Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

अब पुलिसवाला या मजिस्ट्रेट अपनी मर्जी से किसी को भी बिना वजह ‘शांति भंग’ का बहाना बनाकर जेल में नहीं डाल सकता!

लक्ष्मी कांत सिंह-

मैंने हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला (HABC 214/2026) पढ़ा है, जो मुझे लगा कि हम सबके काम का है। पुलिस और प्रशासन जिस तरह ‘शांति भंग’ (जैसे Cr.P.C. की धारा 151, 107/116 या नए कानून BNSS की धारा 126/135) के नाम पर आम लोगों को परेशान करती है और अवैध रूप से जेल भेज देती है, उस पर कोर्ट ने करारा तमाचा मारा है।​

Judgment page from the Allahabad High Court for a Habeas Corpus petition, with court seal and dates noted.

मामला कुछ यूं है कि गाजियाबाद की टीलामोड़ पुलिस ने 22 फरवरी 2026 को चंदर पाल सिंह नाम के एक वकील साहब (जो कि शारीरिक रूप से विकलांग भी हैं) को गिरफ्तार कर लिया। कायदे से गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना था, लेकिन पुलिस ने मनमानी की। जब उन्हें पेश किया गया, तो उनसे 50,000 रुपये का बांड भरवा लिया गया, लेकिन रिहा करने के बजाय उन्हें फिर भी जेल भेज दिया गया। जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा, तब जाकर पुलिस ने उन्हें 25 फरवरी को छोड़ा।

​इस तानाशाही पर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधे 75,000 रुपये (25,000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। और सबसे बड़ी बात यह है कि यह पैसा सरकार उन पुलिस अधिकारियों (एसीपी और एसएचओ) की सैलरी से वसूलेगी जिन्होंने यह गैरकानूनी काम किया है, साथ ही उन पर विभागीय कार्रवाई भी होगी।

​इस फैसले से हम सबके लिए जो सबसे काम के नियम निकल कर आए हैं, वो ये हैं:

  • अब शांति व्यवस्था के नाम पर कोई भी मजिस्ट्रेट 20,000 रुपये से ज्यादा का बांड नहीं मांग सकता।
  • इसके लिए किसी गारंटर (Surety) या नकद पैसे की जरूरत नहीं है, बस हमारे दस्तखत वाला पर्सनल बांड (Signature bond) ही काफी होगा।
  • जिस दिन हम बांड साइन कर देंगे, उसी दिन हमें तुरंत रिहा करना होगा।

​अगर कोई व्यक्ति बांड भरने से मना करता है, तो उसे जेल भेजने से पहले मजिस्ट्रेट को उस इनकार की ‘ऑडियो-विजुअल’ (वीडियो) रिकॉर्डिंग करनी होगी।

​और अगर इसके बाद भी बिना किसी वाजिब कारण के 24 घंटे से ज्यादा किसी को हिरासत में रखा गया, तो सरकार को उस व्यक्ति को 25,000 रुपये रोज के हिसाब से हर्जाना देना पड़ेगा। यह पैसा सीधे गलती करने वाले अधिकारी की जेब (सैलरी) से कटेगा।

​यह फैसला एक बड़ा हथियार है। अब कोई भी पुलिसवाला या मजिस्ट्रेट अपनी मर्जी से किसी को भी बिना वजह ‘शांति भंग’ का बहाना बनाकर जेल में नहीं डाल सकता।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन