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उत्तर प्रदेश

बुरी तरह भ्रष्टाचार, ब्लैकलिस्टिंग, टंकियों के फूटने व ईडी की जांच के अंतहीन रिकार्ड के बीच अनुराग श्रीवास्तव इस विभाग के ‘त्रिवेदी’ बन चुके हैं?

Two-panel image: left shows a man in a striped shirt seated at an office desk; right shows a close-up of a man with glasses and mustache wearing a maroon shirt, with a Hindi caption beneath reading 'अनुराग श्रीवास्तव आईएएस'

उत्तर प्रदेश में सड़क से लेकर एक्सप्रेसवे तक, अब हर रास्ता एक ही दफ्तर से होकर गुज़रेगा। शासन के ताज़ा फेरबदल में प्रमुख सचिव लोक निर्माण अजय चौहान को यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया है। दिलचस्प यह है कि चौहान के पास पहले से ही PWD के साथ उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण (उपशा) के CEO की कुर्सी भी है। यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपने विभाग PWD की सड़कें, स्टेट हाईवे और अब प्रदेश के तमाम एक्सप्रेसवे, तीनों की चाबी एक ही अफसर की जेब में। चार साल से PWD में जमे चौहान के लिए यह इनाम दीपक सिंह के रिटायर होते ही खुला। उसी आदेश में मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को नागरिक उड्डयन और प्रमुख सचिव आलोक कुमार-3 को वित्त जैसे भारी-भरकम विभागों का अतिरिक्त प्रभार मिला है, पर सबसे ज़्यादा चर्चा उसी नाम की है जिसके हिस्से प्रदेश के निर्माण बजट का सबसे बड़ा टुकड़ा आ गया।


अभिषेक उपाध्याय-

सिर्फ त्रिवेदी बचेगा? नवाजुद्दीन सिद्दीकी वाली ‘सैक्रेड गेम्स’ वेब सीरीज को फिर से देखिए और योगी सरकार के जलनिगम ग्रामीण को याद कीजिए।

बुरी तरह भ्रष्टाचार, ब्लैकलिस्टिंग, टंकियों के फूटने व ईडी की जांच के अंतहीन रिकार्ड के बीच अनुराग श्रीवास्तव इस विभाग के ‘त्रिवेदी’ बन चुके हैं?

पिछले 6 सालों से वे इस कदर इस विभाग में जमे हुए हैं कि मिथक कथाओं में वर्णित अश्वत्थामा का अमरत्व भी एक बार खतरे में पड़ जाए!

यहां तक कि जब वे प्रमोशन पाकर ACS हुए, तब भी इस विभाग से उनका ‘अनुराग’ खत्म नहीं हुआ है। इस बीच ED जल जीवन मिशन की जांच कर रही है।

ईडी ने जल जीवन मिशन के तहत ‘हर घर नल से जल योजना’ में खराब हुईं टंकियों की मंजूरी से लेकर भुगतान तक का पूरा हिसाब मांगा है।

साल 2021 के बाद जल निगम (ग्रामीण) में रहे करीब आधा दर्जन आईएएस अधिकारियों के कार्यकाल भी इसके दायरे में हैं।

नोटिस पर नोटिस जारी हो रही है। मगर ये जो ‘अनुराग’ अमरत्व है, ये जाता ही नहीं।

सोचिए, इस महकमे से इसी साल अगस्त के महीने में राजशेखर को जल निगम ग्रामीण के प्रबंध निदेशक पद से हटाया गया।

अब महज दो महीने के भीतर योगेश कुमार चलते कर दिए गए हैं। मगर अनुराग श्रीवास्तव अपनी जगह पर कायम हैं।

सूत्र बताते हैं कि ज़ीरो टॉलरेंस ब्रजभूषण राजपूत के चरखारी विधानसभा की पानी की फूटी टंकियों पर घोर डिप्रेशन में विपश्यना कर रहा है।

इस ट्रांसफर लिस्ट को देखने के बाद वो कभी भी ज़मीन पर छलांग लगा सकता है।

आप लोग प्लीज दुआ कीजिएगा कि नजदीक के प्राथमिक हेल्थ केंद्र पर डाक्टरों की टीम मरहम पट्टी और ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर उपलब्ध रहे, ताकि ज़ीरो टालरेंस को समय रहते एंबुलेंस में डालकर पीजीआई तक पहुंचाया जा सके।


Hindi table listing senior civil servants with columns for serial number, name, designation, and department/ remit; row 7, Shri Ajay Chauhan, highlighted in green.

बड़ी खबर-योगी आदित्यनाथ के PWD विभाग में पिछले 4 सालों से ‘अंगद का पांव जमाकर’ बैठे प्रमुख सचिव अजय सिंह चौहान को एक और तोहफा। PWD के साथ-साथ एक्सप्रेसवे अथॉरिटी यूपीडा का भी प्रभार सौंपा गया।
एक्सप्रेसवे अथॉरिटी ‘यूपीडा’ का ज़िम्मा अभी तक दीपक सिंह के पास था। उनके रिटायर होते ही अजय सिंह को सौंप दिया गया।

सोचिए, पिछले एक हफ्ते की दो स्टोरियां। एक यूपीडा के CEO दीपक सिंह पर सवाल उठाती हुई जिनके CEO होते हुए एक्सप्रेस वे अथॉरिटी में हजारों करोड़ के टेंडर करीब 5000 करोड़ का नुकसान उठाकर प्रॉसेज कर दिए गए। शिकायत आई।

दूसरी PWD के प्रमुख सचिव अजय चौहान पर जहां एक बार फिर से नियम बदलकर करोड़ों के टेंडर गतिमान कर दिए गए।

PWD में तो करप्शन और कदाचार के इतने मामले आए हैं कि जोड़ लीजिए तो दिमाग चक्कर खा जाए!

कायदे से जांच होनी चाहिए। प्रदेश के राजस्व को भारी चोट का मामला था, पूछताछ होनी चाहिए। पारदर्शिता की खातिर बदलाव होना चाहिए।

मगर हुआ क्या। दीपक सिंह आज ससम्मान रिटायर हो गए और अजय सिंह चौहान PWD के साथ-साथ उसी एक्सप्रेस वे अथॉरिटी यूपीडा के CEO बना दिए गए, जहां से दीपक सिंह रिटायर हुए थे।

रामराज्य लोकभवन से झूमते हुए निकला, और शर्मा की चाय की दुकान पर बंद मक्खन खाकर इस दीवाली रामराज्य की दीवारों की पोताई करवाने के ख्वाबों में डूब गया!!

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