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आज के अखबार : राहुल गांधी पहले पन्ने पर, प्रधान मंत्री जमीन पर और मांग बदलने के आरोप का ‘घूंघट’ बनाना

Newspaper front page reporting: Detentions of Rahul, Priyanka, and Akhilesh; Congress blamed for choosing spectacle over debate, says Pradhan.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर – ऐसे जैसे सूप बोले तो बोले, चलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद….

संजय कुमार सिंह

प्रधानमंत्री के घर के बाहर कुछ घंटे के धरने की खबर के साथ राहुल गांधी आज महीनों-वर्षों बाद पहले पन्ने पर हैं, फोटो के साथ। अचानक हुए इस धरने से सरकार इतना परेशान हुई कि तुरंत ही केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह मौके पर पहुंचे, राहुल गांधी से बात की और राहुल गांधी पर मांगें बदलने का आरोप लगा दिया। हालांकि, राहुल गांधी मांगे मानने से खुश होकर धरना खत्म कर देते तो उनके साथ जबरस्ती नहीं होती, उन्हें जमीन पर लेटना नहीं पड़ता, कपड़े खराब नहीं होते, एक जूता नहीं खोता और सरकार निश्चिंत हो जाती। सरकार की परेशानी जारी है, मांगें न मानने से खबर पहले पन्ने पर है और प्रधानमंत्री को जमीन पर आकर कहना पड़ा है कि पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई होगी। नवोदय टाइम्स ने इसे पांच कॉलम की लीड, एलओपी की भूमिका में राहुल गांधी के बराबर तीन कॉलम में छापा है लेकिन इस घोषणा का कोई मतलब नहीं है इसलिए ज्यादातर अखबारों ने इसे छोटे में निपटा दिया है या पहले पन्ने पर है ही नहीं। यह वैसे ही है जैसे राहुल गांधी पर मांग बदलने का सरकार का आरोप।  दैनिक भास्कर के अनुसार, हुआ यह कि कल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्म दिन था। दोपहर करीब तीन बजे राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता खरगे के जन्म दिन पर इकट्ठे हुए। अचानक कार्यक्रम बना (हो सकता है पहले से तय हो) और सभी नेता पैदल ही प्रधानमंत्री के दरवाजे पर पहुंचे। यह जगह करीब 500 मीटर ही दूर है और धरने पर बैठ गए। अचानक हुए इस धरने से सरकार का परेशान होना स्वाभाविक था और धरने की शुरुआती खबरों के साथ ही जितेन्द्र सिंह के राहुल गांधी से बात करने का वीडियो सोशल मीडिया पर आ गया था। बातचीत खत्म हो गई और आज अमर उजाला में खबर है, सरकार बोली – हम संसद में चर्चा को तैयार लेकिन नेता प्रतिपक्ष पलटे… नई शर्त रखी। अमर उजाला ने फोटो भी छापी है। कैप्शन है, राहुल से मिलने पहुंचे केंद्रीय राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविन्द मोहन। प्रधानमंत्री के घर पर धरने से संबंधित कई खबरें आज देशबन्धु में हैं जो दूसरे अखबारों में नहीं के बराबर हैं। पहले पन्ने पर इतनी प्रमुखता से तो नहीं ही हैं। ये खबरें हैं – 1) हर जोर आजमा लो, ये लड़ाई नहीं रुकेगी : राहुल 2) लाठीचार्ज पर जवाब देना होगा : खरगे 3) मोदी की तानाशाही देखिए : खेड़ा और 4) लाठीचार्ज में घायल छात्रों से मिलने पहुंचे राहुल।

आप जानते हैं कि नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से संबंधित भिन्न गड़बड़ियों के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा जा रहा है। इसके समर्थन में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा एक याचिकाकर्ता को कॉक्रोच कहने के बाद बनी कॉक्रोच जनता पार्टी जंतर मंतर पर लंबे समय से धरने पर थी। संसद के मानसून सत्र की घोषणा के बाद सोनम वांगचुक और कई अन्य ने आमरण अनशन शुरू किया। फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो सोमवार को संसद चलो की अपील थी। उसके बाद सरकार ने जबरदस्ती सोनम वांगचुक को धरना स्थल से उठा कर अस्पताल में भर्ती करा दिया और मार्च करने वालों पर पुलिस और सरकारी गुंडों ने जबरदस्त हमला किया। संसद में उस दिन तो हंगामा हुआ ही, अगले दिन भी हुआ लेकिन सरकार ने बात नहीं मानी। तब शाम में धरना हुआ। जिसका भाजपाइयों, कांग्रेस विरोधियों और गोदी वालों ने अपनी तरह से विरोध किया। सरकार की तरफ से मांग बदलने का आरोप लगाया गया और अब पता चल रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देंगे (अमर उजाला)। कहने की जरूरत नहीं है कि नीट के पर्चे 2024 में लीक हुए थे, 2025 में एक भाजपा नेता के पांच करीबियों या परिचितों का नीट में चयन हुआ था और 2026 में फिर लीक हुए जिसकी पुनर्परीक्षा हुई। कार्रवाई के नाम पर प्रधानमंत्री ने प्रचार करवाया था कि पुनर्परीक्षा के दिन छात्रों को दिक्कत नहीं हो इसलिए वे 45 मिनट हवाई अड्डे पर ही रहे। दूसरी ओर यह प्रचार भी किया गया कि बैंगलोर में कांग्रेस की रैली के कारण बच्चों को दिक्कत हुई। कार्रवाई की घोषणा प्रधानमंत्री ने अब की है और राहुल गांधी पर अपनी मांग से पलटने का आरोप अमर उजाला में है जबकि वे मांग से पलटे नहीं हैं, उसमें नई मांगें जोड़ी हैं जो छात्रों के आंदोलन को कुचलने की कोशिश के कारण जरूरी लग रही हैं। कल अखबारों ने (द हिन्दू को छोड़कर) यह बताया था कि 20 जुलाई के मार्च और प्रदर्शन में घायल पुलिस वालों की संख्या ज्यादा है जबकि छात्रों की कम। अब सोशल मीडिया से पता चल रहा है कि पुलिस और उसके बिना वर्दी वाले गुंड़ों ने क्या ज्यादती की। दैनिक भास्कर में आज एक खबर है, पुलिस की कार्रवाई में घायल आंदोलनकारी नया चेहरा बने। खबर के अनुसार, 21 साल की  साक्षी वेंटिलेटर पर है और मध्य प्रदेश के इरशाद को छर्रे लगे हैं। आंख में गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है। देशबन्धु में खबर है कि राहुल गांधी भी जख्मी छात्रों से मिले – पर यह दूसरे अखबारों में नही है।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने तीन कॉलम की खबर के साथ सिंगल कॉलम की एक फोटो छापी है। इसका कैप्शन है – केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एक जख्मी प्रदर्शनकारी से मुलाकात की। सोशल मीडिया पर एक सरकार समर्थक समाचार एजेंसी ने कल ही इसका वीडियो जारी किया था लेकिन उसमें आवाज नहीं थी। दूसरे वीडियो से बताया गया कि क्या बातचीत हुई। आज हिन्दुस्तान टाइम्स में यह फोटो जिस खबर के साथ छपी है उसका शीर्षक है – मोदी ने पेपर लीक के मामले में कार्रवाई पर जोर दिया, (राजग सांसदों से) युवाओं तक पहुंचने के लिए कहा। लगभग ऐसी ही खबर के साथ एक कॉलम की यह फोटो इंडियन एक्सप्रेस में भी है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है – प्रधानमंत्री ने कहा, युवाओं का भविष्य राजनीति से ऊपर है, दोषमुक्त परीक्षा की जरूरत बताई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस खबर को सेकेंड लीड बनाया है। शीर्षक है – पेपर लीक करने वालों को नहीं बख्शूंगा, परीक्षाओं को दोष मु्क्त बना रहा हूं। आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री ने 2014 में 50 दिन मांगे थे, 100 दिन में विदेश से काला धन वापस आना था, किसानों की कमाई दूनी होनी थी और फिर 60 महीने मांगे थे और अब 2047 तक का समय मांगा हुआ है। एक प्रचारक से किताब लिखवाई गई और एक सरकारी बैंक ने इन किताबों की हजारों प्रतियां खरीदने के लिए लाखों का अग्रिम भुगतान कर दिया था। इसके बावजूद किसी को यह पूछने का हक नहीं है कि 2024 में पेपर लीक हुआ, 2026 में फिर हुआ फिर भी शिक्षा मंत्री को क्यों नहीं बदला जा रहा है। द हिन्दू की एक खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजग सांसदों से कहा है,  युवाओं तक पहुंचें। नई दिल्ली डेटलाइन से निस्तुला हेब्बार की खबर इस प्रकार है,  नीट प्रश्न पत्र लीक के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को संसद में घुसने की कोशिश के दौरान पुलिस की सख्ती का सामना करना पड़ा था। इसके एक दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (राजग) के सांसदों से कहा कि उनकी सरकार ने प्रश्न पत्र लीक में शामिल लोगों के खिलाफ “सख्त कार्रवाई” की है। एक बैठक में सांसदों को संबोधित करते हुए, मोदी ने कहा कि परीक्षाओं को लीक-मुक्त रखना एक “राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी” है, न कि पार्टी की राजनीति का मुद्दा। विरोध-प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया के तौर पर देखे जा रहे इस कदम में, श्री मोदी ने अपने गठबंधन के सांसदों से अपील की कि वे युवाओं के साथ सकारात्मक संपर्क बनाए रखें और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में उनका “मार्गदर्शन और मदद” करें।

आप जानते हैं कि जेपी नड्डा कल सीजेपी के पदाधिकारियों के साथ बातचीत की खबरों में थे। एक केंद्रीय मंत्री को हटाने की मांग दूसरे केंद्रीय मंत्री कर रहे थे और आज खबर है कि विपक्ष के नेता से राज्य मंत्री बात कर रहे थे और कह दिया (जो छपा भी है) कि राहुल गांधी ने मांगें बढ़ा दीं। आज खबरों से लग रहा है कि उन्हें क्या कहकर भेजा गया होगा और राहुल गांधी ने जब उन्हें वास्तविकता से अवगत कराया तो वे मुकर गए या वापस चले गए। खबर जो छपी है सो सार्वजनिक है। फिर भी आज टाइम्स ऑफ इंडिया में अभिजीत दिपके के हवाले से खबर है, सरकार ने हमारा समय खराब किया अब कोई भी वार्ता प्रदर्शन स्थल पर होगी। दो प्रदर्शनकारियों की गंभीर स्थिति की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने पर दो कॉलम में है। वैसे टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक आज भी लचर है। हिन्दी में यह कुछ इस तरह होगा – सीजेपी वापस जंतर मंतर पर, पुलिस ने प्रधानमंत्री निवास पर कांग्रेस का धरना खत्म कराया। आज की खबरों से प्रधानमंत्री अगर जमीन पर लग रहे हैं तो कारण द हिन्दू की यह खबर भी हो सकती है। (सिर फोड़ने और टांग तोड़ने जैसी)  कार्रवाई के बाद सीजेपी के विरोध स्थल पर हज़ारों लोग फिर जुटे।  खबर के अनुसार, जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध स्थल पर मंगलवार दोपहर तक, हज़ारों लोग फिर से इकट्ठा हो गए। सुरक्षा बलों ने एक दिन पहले ही कार्रवाई करके उस इलाके को लगभग खाली करा दिया था। बताया जा रहा है कि दिल्ली में पहली बार ऐसी कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों पर शॉक बैटन और पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। छात्र आंदोलन से पहले शिक्षकों को भिन्न तरीके से फंसा और उलझा दिया गया है सो अलग। इधर धर्मेंद्र प्रधान अपने निकम्मेपन के जोरदार विरोध के बावजूद निश्चिंत हैं, रक्षा कवच को मजबूत करने के लिए विपक्ष के नेता के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे पहले पन्ने पर तीन कॉलम में तान दिया है। शीर्षक है – राहुल, प्रियंका, अखिलेश डिटेन किए गए; प्रधान ने कहा, कांग्रेस ने बहस के बजाय (प्रधानमंत्री के घर पर) धरना चुना।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रधान की पोस्ट तीन कॉलम में

धर्मेन्द्र प्रधान के हवाले से छपी इस खबर को पढ़ने से पता चला कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देर रात एक्स पर एक पोस्ट के जरिए राहुल गांधी और कांग्रेस पर यह कहते हुए हमला बोला कि ….. संसद के मानसून सत्र के दौरान बाधा खड़ी करने के लिए वे अभी भी छात्रों का इस्तेमाल राजनीतिक औजार के रूप में कर रहे हैंदेशबन्धु में पांच कॉलम के बॉटम की खबर है, छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे शरद पवार। संजय राउत व केजरीवाल भी जंतर मंतर पहुंचे। यहां तो खबर भी है, छात्रों के मुद्दों पर संसद के दोनों सदनों में हंगामा। इसमें हाइलाइट किया हुआ अंश है, प्रश्नकाल व सूचीबद्ध विधायी कार्य नहीं हो सके। इसके बावजूद शिक्षा मंत्री ने एक्स पर असत्य लिखा जिसे इंडियन एक्सप्रेस ने खबर बना दिया है। पहले पन्ने पर तान दिया है जबकि इसके नीचे खुद ही खबर छापी है, इस खबर के नीचे पहले पन्ने पर एक शीर्षक है – अगले दिन, जख्मी वापस जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दि एशियन एज की लीड सीजेपी के प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थरबाजी की खबर है। इस आधार पर जंतरमंतर को तनाव ग्रस्त बताया गया है। कल मैंने लिखा था कि मार्च शुरू होने से पहले पत्थरों से भरा एक ट्रक वहां खड़ा था। उससे संबंधित कोई स्पष्टीकरण नहीं है। ना ही, बिना वर्दी वाले लठैतों के बारे में कोई जानकारी है ना नेम प्लेट हटाने का कारण बताया गया है। इलाके के सीसीटीवी क्यों बंद किए गए यह भी पता नहीं है। इंटरनेट भी बंद कर दिए गए थे लेकिन दि एशियन एज ने पत्थरबाजी की इस खबर को न सिर्फ लीड बनाया बल्कि प्रधानमंत्री के प्रण, नीट के पेपर लीक करने वालों को सजा दी जाएगी – को सेकेंड लीड बनाया है। और भी बड़ी-बड़ी बातें हैं पर यह सब पहली बार लीक होने पर कहा जाता तो लीड बनती। अब सिर्फ दि एशियन एज ने बनाया है। द टेलीग्राफ ने पूरे मामले का शीर्षक एक शब्द को बनाया कॉक्रेज। यह कॉक्रोच (यानी तिलचट्टे) और रेज (यानी गुस्सा) को तिलचट्टों के गुस्से के रूप में पेश किया है। जाहिर है मामला ऐसा ही है तभी प्रधानमंत्री अब प्रण कर रहे हैं और लोग पूछ रहे हैं कि इतनी जल्दी वार्ता कैसे हो गई या पूरा मामला कांग्रेस-भाजपा की मिलीभगत का था।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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