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JNU विवाद : मुख्य संपादक की कार्रवाई पर रोक संबंधी याचिका नामंजूर, चैनलों पर कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट मांगी

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मामले में टीवी चैनलों की भूमिका को लेकर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। अदालत का आदेश तब अया जब दिल्ली सरकार की तरफ से तीन टीवी चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग संबंधी अर्जी पर सुनवाई की। सरकार का कहना है कि इन टीवी चैनलों ने कन्हैया के जेएनयू परिसर में दिए गए विवादित भाषण वाली वीडियो के साथ छेड़छाड़ की। साथ ही एक न्यूज चैनल के मुख्य संपादक द्वारा कार्रवाई रोक संबंधी याचिका को नामंजूर कर दिया।

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जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मामले में टीवी चैनलों की भूमिका को लेकर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। अदालत का आदेश तब अया जब दिल्ली सरकार की तरफ से तीन टीवी चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग संबंधी अर्जी पर सुनवाई की। सरकार का कहना है कि इन टीवी चैनलों ने कन्हैया के जेएनयू परिसर में दिए गए विवादित भाषण वाली वीडियो के साथ छेड़छाड़ की। साथ ही एक न्यूज चैनल के मुख्य संपादक द्वारा कार्रवाई रोक संबंधी याचिका को नामंजूर कर दिया।

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संपादक ने सरकार की अर्जी पर सुनवाई से रोक की मांग की थी। न्यूज चैनल का कहना था कि इसी वीडियो के आधार पर मुख्य प्राथमिकी दर्ज की गई है जिसमें जेएनयू में प्रदर्शन को मुख्य आधार बनाया गया है। इस बाबत वसंत कुंज नार्थ में मुकदमा दर्ज किया गया था। संपादक का कहना था कि पुलिस पहले ही मामले की जांच कर चुकी है। इसलिए सरकार की शिकायत पर सुनवाई से रोक लगाई जानी चाहिए। वहीं दिल्ली सरकार की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता हरीहरन ने कहा कि यह मामला जेएनयू विवाद से जुड़ी देशद्रोह की मुख्य प्राथमिकी से अलग है।

चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित दास की अदालत ने सरकार की शिकायत पर रोक संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही मामले की सुनवाई को 12 जुलाई तक स्थगित करते हुए कहा है कि पुलिस मामले को लेकर रिपोर्ट दाखिल करे। इस मामले में अदालत ने दिल्ली सरकार की शिकातय पर सुनवाई के लिए आज की तारीख तय की थी। सरकार का कहना था कि बीते 9 फरवरी को जेएनयू कैम्पस में हुई बयानबाजी के वीडियो से छेड़खानी की गई थी। सरकार का यह भी कहना था कि वीडियो में कोई आवाज भी नहीं थी फिर कैसे कहा जा सकता है कि कुछ आपत्तिजनक बोला गया था।

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