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उत्तर प्रदेश

181 वूमेन हेल्पलाइन में काम करने वाली महिलाएं किससे मांगें मदद?

इन महिला कर्मियों को नहीं मिल रहा है वेतन

लखनऊ : प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए छः माह तक चलाया जा रहा मिशन शक्ति अभियान बिना 181 वूमेन हेल्पलाइन और महिला समाख्या जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के पुनर्जीवन के महज नाटक है। एक तरफ प्रदेश में मिशन शक्ति के नाम पर सरकार प्रचार में करोड़ों रूपया बहा रही है वहीं 181 वूमेन हेल्पलाइन में कार्यरत महिला कर्मियों के बकाए वेतन तक का भुगतान नहीं किया गया। इसलिए योगी सरकार यदि महिला सुरक्षा, सम्मान के प्रति ईमानदार है तो उसे तत्काल महिलाओं को महत्वपूर्ण सेवा देने वाले इन कार्यक्रमों को चालू करना चाहिए और इनमें कार्यरत कर्मियों के बकाए वेतन का भुगतान करना चाहिए।

यह बातें आज वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में उठाई। पत्र को जनसुनवाई पोर्टल पर भी दर्ज कराते हुए इसकी प्रतिलिपि अपर मुख्य सचिव महिला और बाल विकास और निदेशक महिला कल्याण को भी आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी गई है।

पत्र में कहा गया कि पूरे प्रदेश में महिलाओं पर हिंसा की बाढ़ आयी हुई है। महिलाओं पर हिंसा की गम्भीर स्थिति पर हाईकोर्ट तक टिप्पणी कर चुका है। वहीं योगी सरकार ने जस्टिस जे. एस. वर्मा समिति की संस्तुति के बाद अस्तित्व में आए महिलाओं को जमीनीस्तर पर सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रम 181 वूमेन हेल्पलाइन को बंद कर उसे 112 पुलिस की सामान्य हेल्पलाइन के हवाले कर दिया। इसमें कार्यरत महिला कर्मियों को एक झटके में सरकार ने काम से निकाल दिया गया और अब उनके बकाए वेतन का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।

हालत इतनी बुरी है कि महिला कल्याण विभाग और सेवा प्रदाता कम्पनी के बीच कमीशनखोरी की लड़ाई के कारण वेतन न देकर महिलाओं और उनके परिवारजनों को भुखमरी की हालत में पहुंचाया जा रहा है। काम कराकर वेतन न देना असंवैधानिक और बंधुआ मजदूरी के समान है। ऐसे में सीएम से हस्तक्षेप कर वेतन भुगतान कराने और कार्यक्रम को पुनर्जीवित करने की मांग की गई है।

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