ट्रस्ट के उपनियमों की विशेषताएं
संजय कुमार सिंह
अयोध्या के चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय के इस्तीफे पर विचार के लिए आज बैठक होनी थी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरि ने कल कहा कि रोज के चढ़ावे से उनका कोई संबंध नहीं है। वे पुणे रहते हैं और उन्होंने न कोई पैसा लिया है और ना ही खर्च किया है। इससे स्पष्ट हो गया कि चढ़ावा चोरी के मामले में कोषाध्यक्ष का नाम क्यों नहीं आ रहा था। अब जब उन्होंने रोज के चढ़ावा और खर्च से खुद को अलग कर लिया है तो पहले के इस्तीफों का महत्व बढ़ जाता है। चर्चा यह भी रही है कि इस्तीफा किसे दिया गया है और किसे दिया जाना चाहिये या क्यों किसी और को दिया जाना चाहिए। जो भी हो, जब पूरी ट्रस्ट की बैठक होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता था, कोषाध्यक्ष का खुलासा महत्वपूर्ण था लेकिन खबर छपी ही नहीं। इंडियन एक्सप्रेस में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्द देव गिरि की सिंगल कॉलम की तस्वीर के साथ दो कॉलम की खबर है। राम मंदिर चढ़ावा ‘चोरी’ विवाद – फ्लैग शीर्षक है। मुख्य शीर्षक है, ट्रस्ट की बैठक आज, कोषाध्यक्ष ने खुद को अलग किया : (और कहा) ‘दोषियों को गिरफ्तार किया जाए, सख्त सजा दी जाए’। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह सिंगल कॉलम की खबर है। शीर्षक है, अयोध्या मंदिर ट्रस्ट चंपत के इस्तीफे पर आज विचार करेगी। अखबार ने अंदर एक खबर की सूचना दी है। इसके अनुसार, ट्रस्ट के उपनियम पुनर्गठन की योजनाओं को सीमित करते हैं। इस खबर के साथ छपी ट्रस्ट डीड की खास बातें ऊपर हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी यह खबर सिंगल कॉलम में है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर बीच के कॉलम में सबसे ऊपर है जबकि यहां सबसे बाएं कॉलम में सबसे ऊपर है। खबर के अनुसार अभी तक यह पता नहीं है कि बैठक में कितने लोग या कौन से लोग आएंगे। आप जानते हैं कि ट्रस्ट में सरकार के प्रतिनिधियों के जरिए उपस्थिति है, ट्रस्टी बनाए गए लोग सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हैं।
राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कहा है कि ट्रस्ट को स्वायत्त कह देने भर से पारदर्शिता गैर जरूरी नहीं हो जाएगी न ही यह आरटीआई अधिनियम 2005 की परिधि से बाहर हो जाएगा। द हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है ना ही अंदर किस पन्ने पर है – इस बारे में कुछ पहले पन्ने पर बताया गया है। द टेलीग्राफ में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। दि एशियन एज में आज इस्तीफों पर विचार होना है कोषाध्यक्ष ने आज की बैठक से पहले खुद को अलग कर लिया है, जैसी खबरों को छोड़कर सिंगल कॉलम की एक खबर छपी है। इसका शीर्षक है, विश्व हिन्दू परिषद ने पुलिस से कहा, विपक्ष के राम मंदिर से चोरी के दावों की जांच करें। हिन्दी अखबारों में, आज दैनिक भास्कर में यह खबर वैसे ही है, जैसी होनी चाहिए। लीड के बराबर में चार कॉलम की खबर है। फ्लैग शीर्षक है – अयोध्या – इस्तीफों, जांच और नई व्यवस्था पर चर्चा, बैठक की जगह भी बदली गई। इस खबर का मुख्य शीर्षक है, श्री राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक आज; चंपत राय समेत तीन ट्रस्टियों की सुरक्षा बढ़ाने पर विचार। कोषाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि चढ़ावा गिनती से मेरा कोई संबंध नहीं रहा। देशबन्धु में यह खबर लीड है। आज की खबरों के लिहाज से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि चढ़ावा चोरी के लिए भाजपा आरएसएस जिम्मेदार है। उपशीर्षक है, कांग्रेस अध्यक्ष ने पूरे मामले को न्यायिक जांच के दायरे में लाने की मांग की है। यही नहीं, खरगे ने यह भी कहा है कि प्रधानमंत्री को इसपर स्पष्टीकरण देना चाहिए। विपक्ष के इस खबर के साथ शिवसेना के संजय राउत का भी बयान है। उन्होंने कहा है, भगवान राम के साथ गद्दारी कर रही है भाजपा। कहने की जरूरत नहीं है कि इतनी मांगों, बयानों और हिन्दुओं के साथ सरकार से जुड़ी मांग होने के कारण इन खबरों को पहले पन्ने पर रखा जा सकता था। वैसे भी, कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा है यह सभी रामभक्तों के लिए अत्यंत पीड़ा जनक है।
जो भी हो, कार्रवाई तो ट्रस्ट के नियमों के अनुसार ही होनी है और इसलिए भी यह पहले पन्ने की खबर है। वैसे भी, चढ़ावा चोरी या उसकी खबर या आशंका भी सभी रामभक्तों के लिए अत्यंत दुखदायक, भीषण पीड़ादायक है और स्वामी गिरि महाराज ने कहा है इससे हम अत्यंत आहत, दुखी एवं लज्जित हैं। नवोदय टाइम्स में यह खबर लीड है। शीर्षक है – अयोध्या चढ़ावा गबन मामले में भागवत बोले, दोषियों को सजा हो। इसके साथ एक और खबर का शीर्षक है, मंदिर ट्रस्ट की बैठक में आज होगी चंपत के इस्तीफ पर चर्चा। इन दो खबरों के साथ यह प्रचार और आश्वासन भी है कि, जेल में बंद तीन आरोपियों से पांच घंटे पूछताछ। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है- चढ़ावा चोरी : चंपत राय और अनिल मिश्र के इस्तीफे पर फैसला आज, विदाई तय। चढ़ावे की नकदी गिनने जैसे काम में 15 हजार के वेतन पर एक एजेंसी से आठ लोगों को लिए जाने की खबर थी। इनमें से छह के खिलाफ एफआईआर है। मैं इन छह लोगों का कारनामा जानना चाहता हूं। आज छपी खबर के अनुसार इनमें से एक अविनाश ने गर्लफोन को दो लाख रुपए भेजे थे और आईफोन गिफ्ट किया था। पुलिस पता लगा रही है कि रकम कहां खपाई गई है। हम जानेंगे कि चंदे से किनकी मौज हुई। लेकिन ये छोटे खर्च हैं बड़े मामलों का पता नहीं है या कहिए चर्चा भी नहीं है।
दिल्ली का वायु गुणवत्ता प्रबंध आयोग
यह तो हुई चढ़ावा चोरी जैसे मामले में खबर की हालत। आइए आज देखें कि पर्यावरण जैसे मामले में हम कितने गंभीर हैं। आज खबर छपी है, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के हवाले से आज खबर छपी है, दिल्ली को स्वच्छ परिवहन की राजधानी बनाने का संकल्प। इसके लिए दिल्ली सरकार ने हाल में एक नई और महत्वाकांक्षी ईवी (इलेक्ट्रिक व्हेकिल) नीति की घोषणा की है। कहने की जरूरत नहीं है कि सिर्फ वाहनों से ऐसा होना रहता तो इसपर कई साल से काम चल रहा है और अनलेडेड पेट्रोल की शुरुआत इसी नाम से हुई थी। अब इलेक्ट्रीक वाहन आ रहे हैं और गाड़ियों के लिए पेट्रोल में जबरन इथेनॉल मिलाया जा रहा है। जब यह सब चल रहा है तो आज खबर है, दिल्ली के वायु गुणवत्ता प्रबंध आयोग में स्वीकृत 56 लोगों की जगह 40 ही हैं और खाली पदों को भरे जाने की अभी कोई योजना नहीं है। जमीन पर काम और काम करने वालों की यह स्थिति है दूसरी ओर सरकार की प्रशंसा हो रही है और उसकी भी अंतरराष्टर्ीय स्तर पर चर्चा है। आप जानते हैं कि हिन्द महासागर में समुद्री संरक्षण और ब्लू इकोनॉमी में योगदान के लिए हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सेशेल्स का पहला “गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन” सम्मान मिला। सरकार ने इसे भारत के पर्यावरण नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति बताया। लेकिन देश के भीतर पर्यावरणीय चुनौतियों और सरकारी रिकॉर्ड को देखें तो तस्वीर कहीं अधिक जटिल दिखाई देती है। पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले हैं। दूसरी ओर, हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर आते ही दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर धुएँ की चादर छा जाती है। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है। केंद्र और राज्य सरकारें एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालती हैं, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय को बार-बार हस्तक्षेप करना पड़ता है। अदालत ने अनेक सुनवाइयों में कहा कि नागरिकों का स्वच्छ हवा में सांस लेना मौलिक अधिकार है, फिर भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता।

फोटो मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



