दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूज पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक एवं प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को बड़ी राहत देते हुए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़े दिल्ली पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामलों को खारिज कर दिया है। अदालत ने इन मामलों को “कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग” करार दिया।
FDI मामले में क्या कहा हाईकोर्ट ने?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यूज़क्लिक को प्राप्त विदेशी निवेश वैध तरीके से, यानी ऑटोमैटिक रूट (Automatic Route) के तहत आया था। अदालत को जांच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि निवेश के पीछे कोई आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग या शेयरों का जानबूझकर अत्यधिक मूल्यांकन (ओवरवैल्यूएशन) किया गया था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निवेश से जुड़े कारोबारी फैसलों को बिना ठोस आधार के आपराधिक रंग नहीं दिया जा सकता।
दिल्ली पुलिस की FIR रद्द, ED का मामला भी खत्म
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने न्यूज़क्लिक के खिलाफ FDI नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर एफआईआर दर्ज की थी। हाईकोर्ट ने इस एफआईआर को रद्द कर दिया।
इसके साथ ही, इसी एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किया गया मनी लॉन्ड्रिंग का मामला (ECIR) भी स्वतः समाप्त हो गया। अदालत के फैसले के बाद ईडी की कार्रवाई का आधार ही खत्म हो गया।
अदालत ने क्या टिप्पणी की?
हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि निवेश प्रक्रिया में कोई आपराधिक मंशा थी। अदालत ने इसे कानून के दुरुपयोग का मामला बताते हुए कहा कि केवल निवेश संबंधी निर्णयों को आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता।
UAPA मामला अब भी लंबित
हालांकि, एफडीआई और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में राहत मिलने के बावजूद न्यूज़क्लिक और प्रबीर पुरकायस्थ की कानूनी मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज मामला अभी भी लंबित है। इस मामले में आरोप है कि चीन से कथित तौर पर अवैध फंडिंग हासिल कर भारत की संप्रभुता को कमजोर करने और एक खास तरह का प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी को बताया था अवैध
गौरतलब है कि मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने UAPA मामले में प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करते हुए उन्हें राहत दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
क्या है ताजा स्थिति?
दिल्ली हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक को FDI और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों से बड़ी राहत मिल गई है। हालांकि, UAPA समेत अन्य लंबित मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।
शीतल पी सिंह-
“न्यूज़क्लिक” मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा कि इस मामले को जारी रखना “कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग (Gross Abuse of the Process of Law)” था।
अदालत ने पाया कि FIR में लगाए गए आरोपों से न तो धोखाधड़ी (Section 420 IPC) का अपराध बनता है और न ही आपराधिक न्यासभंग (Section 406 IPC) का। अदालत ने यह भी माना कि विदेशी निवेश (FDI), शेयरों का मूल्यांकन तथा निवेश समझौते अपने-आप में किसी आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं हैं।
फैसले में यह भी दर्ज है कि RBI की प्रतिक्रिया के अनुसार विदेशी निवेश स्वचालित मार्ग (automatic route) से प्राप्त हुआ था तथा FEMA नियमों के उल्लंघन का कोई संकेत नहीं मिला था।
चूंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का ECIR और PMLA जांच इसी FIR पर आधारित थे, FIR के निरस्त होने के बाद ED की कार्रवाई का आधार भी कमजोर पड़ गया।
यह फैसला केवल न्यूज़क्लिक तक सीमित नहीं है। यह जांच एजेंसियों की शक्तियों, मीडिया की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के उपयोग की न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के बारे में तरह तरह की कहानियाँ मीडिया में लीक की गईं थीं। कई दर्जन पत्रकारों /मीडिया कर्मियों की रोज़ी रोटी इस पोर्टल के सहारे थी। पोर्टल को सरकार की नीतियों से असहमति की कीमत चुकानी पड़ी । पता नहीं इस सब की क्या भरपाई कैसे होगी लेकिन यह फ़ैसला फिर भी आज के हालात में बहुत ही महत्वपूर्ण है।

फ़र्ज़ी आरोपों और राजनैतिक विद्वेष में एक शानदार समाचार संस्थान को नष्ट कर दिया गया। प्रवीर पुरकायस्थ जैसे वरिष्ठ पत्रकार को लंबी प्रताड़ना झेलनी पड़ी और कितने ही पत्रकारों को संस्थान छोड़ना पड़ा। हाईकोर्ट ने Newsclick के ख़िलाफ़ इस पूरी प्रक्रिया को क़ानून का दुरुपयोग बताया है।
-अशोक कुमार पांडेय (लेखक और पत्रकार)


