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सुख-दुख

रेडियो-रूपकों के रिंग मास्टर डॉ संजय वर्मा का आज आकाशवाणी में आखिरी दिन है!

अमित राजपूत-

रेडियो-रूपकों के रिंग-मास्टर डॉ संजय सिंह वर्मा का आकाशवाणी-दिल्ली में आज सेवा का अन्तिम दिवस है। साल 2016 में जब केन्द्रीय हिन्दी रूपक एकांश के कार्यक्रम अधिशाषी के रूप में वह स्थानान्तरित होकर दिल्ली आए, तो इस एकांश को एक ऐसा चमत्कारिक नेतृत्त्व मिला, जिसने अपने पूर्ववर्ती सुमित्रा नंदन पंत की स्वर्णिम थाती को अपने हुनर से जीवंत कर दिया।

इस बीच डॉ वर्मा के साथ काम करने के विविध अनुभव मुझे मिले, जो अप्रतिम और सदा स्मृतियों में जमा रहने वाले हैं। इस दौरान मैंने पहली बार देखा कि कोई प्रोड्यूसर इतनी न केवल ज़बरदस्त मेहनत करता है, अपितु उसमें परफ़ेक्शन को लेकर भी अपार जिज्ञासा भरी हुई है। इससे पूर्व अपने अनुभव-संसार में मैंने ऐसा न पाया।

डॉ वर्मा ऐसे प्रोड्यूसर रहे, जो अनेक मौक़ों पर स्वयं मेरे साथ ज़मीन पर उतरकर काम करते और सदा ऊर्जा से भरे रहते। विषयों के चुनाव को लेकर वह सदैव बेहद सजग रहे। अपने अपने हर काम को उत्सव की तरह लेते। उनमें सहकारिता का गुण भरा है। अपने उत्पाद को संतति समान स्नेह देने वाले थे।

इस लिहाज़ से मैं यक़ीनन ऐसा कह सकता हूँ, वह आकाशवाणी की दुनिया में एक जुझारू, जिज्ञासु, परफ़ेक्शनिस्ट, धैर्यवान और स्पष्टता रखने वाले प्रोड्यूसर रहे। उनकी रचनात्मकता का तो सानी ही क्या! अतएव उनके ऐसे गुणों के कारण वह “रूपकों का रिंग-मास्टर” हैं, मैं ऐसी घोषणा करता हूँ। उनकी सेवानिवृत्ति के दिन आज मैं भावुक हूँ।

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