राजकेश्वर सिंह-
देश अंगड़ाई ले रहा, बदलाव को बेचैन युवा…
हो सकता है, फेसबुक पर मेरे कई दोस्त मुझसे असहमत भी हों ( जो कि उनका या फिर हर किसी का अधिकार है), लेकिन मेरी राजनीतिक समझ और लगभग चार दशक की पत्रकारिता के अनुभव से मुझे ऐसा लग रहा है कि देश एक अलग तरह की अंगड़ाई ले रहा है। एक अलग राजनीति की आहट है, जिसे मौजूदा राजनीतिक दल भी महसूस तो कर रहे हैं, लेकिन परंपरागत और पुराने ढर्रे की राजनीति के आदी राजनेता अभी उसे नज़रअंदाज़ करते हुए दिखना चाह रहे हैं। मुल्क के आजाद होने के बाद ऐसा पहली दफ़ा है, जब मौजूदा राजनीतिक हलचल के केंद्र में युवा हैं। उनमें खुद के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में देश कैसा हो? उसके लिए भी बेचैनी है। वे देश के भविष्य हैं और उसके लिए उन्हें कैसा देश चाहिए? उसको भी वही तय करना चाहते हैं।
देश में मौजूदा दौर का युवा पुराने ढर्रे की राजनीति- हिंदू-मुसलमान, भारत-पाकिस्तान, अगड़ा-पिछड़ा, मंदिर-मस्जिद और वोटों के जातीय गणित की चुनावी जीत के राजनीतिक पाखंडों से बिल्कुल आजिज लग रहा है। यही वजह है कि उसमें बदलाव की छटपटाहट दिख रही है। वे सिर्फ युवा हैं। उनमें कोई बड़ा -छोटा नहीं है। धर्म और संप्रदाय भी आड़े नहीं आ रहा है। इस जमीनी हकीकत की तस्दीक पहले दिल्ली का जंतर-मंतर और अब झारखंड का रांची कर रहा है।
इस दौर के युवाओं (जेन जी-1997 से 2012 के बीच की पैदाइश-आबादी लगभग 41 करोड़) के तेवर से साफ है कि वह अपने मुतल्लिक होने वाले फैसले की बागडोर उन नेताओं के हाथ में नहीं देना चाहते, जिसे उनकी ज़रूरतों और उनके मिज़ाज की समझ ही नहीं है। यह भी गौर करने की बात है कि देश में जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य बना है, उसमें बात जेन जी तक ही सीमित नहीं रह गई है। जेन जी के बाद की पीढ़ी जेन अल्फा ( 2013 से 2026 के बीच की पैदाइश वाले), जिसकी आबादी लगभग 33 करोड़ है, उनमें से भी एक हिस्सा जो प्राइमरी स्कूल से ऊपर है, वह भी मौजूदा बदलाव की राजनीति में दिलचस्पी ले रहा है। हाल ही में ऐसी एक तस्वीर रांची (झारखंड) में चल रहे छात्रों और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के आंदोलन से बहुत तेज वायरल हुई, जिसमें कक्षा-6 में पढ़ने वाले एक छात्र जैन अकदस हैदर ने युवाओं के सभी मौजू पर मीडिया से खुलकर बात की।
इससे पहले दिल्ली के जंतर -मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन के दौरान भी युवाओं और युवतियों की कई ऐसी तस्वीरें सामने आईं थी, जिसमें उन्होंने भी बढ़-चढ़कर शिरकत की थी, जिन्होंने नीट की परीक्षा या फिर ऐसी कोई प्रतियोगी परीक्षा नहीं दी थी। आंदोलन में शामिल होने की वजह पर उन सबका जवाब होता, कि वे इसलिए वहां पहुंचे हैं, क्योंकि कल मौजूदा राजनीतिक सिस्टम के चलते उन्हें भी इसी तरह के बार-बार पेपर लीक व दूसरी चुनौतियों का सामना उन्हें भी करना पड़ेगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी के आंदोलन और रांची में अपनी मांगों को लेकर धरने-भूख हड़ताल पर डटे युवाओं को लेकर वैसे तो देशभर में सत्ता और विपक्ष नेता यह दिखाने का प्रयास कर रहे हैं कि ये स्थितियां रूटीन का हिस्सा हैं, लेकिन सच यह है कि वे सब भी इस जेन जी और जेन अल्फा के तेवर से डरे हुए हैं। डरने की वजह भी है।राजनीतिक दल अब तक देश के जिन नागरिकों से वोट लेते रहे हैं, उसमें कोई उनसे जिद करने वाला नहीं था। उसके तेवर तो ढीले थे ही।उसके अलावा छोटी-छोटी ज़रूरतों और आने वाले दिनों में बेहतरी के सपनों में फंसकर कभी गरीबी हटाने के नाम पर, तो कभी अगड़े-पिछड़े, हिंदू-मुसलमान, भारत-पाकिस्तान, मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों पर बंटकर वह नेताओं को अपनी रहनुमाई का मौक़ा देता रहा है।
देश का जेन जी उस पिछली और पुरानी पीढ़ी से बिल्कुल अलग है। वह पढ़ा लिखा है। वह देश ही नहीं, दुनिया की जानकारी से लबरेज़ है। उसे तरक्की के मानकों की समझ है। वह भविष्य के ख़तरे के प्रति सजग है। उसके अपने सवाल और मुद्दे हैं और सिस्टम में जो भी सरकारें हैं, वे उसे हल करने के मामले में नाकाबिल पाता है, लेकिन उसके सवाल हैं और उसको उसका जवाब चाहिए। वह किसी भी सरकार की ओर से अपने नागरिकों के हितों की अनदेखी और ज़ुल्म और ज़्यादती के खिलाफ ही नहीं है, बल्कि देश की कोई संवैधानिक संस्था यदि अपने दायरे के बाहर जाकर काम करती है तो वह उसका प्रतिकार करना चाहता है। उसकी नीयत देश की हर संवैधानिक संस्था की जवाबदेही तय करने की है। उस दिशा में उसकी छटपटाहट लोगों के सामने आनी शुरू हो चुकी है। यह अलग बात है कि मौजूदा राजनीतिक सिस्टम और हमारा समाज उसे अभी उतना महसूस नहीं कर रहा है।
ऐसा भी नहीं है कि युवाओं की राजनीतिक चेतना के उभार से राजनेता बिल्कुल अंजान हैं, भले ही वे उसे सीधे तौर पर स्वीकार न करें। सीजेपी के जंतर मंतर पर आंदोलन और उसके चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े का बड़ा संदेश गया है। सरकारों ने उससे सबक लिए हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में अब युवाओं के लिए अलग से एकीकृत युवा नीति और उसके लिए आयोग बनाने की पहल हो रही है। प्रदेश सरकार ने जिलों में तैनात आईएएस, आईपीएस और आईएफ़एस अफसरों को इंटर कॉलेजों के छात्रों से हर महीने संवाद करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने और तकनीकी व उच्च शिक्षा के बारे में छात्रों को जागरूक करने को कहा गया है। इस तरह के कार्यक्रम हर महीने होंगे और हर डीएम उसका कैलेंडर तैयार करेगा।
जेन जी और जेन अल्फा के उभार और सरकारों से सवाल, जवाब व जवाबदेही की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे न सिर्फ अपेक्षा की बात कही है, बल्कि उन पर भरोसा भी जताया है। अलबत्ता, आईआईटी दिल्ली के कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि सवाल मत पूछिए, समाधान भी बताइए। इस बीच, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने भी भाजपा शासित राज्यों से युवाओं से जुड़े मुद्दों को आंदोलन या मीडिया की सुर्खी बनने से पहले ही सुलझा लेने की ताकीद की है।
दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी जेन जी और जेन अल्फा के उभार का अहसास हो चुका है। वे बीते दिनों ही प्रयागराज में छात्रों से रूबरू हुए। छात्रों की गूंज कार्यक्रम में यूपी के पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि बिहार तक के छात्रों ने शिरकत की हैं। लाखों छात्रों की मौजूदगी में उन्होंने न सिर्फ अपनी बात कही, बल्कि छात्रों ने मंच पर आकर अपने अनुभव भी साझा किये। इससे पहले राहुल गांधी राजस्थान के कोटा और उत्तराखंड के देहरादून में भी छात्रों, नौजवानों से इसी तरह के कार्यक्रमों में रूबरू हो चुके हैं।


