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आज के अखबार : ना आतंकवाद खत्म हुआ, ना घुसपैठ रुकी; बलात्कारी ही नहीं, ‘बल्लेबाज’ भी बचा लिये गये!

संजय कुमार सिंह  

आज के अखबारों में कठुआ में मुठभेड़ की खबर है। इसमें एक जवान के शहीद होने और दो आतंकियो के मारे जाने की सूचना भी है। पांच सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। इनमें सेना के चार जवान और एक एएसपी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार, 25 सितंबर 2024 को कश्मीर में चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में कहा था, आतंकवाद को दफना दिया गया है, अब लौटने नहीं देंगे। भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान की अगुआई कर रहे अमित शाह ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के बिना विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा है कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करके जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा किया। हमने ऐसे कानून लागू किए हैं कि अब कोई भी पत्थर फेंकने की हिम्मत नहीं करेगा।’ कहने की जरूरत नहीं है कि पत्थरबाजी रोकने के कानून बनाने वाली सरकार आतंकवाद पर नियंत्रण नहीं पाने के बावजूद झूठ बोल रही है उसे दफना देने का झूठा दावा किया जा रहा है जबकि मामले बढ़े भी हो सकते हैं। आंकड़ों और आरटीआई कानून की कहानी अलग है और संयोग से वह भी आज ही!

कायदे से आज के अखबारों में यह बात भी बताई जा सकती थी। पर मुठभेड़ की खबर भर है। इंडियन एक्सप्रेस में यह सिंगल कॉलम में है, अमर उजाला में तीन कॉलम में। अमर उजाला में यह दावा भी किया गया है कि मारे गये आतंकी स्थानीय हैं। अमूमन ऐसे मामलों में फर्जी मुठभेंड़ की खबर होती है और यह कोई नई बात नहीं है पर अभी मुद्दा वह नहीं है। मुद्दा यह है कि पत्थर चलाने से रोक दिये जाने वाले कानून के बाद या बावजूद मुठभेड़ हो रही है और सुरक्षाकर्मी मारे जा रहे हैं। यह दस साल राज करने (या सरकार चलाने या सत्ता में रहने) के बाद की स्थिति है। अनुच्छेद 370 हटाने, राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बनाने, पांच साल चुनाव नहीं कराने का हासिल है। और चुनाव से पहले, स्पष्ट रूप से जीतने की कोशिश में किये जा रहे दावे आप पढ़ चुके हैं। यह इस तथ्य के बावजूद है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा है और आज के अखबारों में यह खबर भी है कि, पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर में चुनावों को बाधित करने के लिए लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल किया है। अमर उजाला  की खबर की इस लाइन से यह सवाल उठता है कि क्या इसी कारण कश्मीर में चुनाव नहीं कराये गये या जा सके?

अगर यह वास्तविकता है तो झूठे दावे क्यों किये जा रहे हैं? इससे चुनाव में जीत मिल भी जाये तो भाजपा ऐसा क्या करेगी जो 10 साल केंद्र में और पांच साल केंद्र शासित प्रदेश बनाकर नहीं कर पाई। चुनाव प्रचार में यह सब बताया जाना चाहिये पर दि एशियन एज की आज की लीड के अनुसार प्रधानमंत्री ने जम्मू में दावा किया है, भाजपा जम्मू और कश्मीर में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनायेगी। 400 पार के नारे का जो हश्र हुआ उसमें कम से कम प्रधानमंत्री को ऐसा दावा निश्चिंत होने पर भी नहीं करना चाहिये और कर रहे हैं तो वाकई बड़ी खबर है जिसे दि एशियन एज़ ने पर्याप्त महत्व देकर जग जाहिर किया है वरना स्थानीय लोग तो सब जानते ही हैं। प्रधानमंत्री के जम्मू के भाषण के इतना महत्व देने का कारण यह भी हो सकता है कि अखबार ने कांग्रेस के चुनाव प्रचार को भी महत्व दिया है और हरियाणा के लिए कांग्रेस की घोषणा भी तीन कॉलम में छपी है।

वैसे, हरियाणा में भाजपा के दावे की खबर अमर उजाला में छपी है। शीर्षक है, हरियाणा में मध्य प्रदेश जैसा फूटेगा कांग्रेस का गुब्बारा : मोदी”। पीएम बोले – शाही परिवार अमेरिका में कह रहा दलितों का आरक्षण खत्म कर देंगे। राहुल गांधी ने जो कहा है वह छपता नहीं है और प्रधानमंत्री उसे गलत ढंग से प्रस्तुत करें तो उसे भी प्रमुखता मिलती है। यह अलग मुद्दा है और उदाहरण है, प्रधान मंत्री का यह कहना जिसे अमर उजाला ने हाइलाइट किया है, कांग्रेस सिर्फ लूट ही नहीं करती, लूटने वालों का बचाव भी करती है। अगर करती भी हो तो आप जानते हैं कि भाजपा सरकार पूरी ताकत लगा कर भी 10 साल में किसी कांग्रेसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाई है। जो कार्रवाई हुई है वह क्या थी और क्यों हुई। जो मामले थे साबित नहीं हुए आदि आदि। पर भाजपा जो कर रही है वह सबके सामने है। प्रधानमंत्री एक आम प्रचारक की तरह कुछ भी बोलते हैं और उसे प्रमुखता मिलती है। इसमें यह तथ्य भी है कि बल्लेबाज विधायक के खिलाफ मामला साबित नहीं हुआ। फोटो वीडियो गवाह के बावजूद। जो पीटे गये उन्हीं ने कह दिया कि उन्हें कुछ याद नहीं है। इसपर आगे पढ़िये। गनीमत यही है कि सारे अखबार एक जैसे नहीं हैं। अलग स्कूलों से अलग तरह की पत्रकारिता पढ़ने वाले लोग अभी भी काम पर हैं।

जहां तक मेरे सात अखबारों की बात है, आज सभी अखबारों में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि को उपमुख्यमंत्री बनाये जाने की खबर पहले पन्ने पर है। इंडियन एक्सप्रेस ने तो यह खबर 19 जुलाई को ही छाप दी थी और आज इस खबर के साथ बताया भी है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह दो कॉलम में, द हिन्दू में चार कॉलम में, टाइम्स ऑफ इंडिया में टॉप पर दो कॉलम में है। शीर्षक में ‘बेटे का उदय’ भी बताया गया है। द टेलीग्राफ और नवोदय टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं दिखी लेकिन अमर उजाला में सिंगल कॉलम की खबर है। शीर्षक है, स्टालिन के बेटे उदयनिधि को बनाया डिप्टी सीएम सेंथिल फिर बनेंगे मंत्री। इसमें बताया गया है, रिश्वत लेकर नौकरी देने के मामले में बालाजी (सेंथिल) को बृहस्पतिवार को ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है। नये मंत्री अपराह्न 3:30 बजे शपथ लेंगे। जहां तक भारत में 10 साल सरकार चलाने और उससे देश को या नागरिकों को मिले फायदे या स्थिरता की बात है, बांग्लादेश से घुसपैठ पर खबर आज द हिन्दू में है। खबर के बांग्लादेश से घुसपैठ की समस्या का नया रूप है। दूसरी ओर, सरकारी अफसर को बल्ले से पीटने के आरोपी भाजपा विधायक को 9 सितंबर को बरी कर दिये जाने की खबर आज इंडियन एक्सप्रेस में छपी है।

उससे पहले द हिन्दू की खबर के अनुसार, “सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) यूआईडीएआई से कह रहा है कि बांग्लादेश के बिना कागज वाले प्रवासियों के आधार निष्क्रिय कर दिये जायें”। नई दिल्ली डेटलाइन से विजेता सिंह की खबर की शुरुआत ही होती है, पहली बार (की एक कार्रवाई के तहत) सीमा सुरक्षा बल अधिकारियों को लिखकर कह रहा है कि देश में प्रवेश करने या जाने के समय पूर्वी सीमा पर पकड़े जाने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के आधार पंजीकरण रद्द कर दिये जायें। किसी संदिग्ध को पकड़े जाने के बाद बीएसएफ पुलिस को सूचित करता है और यूआईडीएआईको लिखता है कि उसका आधार पंजीकरण निष्क्रिय कर दिया जाये। ऐसा बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया है।

खबर के अनुसार अधिकारी ने कहा कि, “बीएसएफ ने मई में एक बांग्लादेशी को पकड़ा जो नौ वर्षों से चेन्नई में रह रहा था। उसे देश छोड़ते हुए पकड़ा गया। हमें उसके पास आधार कार्ड मिला। पुलिस को सूचित करने के बाद हमने यूआईडीएआई को उसका कार्ड निष्क्रिय करने के लिए लिखा गया। ऐसा मानव तस्करों दलालों के संबंध तोड़ने के लिए किया जा रहा है”। मुझे यह मामला समझ में नहीं आया। अगर कोई नौ साल से भारत में रह रहा था, उसके पास आधार भी है, बांग्लादेश जाने की कोशिश में पकड़ा गया तो यह कैसे तय होगा कि वह भारत से बांग्लादेश जा रहा था या बांग्लादेशी है और उसका आधार निष्क्रिय किया जाना चाहिये। यह काम पुलिस तो फिर भी जांच-पड़ताल के बाद कर सकती है। सीमा सुरक्षा बल कैसे यूआईडीएआई को आधार निष्क्रिय करने के लिए कह रहा है। यह आधार की गंभीरता से भी जुड़ा मामला है।

दिलचस्प यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय 11 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में कहा है कि सीमा सुरक्षा बल संबंधित नागरिक अधिकारियों से संपर्क कर पकड़े गये बांग्लादेशी नागरिकों के आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड आदि रद्द करवा रहा है और यूएडीएआई ने कुछ आधार कार्ड रद्द भी किये गये हैं। सवाल यह है कि कोई विदेशी नौ साल भारत में रह लेता है, सभी दस्तावेज बनवा लेता है तो सरकार और सिस्टम क्या कर रहा था? और अगर सारे दस्तावेज बन ही गये तो यह कैसे तय हो गया कि वह बांग्लादेशी है? जो भी हो, क्या केवल कार्ड निष्क्रिय कर देना पर्याप्त है? सिस्टम में सुधार और विदेशी नागरिकों को देश के पहचान पत्र जारी कर दिया जाना साधारण मामला है और इसका संबंध ना खाउंगा ना खाने दूंगा से नहीं है? खबर के अनुसार ऐसा करने का कारण यह है कि पुलिस में शिकायत के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया लंबी है इसलिए संदिग्ध लोगों को जबरन वापस ठेल दिया जा रहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि इसमें कुछ लोगों को ज्यादा अधिकार दिये जा रहे हैं और वह गलती तो कर ही सकता है, दुरुपयोग भी कर सकता है और यह सब आम नागरिकों के खिलाफ है।

खबर के अनुसार 2018 से 2023 तक बीएसएफ ने 18,000 बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पर रोका है जबकि 2023 में 3732 लोग पकड़े गये हैं। इस साल जुलाई तक 1973 बांग्लादेश नागरिक पकड़े गये हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि यह एक गंभीर समस्या है और इसका स्थायी हल निकालने की जरूरत है और 10 साल में कुछ ठोस नहीं हुआ है। जो हो रहा है वह मनमानी के सिवा कुछ नहीं है और इससे स्थिति सुधरने की बजाय बिगड़ेगी और यह सब तब हो रहा है जब सरकार बांग्लादेश ही नहीं पाकिस्तान के हिन्दुओं को भी नागरिकता देने के लिए कानून ले आई है। जाहिर है, बाकी लोग मुसलमान होंगे या नागरिकता लेने के इच्छुक नहीं है। ऐसे लोग क्यों आ-जा रहे हैं और कैसे यह संभव हो रहा है, बड़ा मामला है। ऐसे में अमर उजाला की आज की लीड है, पाकिस्तान हमारी जमीन पर अवैध कब्जा खाली करे…. आतंक की सजा भी मिलेगी। यह विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है और अखबार ने लिखा है, संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेशमंत्री जयशंकर ने पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी। नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, जयशंकर की आतंकवाद पर पाकिस्तान को चेतावनी, कृत्यों के नतीजे होंगे ही। मेरी चिन्ता है कि अगर ऐसा होगा तो बांग्लादेश सीमा पर जो हो रहा है उसके नतीजे नहीं होंगे? उसका जिम्मेदार कौन होगा?

बल्ले से पीटने वाला विधायक बरी

इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी एक खबर के अनुसार 26 जून 2019 को  अतिक्रमण हटाने के एक अभियान के दौरान  इंदौर नगर निगम के अधिकारी धीरेन्द्र सिंह बैंस की पिटाई मामले में भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय और 10 अन्य को बरी कर दिया गया है। यह खबर 9 सितंबर की है। आकाश वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में आकाश को भाजपा का टिकट नहीं मिला था और उनके पिता को इस विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाया गया था। 2019 की घटना खूब चर्चित हुई थी और उसका वीडियो भी है। खबर के अनुसार, नगर निगम के अधिकारी ने अदालत में पूछताछ के दौरान कहा कि वे फोन पर बातचीत में व्यस्त थे इसलिये नहीं देख पाये कि उन्हें किस ने मारा और घटना के फोटो तथा वीडियो के बारे में अधिकारपूर्वक नहीं कह सकते हैं।

आरटीआई को कमजोर करने वाला कानून 

इंडियन एक्सप्रेस की एक दूसरी खबर के अनुसार नीति आयोग ने इस बात को रेखांकित किया था कि डाटा सुरक्षा कानून आरटीआई कानून को कमजोर कर सकता है। पर सरकार ने इसे नहीं माना। नीति आयोग की चिन्ता थी कि सरकारी अधिकारियों की निजी जानकारी का खुलासा किया जाना बृहत्तर जनहित में भी संभव नहीं हो सकता है। इस मामले में विरोध और दबाव के बीच नीति आयोग ने कानून के कुछ प्रावधानों का विरोध किया था और खासतौर से आरटीआई कानून में प्रस्तावित परिवर्तन को रेखांकित किया था जिससे यह कानून कमजोर हो सकता था। सीधे सरल शब्दों में प्रस्तावित डाटा प्रोटेक्शन कानून आरटीआई अधिनियम की धारा में संशोधन है। 

  

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