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अब बिना टावर के भी फोन में आएगा सिग्नल! TRAI ने सैटेलाइट से सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी का खाका पेश किया

हिंदी प्रमो बैनर: उपग्रह से भारत में कनेक्टेड नेटवर्क दिखता है; दूर से लेकर फोन तक सिग्नल मजबूत के संदेश के साथ।

सैटकॉम नेटवर्क कंपनियों के लिए अलग लाइसेंस श्रेणी का प्रस्ताव, 20 साल की ऑथराइजेशन और AGR का 8% शुल्क; अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ

नई दिल्ली। जंगल, पहाड़, समंदर या ऐसे दूर-दराज के इलाके जहां मोबाइल टावर नहीं पहुंचते, वहां भी आने वाले समय में आपका स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकता है। दूरसंचार नियामक TRAI ने इसका रास्ता खोलने वाली सिफारिशें जारी कर दी हैं। नियामक की डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) वाली सिफारिश को खास तौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे संगत मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे और उन इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंच सकेगी जहां पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क कमजोर है।

क्या है नया मॉडल

5 नवंबर 2026 को जारी इन सिफारिशों के केंद्र में ‘सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन’ नाम की नई श्रेणी है, जिसे टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 की धारा 3(1)(b) के तहत लाने का प्रस्ताव है। इसे ‘नेटवर्क ऐज़ ए सर्विस’ (SCNaaS) मॉडल कहा गया है। आसान भाषा में, ऐसी कंपनियां सैटेलाइट ढांचा खड़ा करके चलाएंगी और उसकी क्षमता लाइसेंसधारी टेलीकॉम या सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं को देंगी, जो उसे किराये पर लेकर अपने ग्राहकों को सेवा देंगे। नियामक ने साफ कर दिया है कि ये नेटवर्क कंपनियां खुद आम उपभोक्ताओं को कोई सेवा नहीं बेच सकेंगी।इस बिजनेस-टू-बिजनेस रास्ते से स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट जैसी मौजूदा कंपनियों के साथ नए खिलाड़ियों के लिए भी दरवाजा खुल सकता है, बशर्ते वे अलग से यह ऑथराइजेशन लें।

फीस और अवधि

ऑथराइजेशन 20 साल तक के लिए होगा, जिसे और 20 साल बढ़ाया जा सकेगा, जबकि स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए मिलेगा जिसे दो साल तक बढ़ाने का विकल्प होगा। ऑथराइजेशन शुल्क एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 8 फीसदी रखने का सुझाव है, और इसमें कोई न्यूनतम सीमा नहीं होगी। प्रवेश शुल्क 37.5 लाख रुपये प्रस्तावित है।

मोबाइल बैंड से भी सैटेलाइट सेवा

TRAI ने 600, 700, 800, 900, 1800 और 2100 MHz जैसे मोबाइल बैंड में भी सैटेलाइट आधारित D2D सेवाओं की अनुमति की सिफारिश की है। इसके लिए विश्व रेडियो संचार सम्मेलन 2027 के नतीजे का इंतजार नहीं करना होगा, शर्त यह है कि सेवा किसी दूसरे नेटवर्क में दखल न दे। साथ ही स्मार्टफोन कंपनियों से कहा गया है कि आगे के हैंडसेट में L और S सैटेलाइट बैंड सपोर्ट करने वाले मॉड्यूल डालें।

जियो की आपत्ति के बावजूद फैसला

यह सिफारिश इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि परामर्श के दौरान टेलीकॉम कंपनियों के सुर अलग थे। रिपोर्टों के मुताबिक जियो चाहती थी कि स्पेक्ट्रम सिर्फ लाइसेंसधारी टेलीकॉम ऑपरेटरों को नीलामी से मिले और D2D को 2027 के बाद तक टाला जाए, जबकि अमेज़न लियो प्रशासनिक आवंटन के पक्ष में थी। TRAI ने WRC-2027 का इंतजार न करने और फीडर लिंक के लिए प्रशासनिक आवंटन का रास्ता चुना है।

आगे क्या

यह प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुए परामर्श से निकली है, जब दूरसंचार विभाग ने अलग सैटेलाइट नेटवर्क ऑथराइजेशन पर TRAI से सुझाव मांगे थे। अब ये केवल नियामक की सिफारिशें हैं, इन्हें लागू करना है या नहीं, यह केंद्र सरकार तय करेगी।

हिंदी प्रमो बैनर: उपग्रह से भारत में कनेक्टेड नेटवर्क दिखता है; दूर से लेकर फोन तक सिग्नल मजबूत के संदेश के साथ।
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