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सुख-दुख

फ़िल्म इंडस्ट्री वाले राजपूतों और ठाकुरों को हमेशा शोषक व ऐयाश दिखाते हैं!

मेवाड़ राजघराने के अरविंद सिंह मेवाड़ का निधन

सुधीर मिश्रा-

2012 की बात है । मैं दैनिक भास्कर उदयपुर का संपादक था । कुछ ही दिन वहाँ गए हुए थे कि एक दिन मेवाड़ राजघराने से फ़ोन आया कि अरविंद सिंह मेवाड़ आप से मिलना चाहते हैं सिटी पैलेस में । मैने जवाब में उन्हें ही दफ़्तर में आमंत्रण भेज दिया कि वह अगर मेरे साथ चाय पियेंगे तो अच्छा लगेगा । टीम के पुराने साथियों ने बताया कि अरविंद सिंह जी इससे पहले किसी अख़बार के दफ्तर नहीं गए, मुश्किल है, उनका आना । पर ऐसा नहीं था, वह अगले ही दिन मुझसे मिलने आए और खूब बातें की ।

मैं उनकी विनम्रता का कायल हो गया।उन्होंने मुझे राजमहल में आमंत्रित किया जो कि अब होटल में तब्दील हो चुका था । अरविंद सिंह जी को यह श्रेय जाता है कि उन्होंने राजस्थान की ऐतिहासिक कोठियों , हवेलियों और महलों को लिविंग हेरिटेज में बदलने की शुरुआत की । लिविंग हेरिटेज़ यानी उनके स्वरूप को बरक़रार रखते हुए उन्हें होटल में तब्दील करना ।इससे ऐतिहासिक इमारतों का रखरखाव आसान हुआ और राजस्थान के पर्यटन को चार चांद लगे ।

उन्हें फ़िल्म इंडस्ट्री वालों से बहुत शिकायत थी । उनका कहना था कि राजपूतों और ठाकुरों को हमेशा शोषक और ऐयाश दिखाते हैं जो कि ग़लत है । वह हँसते हुए कहते थे कि आप ज्यादातर फ़िल्मों में ऐसे राजपूतों का गेटअप मेरी तरह का देखेंगे, यह ज्यादती है । उनके और उनके बेटे के साथ फिर कई बार सिटी पैलेस और जगमंदिर जाना हुआ । आज उनके निधन की खबर मिली तो सब याद आया । ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें, ॐ शांति!

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