अयोध्या स्थित राम मंदिर के दानपात्र से कथित तौर पर चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी और चोरी के आरोपों ने एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि ये आरोप किसी विपक्षी नेता या सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े हिंदी अखबारों में शुमार दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के जरिए सामने आए हैं।
दैनिक जागरण की खबर का शीर्षक है— “ट्रस्ट की अनदेखी से होती रही चढ़ावे की चोरी”। खबर में दावा किया गया है कि राम मंदिर के दानपात्र में आने वाली राशि में कथित हेराफेरी का सिलसिला वर्षों से चलता रहा और इसकी शिकायतें भी की गईं, लेकिन उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने वीडियो जारी कर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चढ़ावे की राशि की गणना से जुड़े कुछ कर्मचारियों को वर्षों तक संवेदनशील जिम्मेदारियों पर बनाए रखा गया। इतना ही नहीं, शिकायतों के बावजूद कथित तौर पर कार्रवाई नहीं हुई और सबूत के तौर पर मौजूद सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट कर दिए गए।
खबर में यह भी उल्लेख है कि चढ़ावे की गिनती से जुड़े एक कर्मचारी की जीवनशैली को लेकर सवाल उठे। दावा किया गया कि उसने गांव में भव्य भागवत कथा का आयोजन किया, खुलकर धन खर्च किया और महिलाओं को साड़ियां बांटीं। आरोप है कि मंदिर निर्माण के बाद से ही वह चढ़ावे की गणना से जुड़ा रहा और लंबे समय तक उसे इस जिम्मेदारी से नहीं हटाया गया।
अब सवाल यह है कि यदि दैनिक जागरण की रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से सही है, तो आखिर वे लोग कौन हैं जो कथित तौर पर वर्षों से इस खेल में शामिल रहे? शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सीसीटीवी फुटेज डिलीट किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं कराई गई? और सबसे बड़ा सवाल— देश के बड़े टीवी चैनल, जो राम मंदिर से जुड़ी छोटी से छोटी गतिविधियों को प्रमुखता से दिखाते हैं, इस मुद्दे पर खामोश क्यों हैं?
यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित ट्रस्ट और जिम्मेदार पक्षों को सामने आकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। लेकिन यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है।
राम मंदिर देश की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। सवाल उठाने वालों को चुप कराने के बजाय आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके और श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रहे।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
बताइए, दैनिक जागरण भी कह रहा है सालों से हो रही है राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी.
देश के TV कब इन धर्मद्रोहियों से सवाल पूछेंगे. खबर सही है तो कौन है ये जो सालों से इस कुकृत्य को अंजाम दे रहे थे, इसका खुलासा भी हो।
विक्रांत यादव, पत्रकार
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