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सुख-दुख

लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मिश्र से एक मुलाक़ात

यशवंत सिंह-

आज लखनऊ में आदरणीय गिरीश मिश्र जी (वरिष्ठ पत्रकार) से मिलने पहुँचा। वर्ष 1995-1996 के दिनों में उन्होंने मुझे दैनिक जागरण लखनऊ में ‘पहल’ कॉलम में खूब छापा था। फिर ट्रेनी के बतौर जॉब दी। पत्रकारिता की पहली नौकरी। जागरण के स्थानीय जड़ियलों के गैंग की प्रताड़ना से तंग आकर नौकरी को झटके में गुडबॉय कहा तो कुछ वक़्त बाद गिरीश सर ने फिर से बुलाकर सम्माजनक स्थिति में रखवाया।

गिरीश जी के तेजस्वी व्यक्तित्व से हम लोग बहुत प्रभावित रहते। बाद में वे कई बड़े अख़बारों के संपादक बने। स्वास्थ्य कारणों के चलते वे काफ़ी समय से सक्रिय पत्रकारिता को त्याग चुके हैं। उनसे मिल कर, उनके पैर छू कर, गले लग कर लगा जैसे अपने परिवार के किसी बड़े बुजुर्ग की छाँव मिल गई, भरपूर स्नेह-आशीर्वाद मिल गया।

गिरीश सर और भाभी जी से बतियाने में इतना मशगूल रहा कि कोई फोटो सेल्फ़ी लेना भूल गया।

हर व्यक्ति के निर्माण में कई गुरुओं का योगदान होता है। मेरे एक गुरु गिरीश मिश्र सर हैं। उनकी सेहत दिन प्रतिदिन दुरुस्त हो, उनका मन मिज़ाज प्रसन्न और ख़ुशहाल रहे, ये प्रार्थना करता हूँ।

इतनी ठंढ में भी गर्मी का एहसास करना हो तो लखनऊ में शर्मा जी चाय वाले के अड्डे पर चले आइये
अभिनव भाई के सौजन्य से यहाँ का नया नया मेम्बर हमहूँ बन गया हूँ

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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