सत्येंद्र पीएस-
सरकार की करतूतें असहज करने वाली हैं। देश को यह समझ नहीं आ रहा है कि तिरंगा यात्रा निकालने के पीछे क्या वजह है। आधिकारिक तौर पर यह यात्रा भाजपा की है, लेकिन इसमें सरकार की पूरी मशीनरी लगाई गई है। इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्यों को आदेश दिया गया है कि वे अपने स्कूल के बच्चों को लेकर आएं और तिरंगा यात्रा में उन्हें शामिल कराएं। अध्यापकों और प्रिंसिपल की दिक्कत यह है कि बच्चों की छुट्टी गर्मी की वजह से 11:30 बजे हो जाती है।
बच्चों को शाम को 4 बजे यात्रा में ले जाने के लिए कैसे रोके रखें। दूसरी समस्या यह है कि इस गर्मी में बच्चों को लेकर तिरंगा यात्रा में कैसे जाएं? उनके पास न तो बच्चों को ले जाने के लिए बसें हैं। न तो खाने पीने के लिए बच्चों का कोई इंतजाम है।
लेकिन सरकार को अपना प्रचार करना है। वह भी स्कूल के बच्चों और टीचरों से प्रचार करवाना है।
और सबसे दुःखद पहलू यह है कि जनता को यह सब स्वीकार्य है कि उनके बच्चों को जबरदस्ती रैली में घसीटकर ले जाया जाए! इसके लिए कोई आंदोलन कोई हड़ताल, कोई विरोध प्रदर्शन नहीं है कि छोटे छोटे बच्चे भाजपा का प्रचार क्यों करेंगे? कोई बच्चा भूख से या गर्मी से बेहोश हो जाए, किसी बच्चे के साथ कोई हादसा हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
हम लोगों का भी एक दौर था कि लाइब्रेरी में किताब न हो तो स्ट्राइक कर देते थे, फीस बढ़ जाए तो स्ट्राइक। सरकार की हिम्मत नहीं पड़ती थी कि सुविधाएं छीन ले। और अब हालत यहां पहुँच गई है कि बच्चों को और मास्टरों को जबरी भाजपा की रैली, यात्रा में घसीटकर ले जाया जा रहा है। सरकार अधिकारियों को मजबूर कर रही है। अधिकारी प्रिंसिपल को धमका रहे हैं। ज्यादातर तो यह मौखिक हो जाता है, लिखित रूप से कोई आदेश भी नहीं निकलता।
क्या इस ज़न दुर्दशा को कोई अखबार, कोई चैनल संज्ञान में लेगा? क्या विपक्षी दलों को यह पता है कि सरकार क्या कर रही है? जो भी हो! क्या ही कहा जाए?
देखें जारी आदेश…



