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आयोजन

नैनीताल समाचार की 32वीं निबंध प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में पहुंचकर लगा जैसे वक्त ने अचानक पीछे की ओर छलांग लगा दी हो

Group of adults and schoolgirls on a stage posing for a photo, with a large shield featuring an emblem held by the front row students in uniform.

जितेंद्र भट्ट-

कुछ जगहें सिर्फ यादों में नहीं रहतीं, वे हमारी शख्सियत का हिस्सा बन जाती हैं। नैनीताल समाचार मेरे लिए ऐसी ही एक जगह है।

आज नैनीताल समाचार की 32वीं निबंध प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल होने का मौका मिला। वहां पहुंचा तो लगा जैसे वक्त ने अचानक पीछे की ओर छलांग लगा दी हो।

पुराने दिन, पुराने चेहरे और पत्रकारिता के शुरुआती दौर की तमाम यादें एक-एक कर ताजा होने लगीं।

दरअसल, मेरी पत्रकारिता की पहली पाठशाला नैनीताल समाचार ही रही है। यहीं लिखने-पढ़ने की समझ विकसित हुई, शब्दों को लिखने का सलीका सीखा, और खबरों को देखने का एक नजरिया मिला।

बाद में पत्रकारिता की औपचारिक पढ़ाई के लिए दिल्ली गया। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से प्रशिक्षण लिया और फिर ज़ी न्यूज़, इंडिया टीवी, टीवी9 भारतवर्ष और सहारा जैसे संस्थानों में काम करते हुए पत्रकारिता का करीब दो दशक लंबा सफर तय किया।

लेकिन इस पूरे सफर में एक बात हमेशा मेरे साथ रही, नैनीताल समाचार से मिला लेखन का संस्कार। शायद यही वजह है कि आज भी जब कभी लिखने बैठता हूं तो उस शुरुआती दौर की सीख कहीं न कहीं साथ चलती है।

बहरहाल, आज का आयोजन भी अपने आप में खास था। नैनीताल के सीआरएसटी इंटर कॉलेज में आयोजित इस प्रतियोगिता में नैनीताल और आसपास के 26 स्कूलों के करीब 225 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया था। तीन अलग-अलग वर्गों में आयोजित प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को समारोह में पुरस्कृत किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जाने-माने गांधीवादी विचारक और पत्रकार श्री इस्लाम हुसैन जी थे। नैनीताल समाचार के संपादक श्री राजीव लोचन साह जी, पवन राकेश जी और कई पुराने साथियों एवं वरिष्ठजनों से मुलाकात का अवसर भी मिला।

एक बात ने खास तौर पर प्रभावित किया, आज के डिजिटल दौर में, जब बच्चों की दुनिया मोबाइल स्क्रीन तक सिमटती जा रही है, तब भी निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिता के माध्यम से उन्हें सोचने, पढ़ने और अपने विचारों को शब्द देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 26 स्कूलों के 225 बच्चों की भागीदारी अपने आप में उम्मीद जगाती है।

आज का दिन कई मायनों में खास रहा। एक तरफ नई पीढ़ी के उन बच्चों को सम्मानित होते देखा, जो अपने विचारों को शब्दों में ढाल रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन लोगों के बीच बैठने का मौका मिला, जिनसे कभी मैंने लिखना सीखा था।

कुछ सफर मंजिल पर पहुंचकर पूरे नहीं होते, वे अपनी शुरुआत की ओर लौटकर और खूबसूरत हो जाते हैं।

नैनीताल समाचार से जुड़ी कुछ यादगार तस्वीरें साझा कर रहा हूं।

Award ceremony on a stage: an older man in a suit hands a trophy to a young man in a red blazer as others look on; banner with Hindi text in the background.
Cover featuring a collage of torn newspaper clippings in Devanagari script centered on a gray background; a red title at the top and a red caption at the bottom.
Handwritten Hindi text on white paper, arranged in several lines; appears to be a note or short passage.
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