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सुख-दुख

अब तो कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के युवा और प्रतिभावान प्रोफेसर डॉक्टर तक अचानक मरने लगे!

ज़फ़र इरशाद-

पीजीआई के हृदय रोग विभाग के प्रोफेसर और क़रीब 25 साल पुराने दोस्त डॉ सुदीप नहीं रहे। 52 साल की उम्र थी बस। यारों के यार सुदीप।

यूनिवर्सिटी के ज़माने के दोस्त। मेरी ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम का इलाज भी बाद में करने लगे। मस्त मौला इंसान और साइकिल चलाने के शौक़ीन। साइकिल के चाहने वालों का क्लब बना रखा था।

महीने में एक बार साइकिल से अयोध्या भी जाते थे दर्शन करने। एक दम स्लिम और फिट। कुछ दिनों से बीमार थे। आज अचानक चले गये। ईश्वर अच्छे आदमियों को जल्दी बुला लेता है। अच्छा नहीं लगा सुदीप यूँ इतनी जल्दी चले जाना!



नागेंद्र प्रताप-

बहुत परेशान करने वाला है यह सब! अभी मित्र Rajeev Dhyani की पोस्ट से पता चला कि SGPGI लखनऊ में Cardiology के युवा और प्रतिभावान प्रोफेसर डॉक्टर सुदीप कुमार की अचानक मृत्यु हो गई। अत्यधिक विनम्र स्वभाव वाले डॉक्टर सुदीप हम सबके परिचित थे।

बहुत व्यथित करने वाली सूचनाएं आ रही हैं लगातार। पता नहीं क्या हो रहा है! इतनी कम उम्र में ऐसे ऐसे लोग अचानक चले जा रहे हैं। तीन दिन में तीसरी अप्रिय सूचना है यह।

कल लखनऊ में ही HDFC की एक महिला स्टाफ काम करते करते, लंच पर गईं तो वहीं बेहोश हुई और मृत्यु हो गई। दो दिन पहले दिल्ली में न्यूज 18 के महज 44 साल के प्रोड्यूसर रणविजय गौतम ऑफिस पहुंचे, कार से उतरे, बेहोश हुए और मृत्यु हो गई। अब ये खबर! पिछले कुछ दिनों में ऐसे हादसे अचानक बढ़ गए हैं, समझ से परे है!

पिछले दिनों जिस तरह अत्यंत कम उम्र में अचानक, और ज्यादातर मामलों में हृदयाघात से मौतें हुई हैं, उस पर सचेत होने की ज़रूरत है। इसे सरकार और हमारे चिकित्सा तंत्र को भी गंभीरता से लेना चाहिए कि आखिर लगातार बढ़ रही इन घटनाओं का सबब क्या है?

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