नई दिल्ली 08 नवम्बर। प्रसिद्ध पत्रकार एवम यूट्यूबर उर्मिलेश को इस बार कुलदीप नैयर स्मृति पत्रकार दिए जाने की घोषणा की गई है।
प्रख्यात समाजशास्त्री आशीष नंदी , गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशान्त, ओम थानवी, नीरजा चौधरी, संजय पारिख, वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्त, अशोक कुमार, विजय प्रताप, प्रियदर्शन, अनिल सिन्हा, प्रमोद रंजन की निर्णायक समिति ने आज यहां घोषणा की।
समिति के अध्यक्ष सर्वश्री आशीष नंदी ने आज यहां यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि “गांधी शांति प्रतिष्ठान टीवी पत्रकार और एंकर उर्मिलेश को कुलदीप नैयर स्मृति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा करते हुए गौरवान्वित महसूस करता है। भारत ऐसा देश हैं जहां लोगों को सच बोलने से किसी को रोका नहीं जा सकता। लोग सत्ता के खिलाफ प्रतिरोध की आवाज़ व्यक्त करेंगे ही। वे कभी चुप नहीं रहेंगे। यह पुरस्कार ऐसे पत्रकारों को दिया जाता है जो अपने समय मे सच व्यक्त कर रहे हैं।”
यह पुरस्कार 15 नवम्बर को गाँधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में दिया जाएगा। पुरस्कार में एक लाख रुपए की राशि प्रशस्ति पत्र प्रतीक चिन्ह शामिल है।
पहला पुरस्कार रवीश कुमार दूसरा निखिल वागले, तीसरा अजित अंजुम, चौथा अरफ़ा खानम को दिया गया।
श्री उर्मिलेश ने “शाने सहारे ” से पत्रकारिता शुरू की और वे नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान , दैनिक भास्कार में काम किया और राज्यसभा टीवी के कार्यकारी संपादक भी रहे।फिर वे वायर और न्यूज़ क्लिक में भी रहे।
उन्होंने ” बिहार का सच”,”झेलम किनारे दहकते चिनार”गाजीपुर में क्रिस्टोफर कॉडवेल ,”मेम का गांव गोडसे की गली ” “जादुई जमीन का अंधेरा “योद्धा महापंडित राहुल सांकृत्यायन आदि पुस्तकों की रचना की है।
वरिष्ठ पत्रकार पलाश विश्वास की टिप्पणी पढ़िये-
इलाहाबाद में 1979 में Urmilesh जी से परिचय हुआ। मित्र बने। मंगलेश डबराल तब अमृत प्रभात के साहित्य संपादक थे। हम 100 लूकरगंज में भारत प्रेस के पीछे कथाकार शेखर जोशी के घर रहते थे।
नैनीताल Dsb Campus Nainital से निकलकर Laxman Singh Bisht Batrohi जी और मैडम मधुलिका दीक्षित जी के कहने पर इलाहाबाद विश्व विद्यालय में डॉक्टर मानस मुकुल दास के निर्देशन में अंग्रेजी साहित्य में phd करने गए थे।
जन्म से बंगाली हूं लेकिन उससे ज्यादा उत्तराखंडी और कुछ कुछ पहाड़ी भी हूं। जैसे वीरेन डंगवाल के कहने पर कोलकाता चला गया, उसी तरह मंगलेशदा के कहने पर इलाहाबाद छोड़कर जे एन यू चले गए। वहीं से उर्मिलेश के कहने पर धनबाद में दैनिक आवाज से जुड़कर पत्रकार बन गए।क्योंकि उर्मिलेश को पत्रकार नहीं बनना था। वे विश्व विद्यालय के प्रोफेसर बनना चाहते थे।
आखिर वे भी पत्रकार बन गए। हमने तो सिर्फ संपादकी की जिंदगीभर।धनबाद में थोड़ी बहुत रिपोर्टिंग की।फिर कभी रिपोर्टिंग नहीं की। उर्मिलेश रिपोर्टर होने के बाद देश के शीर्ष के पत्रकार बन गए।
मुलाकात अब नहीं होती।लेकिन मित्रता बनी हुई है।
अब कुलदीप नैयर स्मृति सम्मान मिला है उर्मिलेश को। कुलदीप साहब इंडियन एक्सप्रेस के संपादक भी थे। भारतीय पत्रकारिता को उनका बड़ा योगदान है।
यह उर्मिलेश के लिए कितनी खुशी की बात है,नहीं जनता।लेकिन मुझे बहुत खुशी हो रही है।
प्रिय मित्र को बहुत बहुत बधाई।


