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टीवी

सीएनएन संवाददाता लैरी मडोवो की ये तस्वीर टीवी की वह सच्चाई बताती है जो कभी स्क्रीन पर नहीं दिखती!

CNN live report: Larry Madowo in a blue suit speaking outdoors in Accra, Ghana about the Russia-Africa Summit; city street backdrop visible.

टीवी स्क्रीन पर जो दिखता है, ज़रूरी नहीं कि पूरी तस्वीर वही हो। इस बात को अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ चैनल CNN के संवाददाता लैरी मडोवो (Larry Madowo) ने खुद अपनी तस्वीरों से साबित कर दिया है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपने लाइव शॉट की पर्दे के पीछे की तस्वीरें साझा की हैं, और साथ में बस एक लाइन लिखी है: “What you don’t see on TV”, यानी टीवी पर जो आपको नहीं दिखता।

स्क्रीन पर पूरे प्रोफेशनल

पोस्ट की पहली तस्वीर CNN के लाइव प्रसारण का स्क्रीनशॉट है। घाना की राजधानी अकरा से शाम 4:14 बजे के लाइव शॉट में मडोवो नेवी ब्लू ब्लेज़र और सफेद शर्ट में पूरी गंभीरता से रूस-अफ्रीका शिखर सम्मेलन पर रिपोर्ट कर रहे हैं। स्क्रीन की पट्टी बता रही है कि मॉस्को में हो रहे इस आयोजन में 48 देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। कमर से ऊपर का फ्रेम एकदम किसी अंतरराष्ट्रीय संवाददाता जैसा।

फ्रेम के बाहर बिल्कुल अलग नज़ारा

Live CNN report in Accra, Ghana: man in a blue blazer speaks on the Russia–Africa Summit, with a red CNN lower-third banner about delegates from 48 countriesyattending Moscow event (Larry Madowo).

असली कहानी नीचे की दो तस्वीरों में है। उसी ब्लेज़र और शर्ट के नीचे मडोवो काले शॉर्ट्स, घुटनों से नीचे तक के रंग-बिरंगे पैटर्न वाले मोज़े और स्नीकर्स पहने खड़े हैं। एक तस्वीर में वह सड़क किनारे मुस्कुराते हुए पोज़ दे रहे हैं, तो दूसरी में कैमरामैन ट्राइपॉड पर कैमरा लगाकर उन्हें शूट कर रहा है, और बगल में खड़ी कार और बाइक बता रही हैं कि यह कोई स्टूडियो नहीं, बल्कि अकरा की एक आम गली है।

हर रिपोर्टर का “ओपन सीक्रेट”

मडोवो की यह पोस्ट टीवी पत्रकारिता के उस राज़ को खोलती है, जिसे फील्ड रिपोर्टर और एंकर अच्छी तरह जानते हैं: कैमरा जितना दिखाता है, दर्शक के लिए उतनी ही हकीकत होती है। गर्म मौसम में घंटों सड़क पर खड़े रहकर लाइव देने वाले रिपोर्टर के लिए फ्रेम से बाहर का आराम कोई गुनाह नहीं, बल्कि समझदारी है। कोरोना काल में घर से लाइव देते एंकरों के “ऊपर फॉर्मल, नीचे पजामा” वाले किस्से भी खूब चर्चा में रहे थे।

भारतीय न्यूज़ रूम में भी यह नज़ारा अनजाना नहीं है। उमस भरी दोपहर में धूप में खड़े होकर लाइव देता रिपोर्टर, जिसकी टाई कैमरे के लिए और चप्पल अपने लिए होती है, कई चैनलों की फील्ड टीमों की रोज़ की कहानी है। फर्क बस इतना है कि मडोवो ने इसे खुलकर दुनिया के सामने रख दिया।

सोशल मीडिया पर “रियल” दिखने का दौर

मडोवो की पोस्ट उस बदलते दौर की भी झलक है, जहां बड़े चैनलों के पत्रकार अपनी चमक-दमक वाली छवि से हटकर काम के पीछे का असली और इंसानी चेहरा दिखाने से नहीं हिचकते। एक लाइन और तीन तस्वीरों में उन्होंने बता दिया कि टीवी की दुनिया में “फ्रेम” ही सब कुछ है, और फ्रेम के बाहर पत्रकार भी आम इंसान ही होता है।

कुछ बातें जो मैंने जानबूझकर नहीं जोड़ीं: पोस्ट की तारीख, उस पर आई प्रतिक्रियाएं और लाइक्स की संख्या मुझे नहीं पता, और रूस-अफ्रीका सम्मेलन की जानकारी सिर्फ स्क्रीन की पट्टी से ली है। अगर पोस्ट पर कोई दिलचस्प कमेंट या लाइक्स का आंकड़ा दिख रहा हो, तो जोड़ने से खबर और दमदार बनेगी।

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