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दिल्ली

केजरीवाल की ख़ास मालीवाल के बुरे दिन क्यों आ गये, जानिए पूरी कहानी!

अमिताभ श्रीवास्तव-

म आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पुलिस को दर्ज कराई शिकायत में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी विभव कुमार पर हिंसा, यौन शोषण, डराने-धमकने, गालीगलौज और मारपीट के बहुत गंभीर आरोप लगाये हैं। हैरानी की बात है कि यह सब मुख्यमंत्री आवास में हुआ और मुख्यमंत्री ने पूरी घटना में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। एफआईआर के मुताबिक स्वाति के आरोपों ने अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें निस्संदेह बढ़ा दी हैं। विभव ने स्वाति को धमकाया कि उनकी बात कैसे नहीं मानेंगी। यह “कौन सी बात” है? इसका खुलासा स्वाति ने नहीं किया है।

सियासी गलियारों में एक चर्चा यह है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब नीति मामले में अपने वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजना चाहते थे और इस सिलसिले में स्वाति मालीवाल पर अपनी राज्यसभा सदस्यता छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। गौरतलब है कि दिल्ली शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के जिन सांसदों ने केजरीवाल का मुखर समर्थन करने के बजाय चुप्पी साध रखी थी, स्वाति मालीवाल भी उनमें से एक थीं। हालांकि तब यह कहा गया था कि स्वाति विदेश में थीं।

स्वाति मालीवाल आम आदमी पार्टी की दबंग महिला नेताओं में गिनी जाती हैं। अरविंद केजरीवाल की पुरानी, बेहद नजदीकी और भरोसेमंद सहयोगियों में उनकी गिनती होती है। केजरीवाल और स्वाति मालीवाल की नजदीकियों के बारे में अतीत में तमाम तरह की गॉसिप भी की जाती रही है जिसमें नवीन जयहिंद से उनके तलाक से जुड़ी चर्चाएं भी शामिल हैं। अरविंद केजरीवाल और स्वाति को लेकर केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल की नाराजगी की भी चर्चाएं रही हैं। अरविंद केजरीवाल उन पर इतना भरोसा करते थे कि पहले उन्हें दिल्ली महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया और बाद में राज्यसभा सांसद भी बनाया।

लोकसभा चुनावों के बीच उछले इस मामले की टाइमिंग भी एक दिलचस्प और ध्यान रखने वाला पहलू है। अरविंद केजरीवाल जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा होकर आते हैं, दिल्ली समेत तमाम जगह आम आदमी पार्टी और विपक्ष के गठबंधन को ताकत मिलती है। केजरीवाल बीजेपी के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह के लिए तमाम असहज करने वाले सवाल उछालते हैं। बीजेपी बैकफुट पर आती है, रक्षात्मक प्रतिक्रिया देती है। अरविंद केजरीवाल को इस प्रकरण में घेरकर पूरे इंडिया गठबंधन को दिल्ली, पंजाब, हरियाणा में मतदाताओं के बीच संदिग्ध और अविश्वसनीय बनाया जा सकता है । पूरी बीजेपी जिस फुर्ती और मुस्तैदी से इस मामले को लपक कर हमलावर हुई है, उस अरविंद केजरीवाल का इस्तीफा मांगने और आम आदमी पार्टी में तोड़फोड़ की रणनीति की स्पष्ट संभावना दिखती है। दिल्ली पुलिस और प्रज्ज्वल रेवन्ना के मामले में चुप रहे राष्ट्रीय महिला आयोग की स्वतः संज्ञान लेनी वाली सक्रियता भी नोट करने लायक है।

बहरहाल, स्वाति के आरोप बहुत गंभीर हैं। मामले में जांच होनी चाहिए और पूरी घटना का सच सामने आना चाहिए। हालांकि एफआईआर में अरविंद केजरीवाल और उनकी पत्नी का नाम नहीं है। पूरी आम आदमी पार्टी ने चुप्पी साध ली है।

बीजेपी को इसमें बैठैबिठाये विपक्ष के खिलाफ शानदार चुनावी हथियार मिल गया है। दिल्ली में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के गठबंधन के बाद इस बार यह अनुमान लगाये जा रहे थे कि बीजेपी के लिए सातों सीटें जीतने का पिछला प्रदर्शन दोहराना बहुत मुश्किल होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वाति मालीवाल के ये धमाकेदार आरोप लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को कितना नुकसान पहुंचा सकते हैं। चुनाव के बाद वो आम आदमी पार्टी की राधिका खेड़ा साबित होती हैं या नहीं, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

देखें एफआईआर कॉपी…


म आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से जुड़ा मामला इतना इकहरा नहीं है जितना समाचार चैनल दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। स्वाति मालीवाल भी अपने साथ घटी घटना का पूरा सच सामने लाने के बजाय इशारों-इशारों में वार कर रही हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर मारपीट की तथाकथित घटना के दिन का वीडियो सामने आने के बाद अपने एक ट्वीट में उन्होंने जमकर अपनी भड़ास निकाली।

उन्होंने “ राजनीतिक हिटमैन” कहकर किस पर हमला किया है? क्या उनका इशारा अरविंद केजरीवाल की तरफ है? सवाल यह भी है कि उन्होंने घटना के दिन ही विभव कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई?

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