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आज के अखबार : वोट चोरी पर विशेष सत्र बुलाने की पेशकश जैसी ‘खबर’ से कनफूजिया गए संपादक जी

Aerial view of a flooded highway with a long line of stalled trucks and cars as brown floodwater surrounds fields nearby; bold Hindi banner reads 'हाईवे पर पानी, ट्रैफिक थमा' and a news headline about deaths and villages cut off.

संजय कुमार सिंह

हिन्दुस्तान टाइम्स की सेकेंड लीड का शीर्षक है, अमित शाह ने कहा – वोट चोरी पर संसद का विशेष सत्र बुलाने के लिए तैयार हूं। इसी के साथ छपी एक खबर का शीर्षक है, “विपक्ष मुझे बदनाम करने के लिए अफवाह फैला रहा है : मोदी”। मुझे दोनों ही खबरें पढ़कर हंसी आई लेकिन खबर तो है ही। यहां मैं रोज यही देखने-दिखाने, समझने-समझाने की कोशिश करता हूं कि किन खबरों को महत्व दिया गया और किन्हें नहीं दिया गया। मोटा-मोटी मेरा समझना, मानना और कहना यही है कि बहुत सारे अखबार खबरों को प्राथमिकता देने में सरकार के साथ भाजपा का नफा-नुकसान देखते हैं और पत्रकारिता निष्पक्ष नहीं रह गई है। हेडलाइन मैनेजमेंट के कारण अक्सर सरकार या भाजपा के पक्ष में होती है। भाजपा ने काफी पहले मीडिया में अपने लोगों को प्लांट करना शुरू कर दिया था और अब उनका काम दिख रहा है। सरकारी दबाव-प्रभाव और अघोषित इमरजेंसी की स्थितियां अलग हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने की लीड एनसीआर में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध की खबर है। जोशीमठ की हेलीकॉप्टर दुर्घटना के साथ प्रधानमंत्री का यह दावा भी पहले पन्ने पर है कि अंतिम सांस तक जनता की सेवा करते रहेंगे। लेकिन राहुल गांधी को अमित शाह की चुनौती नहीं है। द हिन्दू में लीड और सेकेंड लीड – दोनों चुनाव आयोग और चुनाव चोरी से संबंधित है। ये खबरें दूसरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं हैं। लीड का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से फॉर्म 7 के दुरुपयोग के आरोप पर जवाब मांगा। दूसरी खबर है, बंगाल में 16 लाख से ज़्यादा मतदाताओं के नाम स्वीकृत किए जाने के ख़िलाफ़ ईसीआई की अपील, कानूनी सवाल खड़े करती हैं।

नई दिल्ली डेटलाइन से श्रीपर्णा चक्रवर्ती की इस खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 16 लाख से ज़्यादा ऐसे मतदाताओं के नाम तार्किक विसंगतियों के कारण छांटे गए थे। ये वोट नहीं डाल पाए जबकि न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें स्वीकृति दे दी थी। हुआ यह था कि चुनाव आयोग (ईसीआई) ने उनके नाम शामिल किए जाने के ख़िलाफ़ अपील दायर की। खबर यह है कि जिन अधिकारियों ने इन 16.10 लाख मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने के ख़िलाफ़ अपील दायर की उन्हें ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के तहत ऐसा करने का अधिकार ही न हो। वैसे भी, अधिकार हो तो इस अपील का क्या मतलब है और अपील की गई यह भी खबर है। ऐसी कोई खबर चुनाव के समय नहीं थी और जो थी वह भी कुछ करने की जरूरत बताती थी।

कुछ भी नहीं हुआ, भाजपा बंगाल चुनाव जीत गई। लोकसभा और राज्य सभा के टीएमसी सदस्यों का दल बदल खुले आम चल रहा है, करवाया जा रहा है और अब अमित शाह कह रहे हैं कि संसद में बात करने के लिए तैयार हैं। अब जब वोट चोरी के खिलाफ रैली की तैयारी है, भाजपा उसे रोकने की कोशिशें कर चुकी है, सब सार्वजनिक है तब भी आज द टेलीग्राफ में छपी खबर के अनुसार, मुख्यमंत्री शुवेन्दू अधिकारी ने ममता बनर्जी से कहा, दिल्ली जाइए, यहां करियर खत्म हो गया है। तृणमूल छोड़कर भाजपा में गए अधिकारी गणतंत्र बचाओ रैली में बोल रहे थे। यह भी कहा कि कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल बनाया अब फिर कांग्रेस के साथ चाहती हैं। दि एशियन एज की लीड गुजरात चुनाव की सरकार की तैयारियों का संकेत दे रही है। खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने 14 हजार करोड़ की गुजरात परियोजनाओं की शुरुआत की और कहा, अंतिम सांस तक सेवा करेंगे। 

मोदी सरकार की चौकीदारी, सेवा, जुमले और झूठ आप जानते हैं। यह सब अलग मुद्दा है। आज अमित शाह की पेशकश के ‘खबर’ होने पर – बात होनी चाहिए है। बताने की जरूरत नहीं है कि मोदी के सत्ता में आने के बाद से क्या चल रहा है। कॉक्रोच आंदोलन के समय बच्चों को कील लगी लाठी, करंट मारने वाली लाठी और पेलेट गन से पिटवाने के बाद से मुश्किल में हैं। खुलासा यह भी हुआ है कि सरकार के लिए लठैती करने वाले पुलिसिए नेम प्लेट हटा लेते थे और बहुत सारे लठैत सरकारी गुंडे हैं। यह सब भारत जैसे देश में अनअपेक्षित था और है फिर भी खबर वैसी नहीं छपी जैसी छपनी चाहिए थी। अमूमन ऐसे मामले मीडिया उठाता है लेकिन स्थिति ऐसी है या बना दी गई है कि सोशल मीडिया नहीं होता तो पता भी नहीं चलता। सरकार को ना कुछ करना था ना किया है।

ऐसे में वोट चोरी पर संसद में चर्चा का प्रस्ताव विपक्ष को मूर्ख समझने की पराकाष्ठा है। वैसे भी पेशकश संसदीय कार्य मंत्री की ओर से आना चाहिए था। उसकी ओर से तो बिल्कुल नहीं जो संसद के पिछले सत्र के दौरान बार-बार बुलाने या चुनौती देने पर भी नहीं आया। पैलेट गन किसके आदेश से चले या बिना आदेश ही चला दिए गए इसपर कोई स्पष्ट बयान नहीं है और यह गृहमंत्री का ही काम था। संसद में ना गृहमंत्री आए ना प्रधानमंत्री। संसद दोनों सदनों की कार्यवाही को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। आम तौर पर सत्र समाप्त होने के कुछ दिनों के भीतर राष्ट्रपति द्वारा सत्रावसान की अधिसूचना जारी की जाती है और सत्र का औपचारिक अंत हो जाता है। इस बार लंबा समय बीत जाने के बाद भी सत्रावसान नहीं हुआ है। तकनीकी रूप से सत्र अभी समाप्त नहीं हुआ है। सरकार के पास विकल्प है कि नया सत्र आहूत किए बिना पुराने सत्र की बची हुई बैठकों को दोबारा शुरू कर दे।

इसलिए, पेशकश तकनीकी तौर पर सही हो या गलत बेहद अनैतिक है। देश जब सरकार से जवाब मांग रहा था तो जवाब नहीं आया। वोट चोरी के तहत काफी कुछ तो सुप्रीम कोर्ट की सहमति और जानकारी में हुआ है। इसलिए इसका इतना विरोध हो रहा है और सरकार की तमाम धमकियों, कार्रवाइयों के बावजूद भारी भीड़ जुट रही है। देशबन्धु की लीड के अनुसार राहुल गांधी ने कहा है कि अमित शाह लोगों को दिल्ली आने से रोक रहे हैं। हम जानते हैं कि पिछली बार दिल्ली आने वाली ट्रेन भी रोक दी गई थीं। अब जो स्थिति है उसके बारे में राहुल गांधी ने कहा है, राम लीला मैदान में दिखेगा जनता में कितना गुस्सा है। आज मेरे 10 अखबारों में विपक्षी गठबंधन के इस कार्यक्रम की कोई खबर पहले पन्ने पर नहीं है। अमर उजाला में भारी विज्ञापन के कारण तीन पहले पन्ने हैं और तीसरे पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, राहुल का कनॉट प्लेस से राम लीला मैदान तक कल मार्च।

दि इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड का फ्लैग शीर्षक है, गुजरात में मोदी कहीं नहीं जाएगा के नारे और तख्तियां। अमर उजाला की तीन लीड में एक यह भी है। इसका शीर्षक है, “देश में अफरा-तफरी फैलाने की साजिश थी ताकि मुझे बदनाम कर सकें : मोदी”। नवोदय टाइम्स की लीड भी यही है। शीर्षक दो लाइन का है और पहली लाइन है, “चौथी बार भी आएंगे मोदी : शाह”। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का शीर्षक अंग्रेजी में अनूदित है लेकिन इस खबर का इंट्रो है, अमित शाह ने राहुल गांधी को चुनौती दी : आइए, संसद का विशेष सत्र बुलाते हैं, चुनाव आयोग की चर्चा करते हैं। इसके साथ ही एक दूसरी खबर का शीर्षक है जो देशबन्धु की लीड है और ऊपर बता चुका हूं। जाहिर है, अमित शाह की यह पेशकश या चुनौती असामान्य है। खबरों के नियम के अनुसार इसे खूब प्रमुखता दी जा सकती है जैसा हिन्दुस्तान टाइम्स ने किया है फिर पूरी तरह नजरअंदाज किया जा सकता है जैसा कई दूसरे अखबारों ने किया है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री, अमित शाह, सीईसी और ‘उनके क्रू’ यानी चालक दल के सदस्यों पर निशाना साधा।

कहने की जरूरत नहीं है कि राहुल गांधी को पप्पू कहने वाले और उनके समर्थक प्रशंसक भी कहते रहे हैं कि राहुल गांधी को सड़क पर उतरना चाहिए। सरकार आंदोलनों को कुचलने के लिए जो सब कर रही थी उसमें अपने समर्थकों को पिटवाने का कोई मतलब नहीं था लेकिन राहुल गांधी की कार्यशैली से असहमत लोग अभी भी कहते हैं कि मोदी नहीं जाएगा। ऐसे नहीं जाएगा वैसे नहीं जाएगा और यह बहुत आम है। ऐसे ही एक मौके पर मल्लिकार्जुन खरगे ने कह किया कि जाएगा तो उसका बाप भी। मुझे लगता है कि यह बहुत सामान्य प्रतिक्रिया थी फिर भी भाजपाइयों ने।  ‘बाप’ शब्द को पकड़ लिया गया और उसके एक अर्थ – बायोलॉजिकल पिता की बात होने लगी। सबको पता है कि प्रधानमंत्री के पिता अब दुनिया में नहीं हैं इसलिए उनके कहीं जाने का मतलब नहीं है।

यही नहीं, वे खुद कह चुके हैं कि वे नॉन बायोलॉजिकल हैं। ठीक है कि, बायोलॉजिकल पिता अगर हों तो उनका अपमान नहीं किया जा सकता है या उनके बारे में अपशब्द नहीं कहे जाने चाहिए। लेकिन मुझे लगता है यहां बाप से मतलब आका से था। यहां अगर आप कहें कि मोदी जी का कोई आका नहीं है और वही सबके आका है तब बाप का मतलब उनकी टीम से होगा, अगर कोई सीनियर है तो उससे भी हो सकता है लेकिन जो इस दुनिया में नहीं है उसके जाने की बात करने का कोई मतलब नहीं है। मैं विषयांतर हो गया – मेरा मानना है कि जब चुनाव आयोग का विरोध सड़क पर हो रहा है, कायदे से हो रहा है तब बातचीत की पेशकश का क्या मतलब। उसकी या उस समूह की जो लोकतंत्र की ही हत्या करने पर आमादा है। संविधान, संवैधानिक संस्थाओं और संवैधानिक परंपराओं-रिवाजों की धज्जियां उड़ा चुका है।

इसलिए, आज यह खबर पिट गई जबकि इसपर चर्चा होनी चाहिए और पाठकों को समझना चाहिए कि सत्ता पाने के लिए भाजपा और आरएसएस व अन्य के इस परिवार ने क्या किया और अब सत्ता में बने रहने के लिए क्या-क्या कर रहे हैं। दूसरी ओर, अखबार, उनमें काम करने वाले भाजपा की मदद कर रहे हैं भले अपने ही स्तर पर कर रहे हों। भ्रम की स्थिति में कर रहे हों या जानबूझकर कर रहे हों पर वह अखबारों में दिखता रहता है। आज दैनिक भास्कर के पहले पन्ने की लीड हेलीकॉप्टर क्रैश के संदर्भ में भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट है – एविएशन कंपनियों की लापरवाही। खबर का शीर्षक है, खराब मौसम में 13 उड़ानें, हादसा होने के बाद भी पांच। विज्ञापन वाले इस पन्ने पर भास्कर रिसर्च है – काम काज से जुड़ने वाली महिलाओं का बड़ा वर्ग कम पढ़ा-लिखा।

दूसरे पहले पन्ने की लीड ‘अर्नब’ से आफत है। आप जानते हैं कि इस कारण देश के कई राज्यों में तेज बारिश हो रही है। लीड का शीर्षक है, “भूटान में झील फटी;  असम, पश्चिम बंगाल में बाढ़ का खतरा”। इस खबर के साथ डबल इंजन वाले उड़ीशा की एक दुर्लभ फोटो है। यह हाईवे पर पानी भरने से ट्रैफिक थमने की खबर है। फोटो में सैकड़ों वाहन खड़े दिख रहे हैं और यह भी कि आगे पानी भरा है। खबर है कि अर्नब से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य उड़ीशा है। 313 बचाव टीमें काम कर रही हैं। इसके साथ आरबीआई की रिपोर्ट है – 719.74 अरब डॉलर रह गया देश का विदेशी मुद्रा भंडार। मुख्य शीर्षक है – विदेशी मुद्रा भंडार सात सप्ताह में 66 अरब डालर घर गया, यह 28 साल की सबसे बड़ी गिरावट है।

मुझे लगता है कि दूसरे पन्ने की खबरें पहले पर होनी चाहिए थी और पहले की खबर दूसरे पर भी हो सकती थी। विदेशी मुद्रा भंडार में 28 साल की सबसे बड़ी गिरावट – चाहे जिस कारण से हो बड़ी खबर है। चुनाव चोरी पर चर्चा के लिए विशेष सत्र की चुनौती या प्रस्ताव से बहुत बड़ी।    

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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