भड़ास4मीडिया: सरकारी परियोजनाओं में कंपनियों के कामकाज और गुणवत्ता की जांच के मानक क्या हर राज्य में अलग-अलग हैं? मध्य प्रदेश में खराब उपकरणों और काम में देरी की शिकायतों के बाद एसर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं उत्तर प्रदेश में इसी कंपनी को लाखों टैबलेट की आपूर्ति का बड़ा ऑर्डर मिलने की जानकारी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस कंपनी के काम पर मध्य प्रदेश में गंभीर सवाल खड़े हुए, उसे उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी सरकारी खरीद की जिम्मेदारी देने से पहले उसके पुराने रिकॉर्ड की पड़ताल की गई या नहीं?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वर्चुअल क्लासरूम बनाने की परियोजना में देरी और खराब उपकरणों की शिकायतों के बाद एसर (Acer) कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के करीब 400 सरकारी कॉलेजों में वर्चुअल क्लासरूम स्थापित किए जाने थे। इसके लिए छह महीने का समय तय किया गया था, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी करीब 200 कॉलेजों में काम शुरू नहीं हो पाया।
रिपोर्ट के अनुसार, डेस्कटॉप, लैपटॉप और डिजिटल पैनल में तकनीकी खराबी की 131 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। जांच में यह बात भी सामने आई कि कंपनी को काम सौंपने से पहले वेंडर्स की वित्तीय स्थिति और उनकी कार्यक्षमता की पर्याप्त जांच नहीं की गई थी। रिपोर्ट में टेलीकम्युनिकेशन कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (TCIL) और एसर के बीच पिछले कुछ काम अधूरे रहने का भी उल्लेख है।
खबर में मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का पक्ष भी प्रकाशित किया गया है। उनके मुताबिक, सरकार भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और मध्य प्रदेश भंडार क्रय नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से काम करती है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कंपनियों ने बिडिंग के जरिए काम किया है और टेंडर प्रक्रिया में किसी पात्र कंपनी को रोकने या अनुचित लाभ देने का सवाल नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि कंपनी पर प्रतिबंध की शिकायत के मामले को दिखवाकर उचित समाधान निकाला जाएगा।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में UPDESCO के माध्यम से एसर को करीब 12.5 लाख टैबलेट की आपूर्ति का ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई है। एसर इंडिया ने भी उत्तर प्रदेश से अब तक का अपना सबसे बड़ा टैबलेट ऑर्डर मिलने की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक, यह ऑर्डर राज्य की डिजिटल सशक्तीकरण योजना के तहत मिला है।
यहीं से उत्तर प्रदेश की सरकारी खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। क्या UPDESCO और संबंधित विभागों ने एसर को टैबलेट आपूर्ति का काम देने से पहले मध्य प्रदेश में उसके कामकाज और ब्लैकलिस्ट किए जाने से जुड़ी शिकायतों की जानकारी जुटाई थी? क्या कंपनी के पुराने सरकारी प्रोजेक्ट का प्रदर्शन, उपकरणों की गुणवत्ता और समय पर काम पूरा करने का रिकॉर्ड टेंडर मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया?
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मध्य प्रदेश में एसर को ब्लैकलिस्ट किए जाने का आदेश किन शर्तों के तहत जारी हुआ है और क्या उसका प्रभाव दूसरे राज्यों में सरकारी टेंडर हासिल करने की पात्रता पर पड़ता है। यदि किसी राज्य में कंपनी के खिलाफ गुणवत्ता और काम में लापरवाही को लेकर कार्रवाई हुई है, तो दूसरे राज्य की एजेंसियों को उस रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर करनी चाहिए?
उत्तर प्रदेश में टैबलेट खरीद का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना है। इस पर सरकारी खजाने से बड़ी रकम खर्च हो रही है। इसलिए यह केवल टैबलेट की संख्या या कंपनी को मिले ऑर्डर का मामला नहीं है। असली सवाल उपकरणों की गुणवत्ता, उनकी उपयोगिता, वारंटी और खराब होने पर जवाबदेही का है।
सरकार और UPDESCO को सार्वजनिक करना चाहिए कि एसर के चयन के समय मध्य प्रदेश में उसके खिलाफ हुई कार्रवाई और शिकायतों को संज्ञान में लिया गया था या नहीं। साथ ही टेंडर में कंपनी की पात्रता, गुणवत्ता जांच, आपूर्ति की शर्तों और खराब टैबलेट मिलने की स्थिति में कार्रवाई के प्रावधानों की जानकारी भी सामने आनी चाहिए। आखिर सरकारी खरीद में कंपनियों के पुराने कामकाज की जवाबदेही तय होगी या हर नए टेंडर के साथ पुरानी शिकायतें भुला दी जाएंगी?
उत्तर प्रदेश के इन विभागों में होनी है आपूर्ति-
उत्तर प्रदेश में एसर को मिले टैबलेट आपूर्ति के काम के संदर्भ में यूपी ग्रामीण बैंक, माध्यमिक शिक्षा विभाग, UPDESCO, UPLC और बेसिक शिक्षा विभाग के नाम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन संस्थाओं और विभागों के लिए कितने टैबलेट की आपूर्ति की जानी है, खरीद की प्रक्रिया किस एजेंसी के माध्यम से संचालित हो रही है और एसर के चयन में कंपनी के पुराने सरकारी प्रोजेक्ट का रिकॉर्ड किस तरह जांचा गया। मध्य प्रदेश में कंपनी के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद यूपी में इतने बड़े स्तर पर उसे काम दिए जाने की प्रक्रिया और गुणवत्ता संबंधी शर्तों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।


