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आज के अखबार : जज से भाजपा सांसद बने अभिजीत गंगोपाध्याय का नाम किसी ने प्रमुखता से नहीं लिया  

राजधानी की हवा से लेकर कानून-व्यवस्था तक की हालत चौपट है लेकिन अखबार विश्वगुरू की छवि बनाने में लगे हुए हैं। विमान में बम होने की खबर हफ्ते भर में 100 और फिर 24 घंटे में 50 लेकिन किसी कार्रवाई, किसी गिरफ्तारी तो छोड़िये किसी चिन्ता के संकेत अथवा खबर नहीं हैं। इससे 600 करोड़ रुपये के घाटे (परेशानी अलग) की खबर के बाद भी मीडिया ‘राजा का बाजा’ बजा रहा है और सोशल मीडिया के वेतनभोगी ट्रोल विपक्ष की आलोचना में लगे हैं।

संजय कुमार सिंह

वक्फ विधेयक पर जेपीसी की बैठक में मंलवार को कोलकाता हाईकोर्ट के जज से भाजपा सांसद बने अभिजीत गंगोपाध्याय का सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और चौथी बार के तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी से विवाद हो गया। गुस्से में उनने जो किया उससे बोतल टूट गई, जख्मी हुए। पैनल चेयरमैन जगदंबिका पाल ने उन्हें एक दिन के लिए निलंबित कर दिया है। यह खबर आज द हिन्दू और द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर सिंगल कॉलम में लेकिन टॉप पर है। बताया गया है कि खबर का विस्तार अंदर पेज 12 पर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में भी यह सिंगल कॉलम की खबर है। यहां भी बताया गया है कि खबर पेज 8 पर है। दोनों खबरों के शीर्षक में भाजपा सांसद का नाम या उनसे विवाद का जिक्र नहीं है। मेरे अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस और दि एशियन एज ने ही इसे पहले पन्ने पर क्रम से चार और पांच कॉलम में छापा है। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने वक्फ विधेयक पर संसदीय समिति की बैठक में बोतल तोड़ी, निलंबित। इंट्रो है, अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा, बोतल उनपर फेंकी गई थी।

खबर में अंदर लिखा है, भाजपा सांसद और कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजीत गंगोपाध्याय से गर्मागर्म बहस के दौरान कांच की बोतल तोड़ दी। दि एशियन एज का शीर्षक है, टीएमसी सांसद ने बोतल तोड़ी, वक्फ जेपीसी अध्यक्ष पर फेंकी। उपशीर्षक में दो बुलेट प्वाइंट हैं – समिति ने कल्याण बनर्जी को एक दिन के लिए निलंबित किया दूसरा है, जगदंबिका पाल ने कहा, आपराधिक कार्रवाई है, लोकसभा अध्यक्ष को सूचित कर दिया। यहां पहली बार में नहीं बताया गया है कि गर्मागर्म बहस हाईकोर्ट जज से सांसद बने अभिजीत गंगोपाध्याय से हो रही थी। पहली बार सिर्फ गर्मागर्म बहस के दौरान लिखा है। आगे कहा गया है, समिति रिटायर जजों और अधिवक्ताओं के एक समूह की बात सुन रही थी तभी विपक्ष के सदस्यों ने पूछा कि विधेयक से उनका क्या संबंध है (विधेयक में उनका क्या स्टेक है)। इसके बाद लिखा है कि गर्मागर्म बहस के दौरान श्री बनर्जी ने बोतल उठाई और टेबल पर पटक दिया। यहां बताया गया है कि गर्मागर्म बहस भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय से हुई जो कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जज हैं। आखिर में लिखा है और (टूटी हुई बोतल) इसे समिति के अध्यक्ष पर फेंक दिया। मैं घटना की बारीकी और उसकी रिपोर्टिंग की बात नहीं कर रहा हूं। मैं एक पूर्व जज जो इस्तीफा देकर भाजपा के सांसद बन गये हैं और पहली बार के सांसद हैं के समिति में होने, उनकी बहस चौथी बार के सांसद और अधिवक्ता से होने और उसे रेखांकित करने की जरूरत बता रहा हूं।

इंडियन एक्सप्रेस ने यह काम नहीं के बराबर किया है और एशियन एज ने परोक्ष तौर पर उनके वहां होने, बोलने और नाराज होने की सार्थकता बताने के बाद लिखा है कि बहस उनसे हो रही थी। इसमें यह नहीं बताया कि कल्याण बनर्जी चौथी बार के सांसद हैं। खबरों के अनुसार, भाजपा के अभिजीत गंगोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल की तमलुक सीट पर 77,733 मतों से जीत हासिल की है। वोटिंग के दौरान हिंसा और तनाव भी था। एक टीएमसी नेता की हत्या के बाद पांच बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। बंगाल में बीजेपी बनाम टीएमसी की राजनीति आप जानते हैं। चुनाव से पहले जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने कहा था कि वे कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ेंगे और यह उनकी अंतरात्मा की आवाज है। पहली बार के सांसद संसद सत्र के दूसरे दिन आर्थिक विषयों पर बोल रहे थे। इसी दौरान विपक्षी सदस्यों ने टिप्पणी की। इस पर गंगोपाध्याय ने कहा कि विद्वान सदस्यों को इसकी (आर्थिक विषयों) जानकारी नहीं है, उन्हें और सीखना चाहिए। इसी दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने ‘गोडसे’ को लेकर टिप्पणी की। इस पर गंगोपाध्याय ने कहा कि मूर्खों की तरह बात मत करो। इसके बाद सदन में हंगामा हो गया। विपक्षी सदस्यों गंगोपाध्याय के कहे शब्द का विरोध किया। बाद में इसे रिकार्ड से हटा दिया गया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने 42 में से 18 सीटें अपने नाम कर ली थी। 2024 के चुनाव में बीजेपी को 12 सीटें ही मिली हैं। पूर्व जज की तामलुक सीट इनमें एक है।

कल की घटना के बारे में मैं वही जानता हूं जो अखबारों में छपा है। मौके पर नहीं था, अपनी राय न बने इसलिए जानबूझकर वीडियो नहीं ढूंढ़ा। इसके अलावा इसमें मेरा कोई स्टेक नहीं है पर रिपोर्टिंग में पक्षपात नजर आ रहा है और मैं इसी को रेखांकित करना चाहता हूं। कल मैंने बताया था कि चीन वाली पूरी खबर ही छवि बनाने के लिए लिखी गई थी। आज इस खबर से लग रहा है कि यह इरादन नहीं भी हो तो भाजपा सांसद का बचाव और तृणमूल सांसद की आलोचना स्पष्ट है। एशियन एज की खबर से लग रहा है कि टूटी हुई बोतल अध्यक्ष पर फेंकी गई। यह हत्या (या गंभीर रूप से घायल करने की कोशिश) का मामला है और ऐसा होना नहीं चाहिये। हो तो एफआईआर होनी चाहिये। लोकसभा अध्यक्ष को सूचना इसकी गंभीरता बताता है। भाजपा आगे क्या करेगी वह तो बाद की बात है जबकि अगर ऐसा है तो कल ही एफआईआर होनी चाहिये थी। कहने की जरूरत नहीं है मेज पर रखी बोतल के टूटने के सैकड़ों कारण हो सकते हैं और इतने भर से सामान्य आदमी का गुस्सा काफूर हो सकता है। खुद जख्मी होने के बाद कोई किसी का नुकसान पहुंचाने के लिए उस पर टूटी हुई बोतल फेंके, असामान्य है और ऐसा हुआ है तो साफ-साफ लिखा जाना चाहिये और तब यह बाकी अखबारों में भी पहले पन्ने पर होती।

अमर उजाला में यह खबर दो कॉलम में है। पट्टी बंधी उंगलियों के साथ तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी और टूटी बोतल की फोटो के साथ। शीर्षक है, “वक्फ बिल : तृणमूल सांसद ने आपा खोया जेपीसी बैठक में बोतल फोड़ी… निलंबित”। एशियन एज की खबर में पहले बताया गया है कि समिति रिटायर जजों और अधिवक्ताओं के एक समूह की बात सुन रही थी। उसके बाद रिटायर जज और सांसद की बात आई है। यहां आपा खोया, बोतल फोड़ी और निंलबित …. जज साब से गर्मागर्म बहस की सूचना के बगैर है। सूचना एक ही ही है रखने के तरीके से सांसद (दों) की छवि अलग बनेगी। यह बहुत बारीक काम है और हो रहा है। मैंने लंबे समय तक गौर करने के बाद इसे रेखांकित करना शुरू किया है। अमर उजाला ने लिखा है, …. उन्होंने सामने रखी कांच की बोतल टेबल पर पटक दी, जिससे उनकी उंगलियों में चोट आई। इस तथ्य के मुकाबले याद कीजिये कि उन्होंने बोतल (साबूत या टूटी हुई) अध्यक्ष पर फेंकी। अमर उजाला के इस विवरण से लगता है कि मेज पर मुक्का मारने से भी पास रखी बोतल टूट गई होगी। गुस्से में उन्होंने दूर खिसकाया होगा जिससे जख्मी हुए और इसे अध्यक्ष की ओर किया जाना मान लिया गया होगा और फिर विवरण देने वाले ने जो विवरण दिया वह बदलते हुए इस रूप में छपा है।

नवोदय टाइम्स में यह टॉप पर तीन कॉलम में आज की सेकेंड लीड है और शायद इसीलिये कि शीर्षक है, “वक्फ बैठक : कल्याण बनर्जी ने बोतल तोड़कर पाल की ओर फेंकी”। उपशीर्षक है, तृणमूल सांसद बैठक से एक दिन के लिये निलंबित। इसके साथ जगदंबिका पाल का यह कोट हाइलाइट किया गया है, मैं चार दशक से संसदीय जीवन में हूं। ऐसा कभी नहीं देखा। सांसदों को विशेषाधिकार हासिल होता है, क्या इसका मतलब यह है कि कल कोई रिवाल्वर लेकर आ जाये। इस तरह की घटना से आहत हूं। कहने की जरूरत नहीं है कि जगदंबिका पाल राजनीति कर रहे हैं और नवोदय टाइम्स की खबर, शीर्षक व प्रस्तुति इस राजनीति से प्रभावित होकर उनके प्रति सहानुभूति जताती लगती है। ऐसे, जैसे संसदीय समिति का अध्यक्ष होना चीन या पाकिस्तान की सीमा पर खड़े होने की तरह जोखिम भरा है। इस खबर और प्रस्तुति पर इतना काफी है।

आज की खबरों की बात की जाये तो दिल्ली की हवा खराब होने लगी और विमानों को उड़ाने की फर्जी धमकी की खबरें बताती है कि सरकार अपने काम में कितनी कमजोर है। छवि निर्माण के लिए हेडलाइन मैनेजमेंट न सिर्फ सरकार करती है मीडिया की ओर से भी किया जाता है। ऐसे में विमानों को उड़ाने की धमकी ना रुक रही है और ना ही उसका कारण पता चल रहा है। खबर के अनुसार 24 घंटे में 80 घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बम होने की झूठी खबर मिली है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह सिंगल कॉलम की खबर है और यहां भी, नवोदय टाइम्स की तरह संख्या 50 है। इससे पता चलता है कि अब इन धमकियों को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है। इससे पहले की खबर के अनुसार हफ्ते भर में 100 ऐसी धमकियां मिली थीं। अगर यह बंद नहीं होगा और इन्हें रोका नहीं जायेगा तो इन धमकियों की गंभीरता कम हो जायेगी। संबंधित सतर्कता कम होगी और तब संभव है कि कोई हादसा हो जाये। आप जानते हैं कि पिछले 10 साल में तमाम संवैधानिक संस्थाओं और पदों की गरिमा कम हुई है। रेल दुर्घटनाओं का कारण साजिश बता दिया जाता है और अब सुरक्षित विमान यात्रा तथा संबंधित धमकी की गंभीरता भी कम हो रही है। मेरा मानना है कि धमकी देना इतना आसान नहीं है और ना ही धमकी देने वालों को पकड़ना इतना मुश्किल होना चाहिये। 15 दिन में करीब डेढ़ सौ तो बहुत है। फिर भी हफ्ते भर से ज्यादा समय से इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है तो किसी को जिम्मेदार ठहराने और कार्रवाई किये जाने की जरूरत है जबकि अब तो खबर छपनी भी कम हो गई है। शायद इसे भी सरकार विरोधी खबर मान लिया गया हो।

आज की खबर के अनुसार दिल्ली पुलिस ने 90 से अधिक उड़ानों में बम की धमकी के मामले में आठ एफआईआर दर्ज की है। खबर के अनुसार विमानन कंपनियों को इससे 600 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। मुझे लगता है कि एक खबर इसपर भी होनी चाहिये कि धमकी देने वालों का पता लगाने, उन्हें पकड़ने और रोकने के लिए क्या किया जा रहा है और क्यों नहीं पकड़ा जा रहा है – यह स्पष्ट किया जाना चाहिये। पर प्रधानमंत्री प्रेस कांफ्रेंस किये बगैर 10 साल काट लेंगे, फिर भी 240 सीटें ही नहीं बैसाखी के रूप में दो पार्टियां मिल जायें तो इसकी जरूरत या सरकार की प्राथमिकता भी मुद्दा है पर उसकी परवाह कोई नहीं कर रहा है। मुख्य धारा का मीडिया राजा का बाजा बजाकर खुश है। आइये, आज दिल्ली में अपराध की खबरें देख लें। पहली खबर तो स्कूलों को धमकी भरे मेल मिलने की है। एक खबर के अनुसार सीआरपीएफ के तीन और दो केंद्रीय विद्यालयों को धमकी भरा ई मेल मिला है। धमकी फर्जी साबित हुई है। सीआरपीएफ के ये स्कूल दिल्ली के रोहिणी और द्वारका तथा हैदराबाद के पास मेडचल में स्थित हैं। केंद्रीय विद्यालय हरियाणा के पंचकूल और उत्तर प्रदेश के रामपुर में हैं।

गुजरात में एक फर्जी जज की कहानी कल सोशल मीडिया पर थी। आज वह अमर उजाला में पहले पन्ने पर है। शीर्षक है, कोर्ट रूम से लेकर जज तक सब फर्जी। पांच साल से चल रही थी अदालत… गांधीनगर से ठग गिरफ्तार, करोड़ों की संपत्ति बनाई है। खबर में बताया गया है कि इसका दफ्तर ऐसा है जैसे असली अदालत… असली कोर्ट के रजिस्ट्रार ने किया भंडाफोड़। इस मामले में सच्चाई चाहे जो हो, ऐसी अदालत चलाना आसान नहीं है। यह संभव ही नहीं है कि संबंधित लोगों को पैसे दिये बगैर पांच साल कुछ फर्जी चल सके। इस देश में सरकारी जमीन पर ठेला लगाने वाला न सिर्फ पुलिस को, मोहल्ले के दादा को भी हफ्ता देता है। वेश्यावृत्ति घर में रोज दो-चार ग्राहकों से ही की जाये तो भी स्थानीय थाने को पता होता है (मोहल्ले के लोग छुटकारा पाने के लिए बताते हैं और वसूली शुरू हो जाती है)। ऐसे में फर्जी अदालत पांच साल चली, फिर भी संबंधित खबर सभी अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। चीन से समझौते की खबर कल थी। भले आज उसकी पुष्टि हो गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार दिल्ली के तिलकनगर इलाके में सोमवार को एक मनचले ने महिला पर चाकू से 24 बार हमला किया। इससे 30 साल की विवाहित महिला की हालत खतरे में है और वह आईसीयू में है। इस मामले में 36 साल के रविन्दर सिंह को गिरफ्तार किया गया है और यह महिला का पड़ोसी है तथा परिवार के अनुसार कुछ समय से महिला के पीछे पड़ा था। चौथी मंजिल के उसके घर में जबरन घुस गया और उसपर चाकुओं से कई वार किये। दि एशियन एज की एक खबर के अनुसार जम्मू कश्मीर सरकार ने कहा है कि राज्य की पुलिस ने बाहरी लोगों को (कश्मीर) घाटी छोड़ने के लिए नहीं कहा है। कश्मीर में पिछले आतंकी हमले के बाद सोशल मीडिया पर इस आशय की खबरों से इनकार करते हुए सरकार को ऐसा कहना पड़ा है। आप समझ सकते हैं कि विमान उड़ाने की धमकी पर कुछ नहीं हो रहा है, सोशल मीडिया पर भी शांति है लेकिन कश्मीर में एक वारदात के बाद सोशल मीडिया सक्रिय हो गया। यह सब कैसे होता है, कौन करता है – अब कुछ छिपा नहीं है। आप नहीं जानते हैं तो आंख-कान खोलिये, एंटीना जांचिये और सतर्क रहिये।

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