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पीआईबी वाले रात भर सरकार की इज्जत बचाने वाले शब्द और भाषा पर काम कर रहे थे!

अमेरिका से अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी, नरेंदर मोदी ने भारत की कृषि को बेच दिया है!

नई दिल्ली-वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई दिशा देने के लिए एक अंतरिम समझौते (Interim Agreement) का ढांचा तय कर लिया है। व्हाइट हाउस द्वारा जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के बीच प्रस्तावित बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

संयुक्त बयान के अनुसार, भारत अमेरिका से आने वाले औद्योगिक उत्पादों और कई खाद्य एवं कृषि वस्तुओं पर टैरिफ खत्म करेगा या उनमें कटौती करेगा। इनमें डीडीजी (ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, ड्राई फ्रूट्स, ताजे व प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।

वहीं अमेरिका भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 18 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करेगा, जिसमें टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर और कुछ मशीनरी शामिल हैं। हालांकि समझौते के सफल क्रियान्वयन के बाद कई श्रेणियों में यह टैरिफ हटाने की भी बात कही गई है, जिनमें जेनरिक दवाएं, जेम्स एंड डायमंड्स और एयरक्राफ्ट पार्ट्स शामिल हैं।

संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदेगा। दोनों देश GPU और डेटा सेंटर्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी समेत उन्नत तकनीकी उत्पादों के व्यापार को बढ़ाने और संयुक्त टेक्नोलॉजी सहयोग पर भी सहमत हुए हैं।

इसके अलावा, भारत और अमेरिका ने सप्लाई चेन को मजबूत करने, निवेश और निर्यात नियंत्रण पर सहयोग बढ़ाने और डिजिटल ट्रेड से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देश भेदभावपूर्ण और बोझिल नियमों को खत्म कर एक मजबूत और पारदर्शी डिजिटल ट्रेड फ्रेमवर्क बनाने पर भी काम करेंगे।

व्हाइट हाउस के मुताबिक, यह अंतरिम समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए यूएस–इंडिया BTA की वार्ताओं को नई गति देगा और आने वाले समय में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करेगा।


सुभाष सिंह सुमन-

आधिकारिक संयुक्त बयान आ गया आखिरकार।

ट्रंप की बातों की आधिकारिक पुष्टि हो गयी। भारत अमेरिका पर टैरिफ हटा रहा है। इसमें एलिमिनेट के साथ रिड्यूस सिर्फ शब्दों की बाजीगरी हुई है। अमेरिका 18% टैरिफ वसूलेगा। यह ट्रंप-मोदी युग से पहले की स्थिति से पूरी तरह विपरीत है। जब भारत में कमजोर सरकारें थीं, भारत अमेरिका से टैरिफ लेता था और बदले में देता नहीं था या नाममात्र देता था। अब जब बहुत मजबूत सरकार है, अमेरिका हमसे बढ़िया टैरिफ लेगा और हम बदले में या तो नहीं लेंगे या थोड़ा बहुत लेंगे। भारत अमेरिका के कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलेगा, ट्रंप का ये दावा भी सही हो गया। लेकिन जॉइंट स्टेटमेंट में भी इसपर डिटेल नहीं दिया गया है कि किन चीजों के लिए खोलेंगे। यह भी साफ हो रहा है कि अब अमेरिका को खुश करने के लिए भारत रूस से तेल नहीं लेगा। ट्रंप ने 25% टैरिफ हटाने की शर्त ही यही रखी थी। रिलायंस ने वेनेजुएला का तेल खरीदना शुरू भी कर दिया है, जो कायदे से अब अमेरिकी तेल ही है।

मजेदार है स्टेटमेंट की टाइमिंग। 4:29 बजे सुबह। रात भर पीआईबी वाले मित्र सब सरकार की इज्जत बचाने वाले शब्द और भाषा पर काम कर रहे थे शायद! तो भैया जोर से बोलिये, जै निहुरेंद्र!


नितिन त्रिपाठी-

आज अंततः व्हाइट हाउस ने विज्ञप्ति जारी कर भारत–अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट का बेसिक ब्लूप्रिंट सार्वजनिक कर दिया है। अभी यह पूरी डील नहीं है, बल्कि उसी ढांचे की घोषणा है, जिसके आधार पर मार्च में विस्तृत समझौता साइन होगा। सबसे पहले अमेरिकी दृष्टिकोण से तीन महत्वपूर्ण बिंदु सामने आते हैं।

पहला और सबसे संवेदनशील मुद्दा एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स का था। सारा विवाद यहीं अटका हुआ था। अब जो समझौता हुआ है, उसके तहत भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों—जैसे फल, ड्राई फ्रूट्स, नट्स, पशुओं का चारा आदि—को अनुमति देगा। इसके साथ ही अमेरिकी शराब पर भी ड्यूटी में कटौती होगी।

दूसरा बड़ा बदलाव नॉन-टैरिफ सेगमेंट में है। भारत ने उन नियमों को आसान करने पर सहमति दी है, जो अमेरिकी मेडिकल डिवाइस कंपनियों को नुकसान पहुँचा रहे थे। कई सेक्टर्स में केवल भारत-विशेष टेस्टिंग के बजाय अब अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों को स्वीकार किया जाएगा। अमेरिकी खाद्य उत्पादों के आयात में होने वाली देरी और छुपे हुए प्रतिबंध कम किए जाएंगे। साथ ही आईसीटी और टेक इम्पोर्ट्स पर लगने वाली सख़्त लाइसेंसिंग प्रक्रिया को हटाया जाएगा।

तीसरा और सबसे बड़ा कमिटमेंट यह है कि आने वाले पाँच वर्षों में भारत अमेरिका से लगभग 500 बिलियन डॉलर का आयात करेगा। इसमें ऊर्जा—तेल और गैस—एयरक्राफ्ट और उनके पार्ट्स, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स (जिसमें डेटा सेंटर्स के लिए GPUs भी शामिल हैं), कीमती धातुएँ और कोकिंग कोल शामिल हैं। वर्तमान में भारत सालाना लगभग 40 बिलियन डॉलर का ही आयात अमेरिका से करता है, ऐसे में यह एक बहुत बड़ा जंप है।

अब भारत के परिप्रेक्ष्य से दो मुख्य बिंदु हैं।

पहला, अमेरिका फिलहाल भारतीय सामानों पर 18 प्रतिशत का टैरिफ बनाए रखेगा। इसमें टेक्सटाइल और अपैरल, लेदर और फुटवियर, होम डेकोर और हैंडीक्राफ्ट, केमिकल्स और मशीनरी जैसे सेक्टर्स शामिल हैं। लेकिन अगर यह इंटरिम एग्रीमेंट सफल रहता है, तो अमेरिका कई भारतीय निर्यातों पर टैरिफ हटाएगा—जैसे जेनेरिक दवाइयाँ, जेम्स और डायमंड्स, और एयरक्राफ्ट पार्ट्स।

दूसरा अहम बिंदु नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े टैरिफ में ढील का है। अमेरिका भारतीय एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर लगाए गए स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर से जुड़े टैरिफ हटाने पर सहमत हुआ है। ऑटो पार्ट्स के लिए भारत को प्रेफरेंशियल कोटा मिलेगा। फार्मा सेक्टर को भी सुरक्षा समीक्षा के आधार पर राहत मिलने की संभावना रखी गई है।

कुल मिलाकर यही पाँच मुख्य बिंदु हैं, जो भारत–अमेरिका ट्रेड डील के इस ब्लूप्रिंट की रीढ़ बनते हैं। अब इन्हीं के आधार पर आने वाले महीनों में विस्तृत समझौता तैयार होगा और मार्च में उसे औपचारिक रूप दिया जाएगा।


एक बार फिर अमेरिका बता रहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील हो चुकी है और अब भारत को अमेरिका से क्या–क्या खरीदना है। जैसा कि मैंने बताया था–सरेंडर नरेंदर मोदी ने भारत की कृषि को बेच दिया है। अमेरिका के गुलाम राज्य भारत के जानवर अब लाल अमेरिकी ज्वार खायेंगे। भारत के लोग अमेरिकी सोयाबीन तेल से पूड़ी तलेंगे। अमेरिकी फल और जैम खाएंगे। देश के दारूखोरों को शराब पीने के लिए अमेरिका अनाज देगा, जिससे दारू बनेगी। अमेरिकी और भी बहुत कुछ भारत में डंप करने वाला है। भारत को अपने बजट का 85% यानी 45.5 लाख करोड़ का सामान अमेरिका से मंगवाना ही होगा, वरना ट्रंप फिर टैरिफ लगा देगा। भारत का नया शासक अब अमेरिका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के नए प्रधानमंत्री हैं। मोदी अपने मालिक के लिए इजरायल में मुजरा कर आया है। भारत अपनी आज़ादी खो चुका एक भुखमरा, भिखारी देश है। जो सीवेज के पानी पर जिंदा है।
ट्रंप हमें कुछ भी कबाड़ भेज सकता है। आगे हमें अमेरिकी टुकड़ों पर जिंदा रहना है। आप सभी हिंदुओं को ढेर सारी बधाई। बोलिए–मोदी…मोदी…बाकी, जिन महानुभावों को अंग्रेज़ी पढ़नी आती है, वे संयुक्त बयान को पढ़ लें। -सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार


प्रकाश के रे-

अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा जारी : वाइट हाउस ने अमेरिका और भारत का जो साझा बयान जारी किया है, उसमें वही बातें हैं, जो राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया में पहले कहा था और जिसे उनके प्रशासन ने दोहराया था.

कृषि क्षेत्र में अनेक चीज़ों को भारत में आयात करने पर सहमति बनी है. इनमें एक डिस्टिलर्स ग्रेन्स हैं यानी वैसे अनाजों का चूरा, जिनसे शराब, इथेनॉल जैसी चीज़ें बनती हैं. यह जो चूरा या भूसी होती है, वह पशुओं के चारे के लिए उत्तम मानी जाती है. यह भूसी मुख्य मक्के, गेहूँ, चावल और अन्य अनाजों की होती है.

लाल ज्वार का भी आयात होगा. यह मोटा अनाज भी पशु चारे में इस्तेमाल होता है. बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता आदि सूखे मेवे भी सूची में हैं. ताज़ा और प्रसंस्कृत फलों, वाइन एवं शराब तथा अन्य उत्पाद भी आयात किये जायेंगे.

बयान में इन चीज़ों का उल्लेख के साथ यह भी कहा गया है कि कई अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाज़ार खुलेगा. अमेरिकी राजदूत ने भी कहा है कि उन उत्पादों को भी लाने के लिए कोशिश जारी रहेगी, जिसे भारत संरक्षित करना चाहता है.

दुग्ध उत्पादों का उल्लेख पहले भी नहीं था, इस अंतरिम समझौते की रूपरेखा में भी नहीं है.

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