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उत्तर प्रदेश

पेश है ‘ज्ञानी’ थानेदार द्वारा रचित ‘वैध पत्रकार’ की पुलिसिया परिभाषा!

के. सत्येंद्र-

भारतीय प्रेस परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त तथा सूचना विभाग से अधिकृत लोग ही वैध पत्रकार हैं … ये कहना है एक थानेदार का जो सी एम सिटी, गोरखपुर में तैनात हैं

गोरखपुर: सी एम सिटी की पुलिस में एक से बढ़कर एक ज्ञानी पड़े हैं। ये ज्ञानी लोग अपना काम तो ठीक से कर नहीं पाते लेकिन जो काम इनका नहीं है उस काम में जबरदस्ती अपना अधकचरा ज्ञान रेलते रहते हैं।

सी एम सिटी गोरखपुर के शाहपुर थाने की तो बात ही निराली है। एक से बढ़कर एक महाज्ञानी विद्वान थानेदार यहां आते रहते हैं। अपराधियों और बलात्कारी को लाभ पहुंचाने तथा झूठी रिपोर्ट तैयार कर भ्रष्टाचारियों को बचाने के मामले में इस थाने के थानेदार, दरोगा सहित सी ओ साहब सभी के खिलाफ एक पत्रकार ने न्यायालय में वाद दाखिल कर रखा है जो अभी लंबित है।

दाखिल वाद में इसी थाने के तारणहार थानेदार साहब ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर न्यायालय को यह सनसनी खेज जानकारी दी है कि जो पत्रकार भारतीय प्रेस परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है और जिसके पास सूचना विभाग द्वारा जारी कोई कार्ड उपलब्ध नहीं है वो पत्रकार और उसकी पत्रकारिता वैध नहीं है।

जनाब लिखते हैं कि न्यूज़ पोर्टल चलाने के लिए सूचना विभाग उत्तर प्रदेश शासन से अनुमति भी लेनी चाहिए।

क्यों थानेदार साहब, ऐसी क्या नाराजगी थी कि इतनी सनसनीखेज रिपोर्ट आपने बना डाली। यदि वाकई आपकी रिपोर्ट सही है थानेदार साहब तो आप सभी न्यूज़ पोर्टल वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल क्यों नहीं भेज देते। अपने अधिकारियों को इस विषय पर अपनी सलाह दीजिये थानेदार साहब कि जनपद में संचालित सभी न्यूज़ पोर्टल वालो को अपने पुलिस मीडिया सेल ग्रुप से बाहर कर दे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में इनकी एंट्री ही बैन कर दे। सारा टंटा ही खत्म हो जाएगा।

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