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सुख-दुख

युद्ध अब हथियार से नहीं लड़े जाते… वरना रूस क्यों हारता!

दया शंकर शुक्ल सागर-

नए जमाने में युद्ध सिर्फ मिसाइल और बारुद से नहीं लड़े जाते, युद्ध नरेटिव से लड़े और जीते जाते हैं. और नरेटिव की इस लड़ाई में रूस हारता दिख रहा है. सोशल मीडिया पर सारी दुनिया में वह अलग-थलग पड़ गया है.

तबाही बेशक यूक्रेन में ज्यादा दिख रही है लेकिन अंदर ही अंदर रूस खोखला हो रहा है. रूबल की कीमत के साथ उसकी साख दोनों तेजी से नीचे गिर रही है. इसलिए बेबस रूस हर दूसरे दिन परमाणु बम की धमकी दे रहा है और जैसा कि सब जानते हैं धमकी कमजोर राष्ट्र देते हैं.

रूसी सेना की सबसे बड़ी हार ये है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य ताकत होने के बावजूद वह आज आठवें दिन भी यूक्रेन की जनता का हौसला नहीं तोड़ पाया. यूक्रेन की जनता आपने देश के साथ है. वह मरने मिटने को राजी है पर झुकने के लिए तैयार नहीं. यूक्रेन की औरतें बम बना रही है. नौजवान सेना में भर्ती हो रहे हैं. और रूस में ?

ये युद्ध रूस नहीं पुतिन लड़ रहा है. रूस की आधी जनता सड़क पर उतर कर पुतिन का विरोध कर रही है और जेल जा रही है. पुतिन युद्ध हार रहे हैं. क्योंकि मिसाइल के दम पर जीते तो क्या जीते?

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