प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) ने कथित फंड डायवर्जन मामले में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBi) के खिलाफ ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के मानद चेयरमैन सुभाष चंद्रा की याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी.
चंद्रा के वकील ने आज मंगलवार को और समय मांगा, जिसपर सेबी के एडवोकेट ने आपत्ति जताई. चंद्रा की कानूनी टीम ने ट्रिब्यूनल से बाद की तारीख का निवेदन किया, लेकिन सेबी के वकील ने चंद्रा द्वारा लगाए गए विकास और आरोपों का हवाला देते हुए पीठ से इसे अंतिम विस्तार के रूप में विचार करने के लिए कहा.
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट बताती है कि अब इस मामले में अगली सुनवाई सितंबर के आखिर में हो सकती है.
दरअसल, चंद्रा ने सोमवार को सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच की आलोचना की और नियामक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. चंद्रा ने आरोप लगाते हुए कहा था कि मंजीत सिंह नामक एक व्यक्ति, जिसकी एक बैंक अध्यक्ष ने उनसे सिफारिश की थी, ने सेबी में सभी लंबित मुद्दों को कीमत पर हल करने के लिए फरवरी में उनसे संपर्क किया था.

अगस्त 2023 में, सेबी ने चंद्रा और उनके बेटे पुनित गोयनका को समूह की चार कंपनियों में प्रमुख पद संभालने से रोक दिया. नियामक ने जून 2023 में एस्सेल समूह की कंपनी शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी के प्रमोटरों द्वारा धोखाधड़ीपूर्ण व्यवहार और फंड डायवर्जन का आरोप लगाया था.
पिता पुत्र की जोड़ी ने एसएटी से राहत की मांग करते हुए अलग-अलग अपील दायर की.
इससे पहले जून में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने चंद्रा को बाजार नियामक द्वारा मांगे गए दस्तावेज और जानकारी प्रस्तुत करने और कथित फंड डायवर्जन मामले में जारी समन का जवाब देने का निर्देश दिया था. सेबी द्वारा जारी समन के खिलाफ चंद्रा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी.
सूत्रों ने बताया कि सेबी की जांच से पता चला है कि ज़ी से फंड डायवर्जन पहले के अनुमान से काफी ज्यादा है. नियामक इस मामले में चंद्रा और उनके बेटे पुनित गोयनका को नए सिरे से कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में है.
ज़ी के प्रमोटरों के पास कंपनी में 4 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी है, जबकि 96 प्रतिशत सार्वजनिक स्वामित्व में है. मंगलवार को ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई.
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