मुंबई। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े एक बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अदालत को बताया है कि जांच के दौरान पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इसके बाद मुंबई की विशेष CBI अदालत ने इस मामले को मजिस्ट्रेट अदालत में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी।
यह मामला PNB की मुंबई जोनल शाखा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नीरव मोदी से जुड़ी कंपनियों को दी गई क्रेडिट सुविधाओं का दुरुपयोग कर बैंक को 321.88 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
क्या है पूरा मामला?
PNB की आंतरिक जांच में पाया गया था कि नीरव मोदी द्वारा प्रमोट की गई साझेदार फर्मों सोलर एक्सपोर्ट्स (Solar Exports), स्टेलर डायमंड्स (Stellar Diamonds) और डायमंड आर यूएस (Diamond R US) के बीच तथा नीरव मोदी समूह की कंपनियों फायरस्टार इंटरनेशनल लिमिटेड (FIL) और फायरस्टार डायमंड्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड (FDIPL) के बीच कथित तौर पर सर्कुलर ट्रांजैक्शन किए गए थे। आरोप था कि इन लेनदेन के जरिए बैंक से प्राप्त सुविधाओं का गलत इस्तेमाल किया गया।
इसी आधार पर CBI ने नीरव मोदी, उसकी कंपनियों के निदेशकों और PNB के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया था। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) भी लगाई गई थी।
CBI ने अदालत में क्या कहा?
विशेष लोक अभियोजक विक्रम सिंह ने अदालत को बताया कि विस्तृत जांच के बाद एजेंसी को न तो PNB अधिकारियों और न ही निजी व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोई आपत्तिजनक सामग्री मिली है।
CBI ने कहा कि अब वह केवल निजी व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करेगी। चूंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लागू नहीं रह गई हैं, इसलिए यह मामला विशेष CBI अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट अदालत में होनी चाहिए।
विशेष न्यायाधीश जेपी दरेकर ने CBI की इस दलील को स्वीकार करते हुए मामले को मजिस्ट्रेट अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दे दिया।
क्या नीरव मोदी को मिली क्लीन चिट?
इस घटनाक्रम को नीरव मोदी को पूरी तरह से “क्लीन चिट” मिलना नहीं माना जा रहा है। CBI ने केवल इतना कहा है कि इस विशेष 321.88 करोड़ रुपये के मामले में PNB अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों की जांच और मुकदमा निजी आरोपियों के खिलाफ जारी रहेगा।
13 हजार करोड़ रुपये के बड़े PNB घोटाले का क्या होगा?
नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी पर PNB से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। उन पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) और विदेशी ऋण पत्रों के जरिए सार्वजनिक धन का गबन करने का आरोप है।
इस बड़े घोटाले की जांच CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों कर रहे हैं।
नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की मौजूदा स्थिति
नीरव मोदी फिलहाल लंदन की जेल में बंद है और भारत उसे प्रत्यर्पित कराने की कोशिश कर रहा है। वहीं, मेहुल चोकसी के खिलाफ बेल्जियम में प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
क्यों अहम है यह फैसला?
इस फैसले ने एक बार फिर नीरव मोदी प्रकरण की जांच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर CBI का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत नहीं मिले, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में शामिल इस मामले की सुनवाई अब सामान्य आपराधिक आरोपों के तहत आगे बढ़ेगी।


