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सुख-दुख

पीपी सर को याद करने का सिलसिला जारी है!

दया शंकर मिश्रा-

भोपाल में गांधी भवन के बाद, दिल्ली,पटना और रायपुर में पीपी सर को याद करने का सिलसिला जारी है. इस क्रम में 8 अप्रैल को दिल्ली इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में स्मृति सभा में हम सब मिले और क्या खूब मिले!

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के आधार स्तंभ ( कार्यकारी निदेशक) रहे, श्री रामशरण जोशी सर, आईएमसी दिल्ली के प्रोफ़ेसर आनंद प्रधान , वरिष्ठ पत्रकार सुधीर जैन जी, आईटीएम ग्वालियर के प्रोफेसर जैन तोमर जी के समृद्धि और विस्तृत संस्मरणों से यादों का सिलसिला बहुत दूर तक चला गया. जोशी सर की मौजूदगी ने हम सबको बहुत जरूरी है और सर्वथा अनजाने किस्सों से मिलवाया!

माखनलाल विश्वविद्यालय को किराए के कैंपस और बेतरतीब कमरे में बैठकर कैसे पीपी सर ने दुनिया को उससे जोड़ा, शिक्षा और शिक्षण में कैसे नए प्रयोग किए. जोशी सर ने इन पर बहुत विस्तार से बातचीत की.

प्रधान सर को पीपी सर पर सुनना, भाव विभोर करने वाला अनुभव है. जयंत तोमर जी पीपी सर को याद करने के क्रम में मीरा तक पहुंच गए! जैन साहब उनके भीतर के साइंटिफिक टेंपरामेंट और शिक्षण के नए आयामों पर देर तक बात करते रहे. हमारे कुछ साथी कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं जो सबके लिए जल्दी सुलभ होगी . आप सब वरिष्ठ के साथ पीपी सर के मित्र, साथी सूर्यकांत पाठक जी, कैलाश सत्यार्थी फ़ाउंडेशन के मीडिया प्रमुख वरिष्ठ पत्रकार अनिल पाण्डेय जी, अत्यंत स्नेही, संवेदनशील, इसे स्मृति सभा के शिल्पकार वरिष्ठ पत्रकार पशुपति जी, शेफाली चतुर्वेदी जी, छतरपुर से शाम के लिए आईं निदा जी, लेखक पत्रकार, रंगकर्मी और फिल्मकार मोहन जोशी जी, सबने मिलकर इसे स्मृति संध्या को समृद्ध किया.

मोहन जी के बिना इस शाम को इस सरलता से निभा पाना संभव न होता. आप सबके साथ दिल्ली में इतने साथी जुटे कि रामशरण जोशी सर ने कहा,’ कभी सोचा नहीं था दिल्ली में एक शिक्षक की स्मृति सभा में तीन-चार घंटे तक इतने लोग इतने प्यार और स्नेह से बैठे रह सकते हैं!’ हमें याद रखना है, पीपी सर ने किस तरह हमारे जीवन को समृद्ध किया. किस तरह वह ‘अभय’ की बात करते हैं. (जानबूझकर ‘हैं’ लिख रहा हूं) पीपी सर होने का अर्थ क्या है, उनके मूल्य और विरासत क्या है? उनकी विरासत और अधूरे सपनों को पूरा करने की साझी जिम्मेदारी है.

और हां, इस शाम का जिक्र दीपिका शर्मा के भावपूर्ण, प्रेम पूर्ण और आत्मीय भाषण के बिना पूरा नहीं हो सकता! दीपिका ने जो कुछ कहा,उसे आगे बढ़कर शैफाली जी ने विस्तार से पूरा किया! आशा है,अपन सब मिलते रहेंगे. और अपन सब कर लेंगे. जैसे, इस शाम मिले !

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