संजय कुमार सिंह
आज के अखबार : पार्ट-2
अमर उजाला में आज बिहार में चुनाव की घोषणा छह कॉलम में लीड है। सीजेआई पर जूता फेंकने की खबर दो कॉलम की सेकेंड लीड है। नवोदय टाइम्स में चुनाव की घोषणा ही लीड है और भोजपुरी में घोषणा का शीर्षक भोजपुरी में है। सीजेआई पर जूता फेंकने की खबर दो कॉलम में है इसके साथ एक्स पर प्रधानमंत्री के पोस्ट, हर भारतीय नाराज का हवाला भी है लेकिन इसमें मुद्दा था प्रधानमंत्री को यह पोस्ट करने में लगा समय। यहां यह खबर नहीं है। यह जरूर बताया गया है कि मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वे विचलित नहीं हैं। पर वह मुद्दा नहीं है। मुद्दा यह है कि भाजपा शासन में संविधान या सिस्टम या कानून व्यवस्था को हाथ में लेने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। कई मामलों में दिखता है कि सरकार समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और कई ऐसे मामलों में भाजपा का प्रचार तंत्र या उसकी सोशल मीडिया टीम ऐसा हंगामा करती है जैसे भारी अनर्थ हो गया हो लेकिन कायदे से शिकायत, एफआईआर या कार्रवाई नहीं होती है। राहुल गांधी उसके उदाहरण हैं और सेना के अफसर के लिए अपशब्द कहने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री सरकारी सुरक्षा के।
ऐसा मामले जिस ढंग से बढ़ रहे हैं उसमें यह तय किया जा सकता था कि इसकी खबर नहीं देनी है और यह हेडलाइन मैनेजमेंट का भाग हो सकता था। लेकिन खबर जैसे छपी है उससे नहीं लगता है कि इसपर विचार किया गया होगा या ऐसे ही छपने देने का निर्णय़ होगा या मीडिया ने ऐसे निर्णय़ को मान लिया होगा। जो भी हो, हिन्दी के मेरे तीसरे अखबार देशबन्धु में यह खबर पहले पन्ने पर सुप्रीम कोर्ट की दूसरी खबरों के साथ है। मुख्य खबर सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी पर सुनवाई की है। दो कॉलम के शीर्षक के साथ दो कॉलम की यह खबर कुल सात लाइन की है, शीर्षक एक लाइन का। इंडियन एक्सप्रेस में मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की खबर लीड है। तीन लाइन, तीन कॉलम के शीर्षक में हमलावर और प्रधानमंत्री की बात तो है। सोनिया गांधी की बात मुख्य न्यायाधीश और प्रधानमंत्री के साथ है जबकि प्रधानमंत्री ने जो कहा है, उसके दोनों हिस्से को इंडियन एक्सप्रेस ने प्रमुखता दी है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह रूटीन खबरों की तरह पहले पन्ने पर दो कॉलम में छपी है और शीर्षक में बताया गया है, हमलावर निलंबित। जाहिर है, मामला ऐसा नहीं है जैसा छपा है (या प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा है)।
हिन्दुस्तान टाइम्स में भी बिहार में चुनाव के एलान और मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमले की खबर बराबर में छपी है। चुनाव की पांच कॉलम में हमले की तीन कॉलम में। द हिन्दू में बिहार चुनाव की खबर चार कॉलम की लीड है। मुख्य चुनाव आयुक्त पर हमले की खबर पहले पन्ने पर नहीं है। यह जरूर बताया गया है कि चौंकाने वाली इस घटना की खबर अंदर पेज 10 पर है। खबर जूता फेंकने या कोशिश करने की नहीं है, मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाली पीठ पर कागज फेंकने की है। मुझे लगता है कि मामला हेडलाइन मैनेजमेंट का हो या नहीं, खबर को ऐसे छापने के लिए कहा गया हो या नहीं, खबर जैसे छपी है उससे साफ है कि मकसद भाजपा को फायदा या नुकसान पहुंचाने या नुकसान नहीं पहुंचने देने का है। अखबार निष्पक्ष खबरें नहीं दे रहे हैं। इस स्थिति से बचने और देश को बचाने का एक ही तरीका हो सका है – भाजपा के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा देना। वोट चोरी के आरोपों और दो मामलों में फेट एकम्पली की स्थिति से जाहिर है कि उसके सत्ता में रहते संस्थाओं के लिए स्वतंत्र-निष्पक्ष रूप से काम करना मुश्किल हो गया है और उसकी विचारधारा के समर्थक लगने वाले लोग मुख्य चुनाव आयुक्त को अपमानित करके सनातन के अपमान की बात कर सकते हैं या कर चुके हैं। इससे मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर टीका-टिप्पणी की स्थिति बनेगी जो समाज और निष्पक्ष न्याय के लिए ठीक नहीं है।
दि एशियन एज में बिहार चुनाव की खबर लीड है। इसके बराबर में जयपुर के अस्पताल में आग लगने की तस्वीर और सिंगल कॉलम की खबर के साथ मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने की कोशिश की खबर दो कॉलम में है। द टेलीग्राफ में यह खबर सिंगल कॉलम में है। विवरण अंदर होने की सूचना भी है। मुख्य न्यायाधीश पर हमले की खबर और उसकी प्रस्तुति को आप जैसे देखिए, हेडलाइन मैनेमेंट मानिये या मत मानिये बिहार चुनाव की खबर तो खेल है ही। लेकिन उसकी प्रस्तुति भी रूटीन खबर की तरह है। जो कहा गया वही बता दिया। इसमें यह बताने या इस तथ्य को रेखांकित करने की जरूरत भी नहीं समझी गई कि तीन दशक में पहली बार बिहार में दो चरणों में मतदान कराने की घोषणा की गई है। खबर के अनुसार बिहार में हमेशा तीन या ज्यादा चरणों में मतदान हुए हैं और यह 1995 से चला आ रहा है। देशबन्धु में पवन खेड़ा के हवाले से छपा है, हमें सवालों के जवाब नहीं मिलते। पप्पू यादव ने कहा है, चुनाव आयोग का भाजपा के साथ ‘गठबंधन’। सरकारी दावे, सूचनाएं और प्रचार खूब है उनकी चर्चा मैं नहीं कर रहा हूं। अखबारों में खबर नहीं है लेकिन मैंने चैट जीपीटी से पूछा, बिहार में चुनाव की घोषणा हो गई है। खबर है कि तीन दशक बाद पहली बार दो ही चरण में चुनाव होंगे। इससे पहले तीन या ज्यादा चरणों में मतदान होते रहे हैं। इस बार एक ही चरण में मतदान की मांग थी लेकिन दो चरण में घोषणा हुई है। भारतीय जनता पार्टी के लिए मुश्किल बंगाल में आठ चरणों में और आसान महाराष्ट्र में एक चरण में चुनाव कराने का रिकार्ड है। भाजपा से गठबंधन और मिलीभगत के आरोपों के बीच चुनाव आयोग की इस राजनीति पर आप क्या कहेंगे?
इसपर जो जवाब मिला उसके खास अंश हैं – “कम चरणों में चुनाव से प्रशासन और सुरक्षा बलों पर कम दबाव होता है, लेकिन इससे सरकार या सत्ताधारी गठबंधन को एकमुश्त प्रचार का मौका मिलता है। अगर सत्ताधारी दल के पास ज्यादा संसाधन और मीडिया समर्थन हो, तो वे कम समय में ज्यादा प्रभाव डाल सकते हैं। चुनाव आयोग को संविधान के तहत निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था माना गया है, लेकिन बार-बार उसके फैसलों पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। अगर चुनाव आयोग पर जनता और राजनीतिक दलों का भरोसा कमजोर होता है, तो यह चुनाव की वैधता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला है। ऐसे में आयोग को चाहिए कि वह पारदर्शिता, तथ्यात्मक स्पष्टीकरण और सभी दलों को समान अवसर देने की दिशा में काम करे।” लेकिन स्वतंत्र संपादक पूरी तरह स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं। चैट जीपीटी से मैंने दूसरा सवाल किया, पटना में चुनाव आयोग की प्रेस कांफ्रेंस, चुनाव की घोषणा नहीं करना, फिर मेट्रो का उद्घाटन, नकद बांटने जैसे काम और अगले दिन चुनाव की घोषणा – इससे संबंधित आरोप और खबरें क्या हैं। कुछ खास हो तो देखकर बताइये। क्या इस बात का अंदेशा लगता है कि चुनाव की घोषणा किसी के कहने पर या किसी की सुविधा के लिए टाली गई और अगले दिन की गई? जबाव की खास बातें इस प्रकार हैं, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 6 अक्टूबर 2025 को पटना मेट्रो के एक प्राथमिक 3.45 किमी “उच्च स्तरित कोरिडोर” का उद्घाटन किया। छह भूमिगत मेट्रो स्टेशनों की नींव भी रखी गई। कुछ रपटों के मुताबिक, “घंटों पहले” ही लगभग ₹15,053 करोड़ के विकास प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री द्वारा घोषित किए गए। (समाप्त)
इसके पहले का पार्ट पढ़ें – ‘सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान’, खबर देकर संविधान का अपमान सह लिया
https://www.bhadas4media.com/sanatan-ka-apmaan-nahee-sahega-hindustaan/
लेखक संजय कुमार सिंह से संपर्क [email protected] के ज़रिए किया जा सकता है।


