालिसा जो कुंभ मेले में मिली थी, माला बेचते हुए…
सुनने में आ रहा है कि अब उसने कोई फिल्म साइन की है। क्या सच में सिर्फ सुन्दरता इतनी मायने रखती है फिल्म इंडस्ट्री में? कि मोनलिसा बिना किसी कोर्स, पढ़ाई के भी अचानक इतने ऊपर उठा दी गई है?




हम सबने सुना है कि किस तरह किसने मेहनत की, फिल्मी दुनिया में पहुंचने के लिए और कितने अभी भी एड़ियां घिस रहे हैं। क्या-क्या जुगत नहीं करनी पड़ती फिल्म इंडस्ट्री में पहुंचने के लिए। जब हीरो हीरोइन सक्सेस हो जाते हैं तब अपने संघर्ष की कहानियां मीडिया को बताते हैं जिसके माध्यम से हमारे तक पहुंचता है। उसमें कई बार मेंटल हरासमेंटसे लेकर सेक्सुअल हरासमेंट भी शामिल होता है।
तुम्हें क्या लगता है क्या सच में सुन्दरता एक जादुई सीढ़ी है जो कहीं भी पहुंचा सकती है?
बचपन में राजाओं की कहानियां खूब सुनी थी कि सुन्दर कन्या देखते महल में तैयारियां शुरू हो जाती थीं उस कन्या को राजा की रानी बनाने की। कितने राजा ने मछुआरों की बेटियों पर आसक्त हो गये और ये आग्रह लेकर पहुंच गये कि आपकी बेटी मुझे पसंद है हम रानी बनाना चाहते हैं, भला मछुआरे को इससे अच्छा आप्शन कहां मिलेगा कि बेटी रानी बनने जा रही है। खुशी-खुशी हाथ जोड़ते हुए हां कर देते थे।
मुझे लगता है यही बात यहां हुई होगी कि डायरेक्टर साहब ने देखा कि कितनी सुन्दर है माशाल्लाह और सोने पर सुहागा वायरल भी। तो क्यों न परिवार वालों को लोभ देकर लड़की को उड़ा ले जाएं।
क्या किसी ऐतिहासिक फिल्म में कोई रोल मिलेगा? और मिल भी गया तो क्या उस मर्म को समझ कर एक्टिंग कर पाएगी?
क्या पहले से काम कर रही हीरोइने उसे सुझाव देंगी कि बड़े बड़े धुरंधर पड़े हैं तुम सर्वाइव नहीं कर पाओगी।
या वो अपने सुंदरता के बल पर सर्वाइव कर लेगी या काम के साथ पढ़ाई भी कराई जायेगी?
तुम्हें क्या लगता है कि ये मीडिया द्वारा बहाया गया झोंका है, आया है चला जायेगा? या वो अपने विवेक से ठहर कर अपनी पहचान बना लेगी। या कुछ महीनों बाद किसी गुमनाम गली में जीवन बसर कर रही होगी?
लता मंगेशकर के गीत गाकर वायरल हुई रातोंरात स्टार बनी रानू मंडल की तरह…
वैसे तुम पुरूषों को सुन्दर लड़कियां बहुत भाती हैं, भले बाद में परिवार के लेवल पर दिक्कत हो। पर सुन्दर ही होनी चाहिए…
हालांकि अब धारणा बदली है कमाने वाली लड़कियां सुंदर नहीं भी रहेगी तो चलेंगी। पर सुन्दर को देख कर लार टपक ही जाती है।
कोई कुछ भी कह ले… सुन्दरता मायने रखती है… ये साबित कर दिया कुंभ मेले की भीड़ ने… जिस तरह मोनालिसा को देखने के लिए भीड़ उमड़ती थी, देखकर घबराहट होती थी।
हालांकि हमने सामने से नहीं देखा भीड़ को, मीडिया ने जितना दिखाया बहुत भयानक थी।
मैं कुंभ नहाने नहीं गयी, मुझे लगता है न पाप करो न धोओ।
अच्छा एक बात बताना क्या तुम भी कुंभ मेले में गये होते तो उस सुंदर लड़की को देखने के लिए भीड़ का हिस्सा बनते? नहीं-नहीं बस यूं ही पूछ लिया… तुम ये मत समझना कि हम तुम्हें छिछोरा समझ रहे हैं।
जबाब जरूर देना
तुम्हारे जवाब के इंतज़ार में
शुभरात्रि
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