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उत्तर प्रदेश

सेटिंग गेटिंग वाले जेल अफसरों पर नहीं होती कार्यवाही, मेजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट को भी दबा गए अफसर

राकेश यादव-

लखनऊ। शासन में सेटिंग गेटिंग रखने वाले जेल अफसरों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती है। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लगे लेकिन सुल्तानपुर, लखनऊ, मैनपुरी और आगरा जेलों में हुई बड़ी घटनाएं इस सच की पुष्टि करती नजर आती है। सुल्तानपुर में बंदियों की हत्या, सीतापुर में बंदी की हत्या, लखनऊ और आगरा जेल में बंदियों की गलत रिहाई और मैनपुरी में बंदियों से वसूली किए जाने की पुष्टि होने के बाद भी शासन ने दोषी अफसरों के खिलाफ आजतक कोई कार्यवाही नहीं की। यह मामले विभागीय अफसरों और कर्मियों में चर्चा का विषय बने हुए है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि कमाकर देने वाले अफसरों के खिलाफ इस विभाग में कोई कार्यवाही की ही नहीं जाती है।

बीती 22 जून 2023 को सुल्तानपुर जिला जेल में दो बंदियों मनोज और करिया के फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने का मामला सुर्खियों में आया था। बंदियों की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा मचाया। इस मामले की मजिस्ट्रियल जांच सीजेएम सुल्तानपुर सपना त्रिपाठी ने की। जांच में उन्होंने जेल प्रशासन को दोषी ठहराया। इसके बाद भी अभी तक शासन ने कोई कार्यवाही नहीं की इसी प्रकार सीतापुर जनपद की जिला जेल में महिला डिप्टी जेलर विजया लक्ष्मी के उत्पीडऩ और अवैध वसूली से तंग आकर एक विचाराधीन बंदी की जान चली गई। बंदी के परिजनों ने जमकर बवाल मचाया।

इस बवाल के बाद परिजनों ने जेल में तैनात महिला डिप्टी जेलर समेत चार अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। परिजनों का आरोप है वसूली न देने पर बंदी की हत्या कर दी गई। इस मामले में अभी तक शासन और मुख्यालय के अफसरों ने कोई सुध तक नहीं ली है। मैनपुरी जेल में एक कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक कोमल मंगलानी ने कार्यक्रम में मौजूद जेल सुरक्षाकर्मियों से अभद्रता करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि सुरक्षाकर्मी बंदियों से वसूली करने में बाज नहीं आते हैं, वहीं कार्यक्रम में सहयोग देने से कतराते हैं। यह मामला आज भी फाइलों में कैद है।

इसी प्रकार प्रदेश के जेलमंत्री के गृहजनपद की आगरा जेल में बीते दिनों अधिकारियों ने एक विचाराधीन बंदी की गलत रिहाई कर दी। मामला जेलमंत्री से जुड़ा होने की वजह से इस मामलें में कार्रवाई करने के बजाए पूरे मामले को ही दबा दिया गया। दूसरी ओर राजधानी की जिला जेल में एक विदेशी बंदी समेत तीन बंदियों की गल रिहाई और प्रदेश के बहुचर्चित सनसाइन सिटी मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लखनऊ परिक्षेत्र के डीआईजी जेल ने मामले की जांच की। इस जांच में अधीक्षक समेत कई अधिकारियों को दोषी भी ठहराया गया। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी किसी दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

विभागीय अधिकारियों में चर्चा है कि बंदियों के हत्या, गलत रिहाई, अधिकारियों के सुरक्षाकर्मियों से अभद्रता करने और पावर ऑफ अटार्नी जैसे गंभीर मामले होने के बाद शासन व जेल मुख्यालय स्तर से किसी भी दोषी अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं होने से जेल अधिकारी बेलगाम हो गए हैं। कार्रवाई नहीं होने अधिकारियों में शासन का कोई खौफ ही नहीं रह गया है।

कार्यवाही में भी दोहरा मापदंड

प्रदेश के कारागार विभाग में कार्यवाही के मामले में भी दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है। कानपुर देहात जिला जेल में एक विचाधीन बंदी की गलत रिहाई के मामले में जेल अधीक्षक राजेन्द्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। उन्हें जेल प्रशिक्षण संस्थान से अटैच किया गया है। वही राजधानी लखनऊ की जिला जेल में विदेशी बंदी समेत तीन अन्य बंदियों की गलत रिहाई के मामले में कोई कार्यवाही तक नही की गई।

मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट की होगी जांच

माजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट की भी होगी जांच। यह बात हम नहीं प्रदेश के कारागार राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मवीर प्रजापति कह रहे हैं। सुल्तानपुर जेल में जांच रिपोर्ट में दो बंदियों की हत्या का खुलासा होने के बाद जब जेलमंत्री से कार्यवाही के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जांच कराने के बाद कार्यवाही की जाएगी। मेजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के बाद जांच कराए जाने की बात ने जेलमंत्री के बयान पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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