नई दिल्ली। सहारा इंडिया परिवार ( सहारा ग्रुप) के वरिष्ठ अधिकारी (एक्जीक्यूटिव डाइरेक्टर) आर.एस. दुबे को कंपनी का प्रमुख (डिप्टी मैनेजिंग वर्कर) बनाया गया है। श्री दुबे कंपनी के संचालन के लिए सभी कानूनी और सभी प्रमुख निर्णय लेने के लिए अधिकृत किये गये हैं।
सहारा ग्रुप की तरफ से इस आशय का एक शपथ पत्र भी पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में जमा किया गया है।
श्री दुबे को कंपनी का हेड बनाये जाने का निर्णय नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक पांच सितारा होटल में करीब 15 दिन पहले मालिकानों एवं कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की एक गोपनीय बैठक में हुआ है। वरिष्ठ निदेशकों और मालिकानों की सहमति से कंपनी के प्रमुख बनाये गये आर.एस. दुबे को वेतन के रूप में अब 15 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। इसके अलावा 75 हजार रुपये प्रतिमाह डायरेक्टर के लिए और आवास, परिवार के खाने-पीने का पूरा खर्च, यात्रा आदि के सभी खर्च के भी नियमित भुगतान किये जायेंगे। इसके अलावा ऑफिस आने-जाने के लिए उन्हें मर्सिडीज बेंज कार भी दिया जायेगा। श्री दुबे अभी तक कंपनी में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद पर तैनात थे। उन्हें 10 लाख रुपये प्रतिमाह नकद और परिवार के सभी खर्चे मिलते थे, लेकिन सहारा के मुखिया सुब्रत राय सहारा के निधन के बाद कंपनी में बढ़ते आर्थिक संकट के कारण सभी एक्जीक्यूटिव डायरेक्टरों का वेतन घटाकर 2 लाख रुपया प्रतिमाह व अन्य खर्चों के भुगतान के साथ कर दिया गया था।
कानपुर के रहने वाले आर.एस. दुबे सहारा ग्रुप में शुरुआती दिनों से जुड़े रहे। जब सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर सुब्रत राय सहारा समेत चार लोगों को तिहाड़ भेजा गया था, उसमें सुब्रत राय के अलावा उनके बहनोई अशोक राय चौधरी, वंदना भार्गव (महिला) और आर.एस. दुबे शामिल थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने महिला होने के नाते वंदना भार्गव को जेल नहीं भेजा, लेकिन तीन लोग करीब 2 सल जेल में बंद रहे।
पिछले दिनों काठमांडू के एक पांच सितारा होटल में जब कंपनी के कार्यवाहक चेयरमैन (प्रमुख) का चयन किया जा रहा था तो बैठक में शामिल आर.एस. दुबे ने प्रमुख का पद स्वीकार करने के पहले एक शर्त रखी। शर्त में उन्होंने कहा कि हमें बाहर कोर्ट में और कंपनी के अंदर अपने कर्मचारियों से भी लड़ना पड़ा रहा है। ऐसे में ग्रुप के सभी कर्मचारियों व रिटायर कर्मचारियों का बकाया वेतन और अन्य सभी देयकों का भुगतान किसी तरह से कर दिया जाये, भले ही कंपनी की कोई संपत्ति बेंचनी पड़े। इससे हमें केवल बाहर कोर्ट में लीगल लड़ाई लड़नी पड़ेगी, जो कंपनी के लिए ठीक रहेगा। इस पर बैठक में शामिल कंपनी के मालिकानों व सभी सदस्यों ने सहमति जतायी।
पिछले कुछ महीनों से सहारा ग्रुप में कंपनी का कोई मुखिया न होने से अराजकता का माहौल था। अधिकांश डायरेक्टर जहां मनमानी पर आमादा थे, वहीं सहारा ग्रुप का मीडिया हाउस देख रहे सुमित राय भी किसी की सुनने को तैयार नहीं थे। जिसके कारण सहारा ग्रुप के न्यूज चैनल सहारा समय के अधिकांश मीडिया कर्मी नोएडा कैंपस में करीब दो माह से धरना दे रहे हैं।
इसी तरह राष्ट्रीय सहारा अखबार के मीडिया कर्मी भी समय से वेतन न मिलने के कारण नाराजगी में पिछले एक माह से मास्टर एडिशन ( सिर्फ एक संस्करण) का अखबार प्रकाशित कर रहे हैं। अब देखना होगा कि मीडिया को लेकर सहारा ग्रुप के नये मुखिया क्या रूख अपनाते हैं।
पढ़ें सहारा समूह का पक्ष-




Rajesh
September 12, 2025 at 11:47 am
अब 5 साल इनको समय दो तब ये समझेंगे 1.5 करोड़ जनता में से 40% जनता भगवान को प्यारे हो चुके होंगे वह रे देश की कानून व्यवस्था
SURJEET SHYAMAL
March 18, 2026 at 1:06 pm
सहारा इंडिया के द्वारा बहुत बड़ा स्कैम हुआ है, जिसमें जमाकर्ताओं का पैसा वापस करने की जगह बार बार अलग अलग स्कीमों में कन्वर्ट किया जाता रहा है. जिसमें आपको कैसे लगता है कि हालत सुधरेगा?