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वेब-सिनेमा

वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता की वेबसाइट बंद, इंडियाबुल्स के फाउंडर समीर गहलोत पर लगाए गंभीर आरोप!

अफसोस। यह आपराधिक है। एक पत्रकार के पूरे काम को मिटा दिया गया। इंटरनेट भी कानून माफिया की चपेट में आ गया है जो तरह तरह के नोटिसों के नाम पर या उनके नाम पर किसी के काम को ग़ायब कर देता है। पोस्ट डिलीट करने का अलग ही लेवल हो गया है। पूरी वेबसाइट ग़ायब कर दी गई है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता हर स्तर पर ख़त्म की जा रही है।
-रवीश कुमार


वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता का पब्लिक स्टेटमेंट-

वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और प्रकाशक परंजॉय गुहा ठाकुरता ने अपनी वेबसाइट paranjoy.in और उससे जुड़े सभी सबडोमेन को अचानक बंद किए जाने पर होस्टिंग कंपनी होस्टिंगर (Hostinger) से जवाब मांगा है। 31 अक्टूबर 2026 को जारी सार्वजनिक बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि इंडियाबुल्स समूह के संस्थापक समीर गेहलोत की ओर से कानूनी नोटिस भेजे जाने के कुछ दिनों बाद उनकी पूरी वेबसाइट बंद कर दी गई। ठाकुरता ने इसे स्वतंत्र पत्रकारिता को दबाने की कोशिश बताते हुए मीडिया की आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक घटनाक्रम बताया है।

परंजॉय के मुताबिक, 28 अक्टूबर की सुबह होस्टिंगर ने बिना किसी पूर्व सूचना, चेतावनी या उनका पक्ष सुने उनकी पूरी होस्टिंग सेवा निलंबित कर दी। इसमें उनकी मुख्य वेबसाइट के साथ media.paranjoy.in और adanifiles.paranjoy.in जैसे सबडोमेन भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि जब उनके एक सहयोगी ने सुबह 6 बजकर 48 मिनट पर होस्टिंगर के सपोर्ट से संपर्क किया तो कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि यह कार्रवाई ‘Fraud/Scam’ यानी धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायत के आधार पर की गई है। प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि इस मामले में वेबसाइट को दोबारा चालू कराने पर बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है।

ठाकुरता ने इस कार्रवाई को इंडियाबुल्स के संस्थापक समीर गेहलोत की ओर से की गई कानूनी कार्रवाई से जोड़कर देखा है। उनके अनुसार, गेहलोत ने इससे कुछ दिन पहले सात साल से अधिक पुराने एक लेख को हटाने की मांग की थी। यह लेख 30 सितंबर 2019 को न्यूजक्लिक पर प्रकाशित हुआ था। इस रिपोर्ट को लेकर इंडियाबुल्स और समीर गेहलोत पिछले छह वर्षों से कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। परंजॉय का कहना है कि उन्होंने अदालत में इस पत्रकारिता रिपोर्ट का लगातार बचाव किया है।

अपने बयान में उन्होंने पूरे घटनाक्रम की तारीखवार जानकारी भी दी है। इसके मुताबिक, 11 मार्च 2020 को इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में न्यूजक्लिक, उसके रीडर्स एडिटर उर्मिलेश, लेख के सह-लेखक सौरोदीप्तो सान्याल, संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और परंजॉय गुहा ठाकुरता को आरोपी बनाया गया था। 6 जून 2025 को अदालत ने प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ कार्यवाही समाप्त करते हुए बाकी चार आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत समन जारी किया था।

परंजॉय के मुताबिक, 27 अगस्त 2026 को समीर गेहलोत के वकील ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजकर 24 से 48 घंटे के भीतर लेख हटाने की मांग की। नोटिस में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की एक स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया था कि इससे मामले के तथ्य बदल गए हैं। इसके जवाब में उनके वकील ने 2 सितंबर को कानूनी नोटिस पर आपत्तियां दर्ज कराईं।

इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को इंडियाबुल्स नेस्ट्स लिमिटेड और समीर गेहलोत ने पटियाला हाउस अदालत से एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा हासिल की। परंजॉय के अनुसार, इस आदेश में उनकी वेबसाइट पर मौजूद संबंधित लेख को हटाने और सर्च इंजन से डी-इंडेक्स करने का निर्देश दिया गया था। 25 अक्टूबर को उन्हें अदालत के आदेश और मुकदमे से जुड़े दस्तावेज ईमेल के जरिए भेजे गए। 26 अक्टूबर की रात समीर गेहलोत ने भी अपने आधिकारिक ईमेल से संदेश भेजकर लेख का यूआरएल तत्काल हटाने की मांग की और ऐसा नहीं करने पर अदालत में कार्रवाई करने की चेतावनी दी।

ठाकुरता का दावा है कि वह 24 अक्टूबर के आदेश को उच्च मंचों पर चुनौती देने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान गेहलोत के वकीलों ने गूगल को भी अदालत के आदेश के आधार पर सामग्री हटाने की शिकायत भेजी। 28 अक्टूबर को गूगल सर्च कंसोल ने उन्हें सूचना दी कि संबंधित यूआरएल को गूगल सर्च परिणामों से हटाया जा रहा है।

परंजॉय ने अपने बयान में लुमेन डेटाबेस के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा है कि गूगल को भेजी गई शिकायत में केवल उनकी वेबसाइट का एक लेख नहीं, बल्कि देश-विदेश के प्रमुख मीडिया संस्थानों की वेबसाइटों पर मौजूद कुल 52 यूआरएल को निशाना बनाया गया था। इनमें इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द कारवां, बिजनेस टुडे, डेक्कन हेराल्ड, फाइनेंशियल एक्सप्रेस, लाइवमिंट, मनीकंट्रोल, एनडीटीवी प्रॉफिट, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, द क्विंट और न्यूजक्लिक जैसे संस्थानों की खबरें शामिल थीं। शिकायत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और स्क्रिब्ड की सामग्री भी शामिल थी। उनका कहना है कि इनमें से कई मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट अब भी ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जबकि उनकी वेबसाइट का पूरा होस्टिंग अकाउंट बंद कर दिया गया।

‘फ्रॉड/स्कैम’ के आरोप पर उठाए सवाल

परंजॉय ने होस्टिंगर की ओर से उनकी वेबसाइट को ‘Fraud/Scam’ श्रेणी में रखे जाने पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि 28 अक्टूबर को किए गए वायरसटोटल के सुरक्षा परीक्षण में 92 में से किसी भी सुरक्षा एजेंसी ने उनकी वेबसाइट या उसके सबडोमेन को दुर्भावनापूर्ण, फिशिंग या धोखाधड़ी से जुड़ा नहीं बताया। इसी तरह गूगल सेफ ब्राउजिंग की जांच में भी किसी असुरक्षित सामग्री की जानकारी नहीं मिली।

उनका कहना है कि उनकी वेबसाइट पिछले 12 वर्षों से उनके पत्रकारिता कार्य, किताबों, डॉक्यूमेंट्री फिल्मों और खोजी रिपोर्टों का डिजिटल संग्रह रही है। वहां न तो कोई वित्तीय उत्पाद बेचा जाता है और न ही किसी व्यावसायिक योजना के नाम पर लोगों से पैसा मांगा जाता है। ऐसे में बिना जांच और बिना उनका पक्ष सुने पूरी वेबसाइट बंद करना गंभीर सवाल खड़े करता है।

ठाकुरता ने होस्टिंगर से पूछा है कि वेबसाइट के खिलाफ ‘Fraud/Scam’ की शिकायत किसने और कब दर्ज कराई? कंपनी की एब्यूज टीम ने शिकायत पर क्या जांच की? वेबसाइट के मालिक को न तो पहले कोई नोटिस दिया गया और न ही शिकायत की प्रति भेजी गई, फिर पूरा होस्टिंग अकाउंट बंद करने का फैसला किस आधार पर लिया गया? उन्होंने यह भी पूछा है कि कंपनी के प्रतिनिधि ने वेबसाइट को दोबारा चालू करने की संभावना को ‘बातचीत से परे’ क्यों बताया।

परंजॉय ने कहा है कि उनके कानूनी सलाहकार 24 अक्टूबर के एकपक्षीय आदेश और वेबसाइट को पूरी तरह बंद किए जाने के खिलाफ अदालत में उचित कदम उठा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी एक लेख को हटाने या सर्च इंजन से हटाने के आदेश की आड़ में किसी पत्रकार की पूरी वेबसाइट और वर्षों का काम बंद कर देना स्वतंत्र मीडिया के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मामला बताया है।


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जैसे सीनियर जर्नलिस्ट के दशकों की पत्रकारीय पूंजी, लेखन और उपलब्धि को एक झटके में उड़ा देना अपराध है. ये कोई मामूली बात नहीं है. इस देश में अब सुनियोजित तरीके से सत्ता और सत्ता पोषित कारोबारियों के बारे में खुलासे करने वाली आवाज़ों को दबाने की साजिश हो रही है.
-अजीत अंजुम

परंजॉय गुहा ठाकुरता का मूल बयान यहां पढ़ें…

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