महेंद्र सिंह-
रायबरेली में काफ़ी दिनों से पत्रकार Rohit Mishra और मेडिकल स्टोर संचालक के बीच जंग चल रही थी. जिसमे बकायदा जाँच हुई और सर्किल ऑफिसर ने पत्रकार के ऊपर लगाए गए मनगढ़त आरोपों के संबंध में मेडिकल स्टोर संचालक से साक्ष्य मांगे जिसे देने में वह विफल रहा, वह कोई साक्ष्य नहीं दे पाया तो अपने अस्तित्व की लड़ाई में जीत पत्रकार की हुई.
अब सवाल ये उठता है कि पत्रकार यदि अपना काम ईमानदारी से ना करे तो जनता बिकाऊ का ठप्पा लगा देती है और यदि काम करे तो रसूखदार लोगो के निशाने पर आ जाता है. आखिर वो करे तो क्या करे ? लोग उसे किस रूप में देखना चाहते है ? समय आ गया है कि जनता decide करे कि उसे विश्वासनीयता चाहिए, सच चाहिए, निष्पक्षता चाहिए या नहीं ?
पत्रकारों को दिन दोपहर बारिश ठण्ड में जिस तरह ताजी सूचनाओं के संकलन के लिए परिवार छोड़ कर भागना पड़ता है ताकि विश्वासनीय खबरें लोगो तक पहुंच सके. क्या ये मेडिकल स्टोर संचालक जैसे लोग एक दिन भी कर पाएंगे, नहीं! कभी नहीं! किन्तु पत्रकारों का मनोबल तोड़ने के लिए ये झट से आगे आ जाते हैं.
आखिर क्यों ?
सत्य बनाम लाभ: पत्रकारों का मुख्य उद्देश्य सत्य को सामने लाना होता है, जबकि इनका लक्ष्य किसी भी तरह लाभ कमाना होता है, वो लाभ चाहे कानून की नजर बचा कर गलत रास्ते पर चल कर अर्जित किया गया हो. यहां पर दोनों के कर्म टकरा गए और पत्रकार ने उसे उजागर कर दिया इस बात पर मेडिकल स्टोर संचालक बौखला गया.
आरोपी का मकसद : पत्रकार को चुप करने के लिए आसान होता है उस पर उगाही का आरोप लगाना, आरोप लगाने के साथ अपने राजनीतिक रसूख, सत्ता की पहुँच और धनबल का भरपूर प्रयोग कर सबूत गवाह गढ़ने की भी कोशिश की गई किन्तु एक जाँच रिपोर्ट ने दूध और पानी अलग कर दिया .

यहां मुझे लगता है कि मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाना भी उसके लिए आवश्यक था जिससे नोटों के बंडल वाली खबर भी दब जाये और वो कुछ हद तक सफल भी रहा. जाँच एजेंसियों को भ्रमित करने की उसकी कोशिश कामयाब रही.
रायबरेली के पत्रकार साथियों ने जबरदस्त तारीके से अपनी बात रखी बहुत से अन्य संगठनों ने भी इस जंग में इनके कंधे से कन्धा मिलाया, उन सब से मेरी अपील है जैसे आप सबने पत्रकार साथी Rohit Mishra पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जाँच की बात उठाई कराई वैसे ही इस जंग की मूल खबर नोटों के बंडल मुद्दे का सच सामने आने तक अपनी लड़ाई जरूर जारी रखे.
जनता को आपसे बहुत उम्मीदे हैं. उन्हे तोड़ियेगा मत
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