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पतंजलि उत्पादों पर FDA की छापेमारी, बॉम्बे हाईकोर्ट में महाराष्ट्र सरकार ने क्या स्टैंड लिया, पढ़िए!

Bold collage poster: large yellow text 'MAHA GOVT HALTS RAIDS & SEIZURES' with 'PATANJALI RELIEF' header and Ayurvedic product bottles on the right, plus a gavel and small charts at bottom left.

मुंबई। पतंजलि आयुर्वेद और उसकी निर्माण इकाई दिव्या फार्मेसी के उत्पादों पर महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की छापेमारी ने आयुर्वेदिक उद्योग में हलचल मचा दी है। कथित भ्रामक लेबलिंग और स्वास्थ्य संबंधी दावों की जांच के तहत शुरू हुई इस कार्रवाई के बीच अब महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बड़ा आश्वासन दिया है।

सरकार ने अदालत को बताया कि पतंजलि और दिव्या फार्मेसी के खिलाफ चल रही रेड, सीज-जब्ती और अन्य जबरन कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया जाएगा। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक केंद्र सरकार आयुर्वेदिक दवाओं के विज्ञापन और लेबलिंग को लेकर कोई एक समान राष्ट्रीय नीति तैयार नहीं कर लेती।

दरअसल, मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब महाराष्ट्र FDA ने पतंजलि और दिव्या फार्मेसी के कुछ उत्पादों पर छापेमारी शुरू की। आरोप था कि उत्पादों की पैकेजिंग और लेबल पर ऐसे दावे किए गए हैं, जो ‘ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एडवरटाइजमेंट्स) एक्ट, 1954’ के प्रावधानों का उल्लंघन कर सकते हैं। FDA का मानना है कि गंभीर बीमारियों के इलाज से जुड़े अतिरंजित या अप्रमाणित दावे आम लोगों को गुमराह कर सकते हैं।

इन कार्रवाइयों को चुनौती देते हुए पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्या फार्मेसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश आने तक कंपनियों के खिलाफ कोई नई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

हालांकि, यह राहत केवल अंतरिम है। अदालत ने अभी तक यह नहीं कहा है कि FDA की कार्रवाई पूरी तरह गलत थी या कंपनियों के दावे पूरी तरह सही हैं। मूल विवाद अब भी बरकरार है और उसका अंतिम समाधान राष्ट्रीय नीति तथा आगे की न्यायिक सुनवाई पर निर्भर करेगा।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मामले के केंद्र में FDA की छापेमारी और आयुर्वेदिक उत्पादों के दावों की वैधता का सवाल है, जबकि रेड पर लगी रोक को फिलहाल एक अस्थायी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति यह तय करेगी कि आयुर्वेदिक कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार, लेबलिंग और चिकित्सकीय दावों को किस सीमा तक इस्तेमाल कर सकेंगी।

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