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सुधीर चौधरी से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं सुरेंद्र सिंह, पढ़ें पीएम को भेजा पत्र

सुधीर चौधरी न कोई फोन उठाता है, न कोई मैसेज का रिप्लाई देता है। लॉयर के जरिए अब ये जवाब देता है। क्योंकि ये बहुत बड़ा आदमी बन गया है।

सुरेंद्र सिंह-

आदरणीय प्रधानमंत्री जी।
आपको प्रणाम।

मैं बहुत थक हार के यह पोस्ट आपके नाम दे रहा हूं। यह पोस्ट आपको इसलिए लिख रहा हूं, की ऐसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्था में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदार पदों पर आपके सरकार में इस तरह के चयनित लोग जाते हैं तो वे एक प्रोफेशनल काम करनेवाले का क्या हाल करते है?

इनका नाम “सुधीर चौधरी” है। इनसे आप परिचित होंगे। कभी हमने साथ काम किए थे। मित्रता थी। ये मेरे काम से मुझसे भली-भांति परिचित हैं

ये देश के सरकारी राष्ट्रीय न्यूज चैनल पर एक प्रोग्राम “DECODE” (डिकोड) रात 9:00 बजे (सोम-शुक्र) ये पढ़ते हैं।

पहले इस प्रोग्राम का नाम रखा गया “what’s UP India” फिर नाम बदला 9PM IST, इन पर सैकड़ों लोगो बने, फिर नाम बदला गया “DECODE” फिर इस पर अनेकों काम हुए। एनीमेशन हुए। दुनिया भर के interference हुए। तीन प्रोग्राम ID बने, दसियों वीडियो वॉल बने, अनेकों अनेकों काम हुए। अपनी टीम के साथ 400 घंटे से ज्यादा इस पर समय व्यतीत हुए। फाइनेली उम्मीद से ज्यादा काम इन्हें दे दिए गए।

इन सब सारे कामों के लिए इसके प्रोडक्शन मैनेजर से 15 लाख रूपये पर बात हुई थी। लॉन्च के डेढ़ महीने बाद मैने पैसे मांगे। पैसे देने की जब बारी आई तब सुधीर चौधरी ने अब इसकी कीमत लगानी शुरू की ढाई लाख, फिर चार लाख, फिर पांच लाख, फिर साढ़े सात लाख। अंततः आठ लाख पर आकर बात रुक गई। इन्होंने अपने लॉयर से तीन महीने बाद सात (7) काम और मांगे। कहा कि ये ‘आठ लाख” (8) रूपये तभी मिलेंगे। जबकि ये सब सारे काम मैं दे चुका था। इनकी टीम ने प्रोग्राम ID छोड़कर, बाकी कामों की ऐसी दुर्गत की, इसकी ब्यूटी का भर्ता बना दिया। काम की अहमियत इसका डिसिप्लिन इन्हें अब समझ में आया। बड़े फाइल होने के कारण ये सारे काम लॉन्च के दो महीने बाद मैं अपने मशीन से हटा चुका हूं।

क्योंकि ‘सुधीर चौधरी’ द्वारा एक पैसे भी न मिलने से मैं काफी निराश हो चुका था। टीम को अपने घर से पैसा देना पड़ा वह अलग। आज आठ (8) महीने बीत गए है। पहले इसके काम पर मेरे 400 घंटे दो महीने समय बर्बाद हुए तो ठीक । और अब इसके लॉयर के जवाब में मेरे सैकड़ों घंटे जा रहे हैं। जिसके लिए मैने हृदय से बिना कोई एडवांस लिए काम किया (क्योंकि ये मित्र था) आज ये कितना बढ़िया ईनाम दे रहा है? इसके लिए फ्री में काम करो। ऊपर से समय दो। वकील ठीक करो। पैसे बर्बाद करों।

सुधीर चौधरी न कोई फोन उठाता है, न कोई मैसेज का रिप्लाई देता है। लॉयर के जरिए अब ये जवाब देता है। क्योंकि ये बहुत बड़ा आदमी बन गया है। सरकारी पैसे की कमी नहीं है। इसके लॉयर को मैने कहा कि अगर उसे लगता है कि ये काम ढाई-चार लाख रूपये का है तो इसे हटा दो। अपना स्वयं बना लो। लेकिन आज छः (6) महीने हो जाएंगे चल रहा है।

आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सच पूछिए तो मेरे पास पैसे नहीं है। 11 वर्षों से कोई नौकरी नहीं है। घर बेचकर, जमीन बेंचकर मेरी जीविका चल रही है। मेरे पास इसकी तरह लॉयर रखने के पैसे नहीं है कि इसे जवाब दूं। अगर यह पोस्ट आप तक पहुंचे तो तो देश के लिए इंसाफ कीजिए। ऐसे जिम्मेदार पद पर हृदय के मलिन लोग वहां तक न जाएं। अपने प्रसार भारती/दूरदर्शन के पदाधिकारियों को भी समझाएं। की कोई इंसाफ का गुहार करे तो उसे गंभीरता से लें। सुधीर चौधरी का यह कोई प्राइवेट न्यूज चैनल नहीं है। पब्लिक का हैं। देश का है।

आपका आभारी
सुरेन्द्र सिंह


सुरेंद्र सिंह देश के जाने माने और एक बेजोड़ ग्राफिक्स डिज़ाइनर हैं, जो डिज़ाइन से आगे जाकर सोचते हैं। उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए।

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