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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक ‘आज’ अखबार के कर्मचारी रामपुकार सिंह की बड़ी जीत- मिलेगी इतनी धनराशि!

बिहार के अखबार कर्मचारियों के इतिहास में 15 अक्टूबर 2026 का दिन मील का पत्थर बन गया। श्रम न्यायालय, पटना के पीठासीन पदाधिकारी मानस कुमार ने Reference Case No. 28/2018 – रामपुकार सिंह बनाम प्रबंधन ‘आज’ दैनिक समाचार पत्र में मजदूर के पक्ष में फैसला सुनाया है और आज अखबार प्रबंधन को रामपुकार सिंह को 60 दिनों के अंदर 1453441 रुपए देने का आदेश दिया है।

यह आदेश 30/09/2026 को अधिनिर्णित हुआ और 15 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुआ।

कौन हैं रामपुकार सिंह?

रामपुकार सिंह, पुत्र स्व० नेपाल सिंह, निवासी – ग्राम चकबैरिया, पोस्ट-बैरिया, थाना-गोपालपुर, जिला-पटना। ये पिछले 39 वर्षों से दैनिक आज, फ्रेजर रोड, पटना में कार्यरत हैं। इनकी नियुक्ति 01/07/1987 को कम्प्यूटर आपरेटर के पद हुई थी। जहां वर्तमान में पी०टी०एस० इंचार्ज / वर्कमैन के रूप में कार्यरत हैं।

क्या था मजिठिया केस?

सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवम्बर 2011 में मजिठिया वेज बोर्ड लागू कर सभी अखबारों को पत्रकार और गैर-पत्रकार कर्मचारियों को नया वेतनमान देने का आदेश दिया था।

रामपुकार सिंह ने आरोप लगाया था कि ‘आज’ प्रबंधन उन्हें मजिठिया बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं दे रहा है। प्रबंधन ने कहा था कि उनकी नियुक्ति वैध नहीं है और वे समाचार-पत्र प्रतिष्ठान के कर्मचारी ही नहीं हैं।

बिहार सरकार के श्रम विभाग ने अधिसूचना संख्या-6/श्रम वि०आ०(03)-03/2017, दिनांक 28/08/2018 द्वारा इस विवाद को श्रम न्यायालय, पटना को धारा 17(2) श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम, 1955 के तहत सौंपा था।

कोर्ट ने क्या कहा? – 5 बड़े पॉइंट

लेबर कोर्ट ने प्रबंधन की सभी 5 प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया:

  1. प्रबंधन निदेशक शार्दूल विक्रम गुप्त और प्रबंध संपादक शशि शुक्ला को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाना सही है, क्योंकि वे प्रतिष्ठान के प्रतिनिधि के रूप में हैं।
  2. धारा 17(2) केवल राशि की गणना नहीं है, बल्कि यह एक न्यायनिर्णयन तंत्र है। कोर्ट को यह देखने का पूरा अधिकार है कि कर्मचारी और नियोजक के बीच संबंध है या नहीं, नियुक्ति वैध है या नहीं।
  3. प्रबंधन का यह तर्क कि “नियोजन ही विवादित है” कह कर केस को टाल दिया जाए, कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा – यदि ऐसा मान लिया गया तो मजिठिया बोर्ड का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
  4. ‘आज’ के अलग-अलग शहरों से छपने वाले संस्करणों की आय को अलग-अलग नहीं माना जा सकता। पटना यूनिट और बिहार के अन्य यूनिट एक ही Common Control में हैं, इसलिए एक ही newspaper establishment माना जाएगा।
  5. रामपुकार सिंह का काम मैनेजरियल या एडमिनिस्ट्रेटिव नहीं, बल्कि मैनुअल, क्लेरिकल और ऑपरेशनल प्रकृति का है, इसलिए वे धारा 2(dd) और 2(s) के तहत श्रमिक / कर्मकार हैं और मजिठिया बोर्ड के हकदार हैं।

कोर्ट ने कहा कि कर्मकार ने शपथपूर्वक साक्ष्य, भविष्य निधि, परिचय-पत्र और अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर अपना प्रारंभिक भार पूरा किया, लेकिन प्रबंधन ने नियुक्ति-पत्र, वेतन-पंजी, उपस्थिति-पंजी जैसा कोई भी दस्तावेज नहीं दिखाया।

कोर्ट ने मुख्य विवाद पर सुनवाई शुरू कर रामपुकार सिंह को मजिठिया बोर्ड के अनुसार देय राशि का हकदार बताया हैं और कोर्ट ने आज प्रबंधन को आदेश दिया है कि 60 दिनों के अंदर कामगार को 1453441/= का भुगतान करें अन्यथा उसके बाद भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत साधारण वार्षिक व्याज की दर से भुगतान करना पड़ेगा।

रामपुकार सिंह ने फैसले के बाद कहा – “यह मेरी अकेले की लड़ाई नहीं थी। यह उन सभी अखबार कर्मियों की जीत है जो 10 वर्षों से अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।”

इस फैसले से बिहार के सैकड़ों गैर-पत्रकार कर्मचारियों कोई नई उम्मीद मिली है।

रामपुकार सिंह ने अपने मजीठिया हक की लड़ाई अपने साथी सहकर्मियों के साथ साल 2016 के आखरी में शुरू की थी। अक्टूबर 2016 में सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के आलोक में श्रम विभाग द्वारा स्थानीय अखबारों में प्रकाशित विज्ञापन के आधार पर श्रम विभाग में फार्म सी के साथ की। रामपुकार सिंह प्रबंधन के खौफ को नकारते हुए अपना मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने और मजीठिया के अनुसार बकाया वेतन की मांग की। इन्होंने प्रबंधन पर मजीठिया लागू नहीं करने का आरोप लगाते हुए बकाया वेतन की मांग की। जहां इन्हें लम्बे संघर्षों के बाद सफलता प्राप्त हुई। न्यायालय ने इनके दावे को स्वीकार करते हुए 11 नवम्बर 2011 से 30 नवम्बर 2017 तक की अवधि के लिए 1453441/= रुपए का हकदार बताया है और प्रबंधन को 60 दिनों के अंदर भुगतान का आदेश दिया है।
रामपुकार सिंह की सेवा भी केवल दो माह शेष है। इन्होंने 30 नवम्बर 2017 के वाद की अवधि के लिए संघर्ष की बात की है। और पीएफ क्लेम करने की बात भी की है।

ज्ञात हो कि अक्टूबर 2016 में बिहार की राजधानी पटना से लगभग 170 लोगों ने लड़ाई शुरू की थी। जिसमें करीब 70 लोग आज अखबार से थे। पटना श्रम न्यायालय में मजीठिया से संबंधित यह दूसरा मामला है। इससे पुर्व हिन्दुस्तान अखबार के करण जी का आदेश जून 2023 में हुआ था। इसके अतिरिक्त 4 आदेश मुजफ्फरपुर श्रम न्यायालय के हैं। जिसमें प्रभात खबर के कुणाल प्रियदर्शी, हिन्दुस्तान से संजीव कुमार एवं संतोष कुमार तथा भास्कर से राजेश जी का है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी
9322411335

यहां पढ़ें आदेश…

Reference case document page (Hindi) with official seal, dated 15-10-2018, labeled 'Reference Case No. 28/2018'.
Page 2 of a Hindi legal document with Reference Case No. 28/2018, containing Q&A sections, formal text, and a purple circular seal at the bottom-left.
Scanned Hindi legal document page (Ref Case No. 28/2018) with full Devanagari text and a blue circular stamp on the left; page 3.
Page 35 of a Hindi legal document with reference case no. 28/2018, containing numbered sections (35–38), dense legal text, and an official circular stamp in the bottom-left corner. Handwritten marks and page number 35 visible.
Page from a Hindi legal document (Case No. 28/2018) with numbered sections and a circular blue stamp.
Page from an official Hindi court document labeled Reference Case No. 28/2018, with numbered points, dates, multiple signatures, and blue stamps/seals visible on the page.
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