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आज के अखबार : दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन की खबर अंग्रेजी अखबारों में सिर्फ ‘द हिन्दू’ में है

संजय कुमार सिंह

दिल्ली में कल प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। इसकी खबर आज मेरे तीनों हिन्दी अखबारों में पहले पन्ने पर है लेकिन अंग्रेजी अखबारों में सिर्फ द हिन्दू में फोटो है। खबर मेरे किसी भी अन्य अंग्रेजी अखबार में नहीं है। हालांकि, फोटो भी वह नहीं है जिसे एनडीटीवी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करने के बाद हटा लिया है। दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन दिल्ली पुलिस को नागवार गुजरी और सरकार के खिलाफ उठ रही आवाज को दिल्ली पुलिस ने रौंद दिया। उसकी सबसे मार्मिक या सच कहूं तो सही खबर देने वाली तस्वीर एनडीटीवी ने पोस्ट तो की पर न जाने किसके दबाव में हटा लिया। वैसे, सोशल मीडिया पर या अखबारों में भी ऐसी तस्वीर छापना सामान्य नहीं है। भले ऐसा होना भी सामान्य नहीं है और इसके प्रकाशन और इसे वापस लेने से संबंधित निर्णय मुश्किल ही होगा फिर भी खबर तो है और आज खबर यही है कि प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन की खबर तो नहीं ही छपी, दिल्ली पुलिस की ज्यादती की तस्वीर भी नहीं छपी। सोशल मीडिया पर इसकी पर्याप्त चर्चा है। यह अलग बात है कि अमर उजाला में इस खबर का मुख्य शीर्षक दिल्ली पुलिस की ज्यादती नहीं, “हवा हुई और जहरीली, एक्यूआई 391” है।  कहने की जरूरत नहीं है कि एक्यूआई इससे भी ज्यादा रहा है और तब खबर को अमर उजाला में पहले पन्ने पर जगह नहीं मिली है। वैसे इसका कारण उस दिन की दूसरी खबरें हो सकती हैं लेकिन आज प्रदर्शन और पुलिस ज्यादती को छोड़कर एक्यूआई 391 होने की खबर असल में खबर नहीं है। यह अलग बात है कि जो स्थितियां हैं उसमें इतना भी कम नहीं है और आज की खबर तो यह है कि उत्तर प्रदेश में बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई की गई है और नोएडा में 60 से ज्यादा एफआईआर हुई है। बहराइच में दो को निलंबित किया गया है। यह खबर आज इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर है और खबर यह भी है कि नोएडा में बीएलओ के खिलाफ यह कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट मेधा रुपम ने की है जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पन्ने की अपनी खबर में इस तथ्य को नहीं बताया है।

इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक अरुण शौरी के केंद्रीय मंत्री बनने से लेकर प्रचारक (या कांग्रेस विरोध) की उसकी भूमिका में इस खबर के पहले पन्ने पर होने, इसके शीर्षक और खबर में यह नहीं होना कि नोएडा की डीएम मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी हैं – सबके मायने हैं। खास कर तब जब आज जनसत्ता में इससे संबंधित खबर का शीर्षक है, कुछ राज्यों में बीएलओ की मौत के बाद भाजपा पर कांग्रेस का हमला, कहा गहन पुनरीक्षण सुधार नहीं, बल्कि अत्याचार। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की खबर अलग है। जनसत्ता की खबर इस तरह है, उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले की डीएम मेधा रूपम ने वोटर लिस्ट के एसआईआर में लापरवाही और नियमों का पालन न करने के मामले में सख्त कार्रवाई की है। डीएम ने 60 बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) और सात सुपरवाइजरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। आज नवभारत टाइम्स (ऑनलाइन) का शीर्षक इस प्रकार हैं – नोएडा में एसआईआर को लेकर डीएम मेधा रूपम अलर्ट, 67 बीएलओ और सुपरवाइजर पर ठोका केस। दैनिक जागरण की खबर है, ग्रेटर नोएडा में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर एसआईआर कार्य में लापरवाही करने वाले 60 बीएलओ और सात सुपरवाइजर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जिला निर्वाचन अधिकारी मेधा रूपम ने सेक्टर और जोनल मजिस्ट्रेटों के साथ समीक्षा बैठक की और पुनरीक्षण कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के निर्देश दिए, साथ ही मतदाता सूची को अद्यतन करने पर जोर दिया। एसआईआर की डेडलाइन करीब, नहीं पहुंच रहे बीएलओ; नोएडा में 60 पर एफआईआर, बहराइच में दो सस्पेंड। देशबन्धु में इस खबर का शीर्षक है, खरगे ने बीएलओ की मौत पर चिन्ता जताई – नोटबंदी, लॉकडाउन की याद दिलाता है एसआईआर।

कुल मिलाकर, प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को दिल्ली पुलिस ने डराया-धमकाया और जबरदस्ती की। दूसरी ओर, एसआईआर को लेकर आतंक का माहौल है लेकिन खबरें वैसी नहीं हैं जैसी स्थिति है। अमर उजाला का उपशीर्षक है, इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन, 15 हिरासत में पुलिसकर्मियों पर मिर्च स्प्रे डाला, चार अस्पताल में भर्ती। दूसरा उपशीर्षक है, कल तक स्थिति में सुधार के आसार नहीं, कई केंद्रों पर एक्यूआई 450 पार। कहने की जरूरत नहीं है कि जो स्थिति है उसमें सरकार को स्वयं कार्रवाई करनी चाहिए। सच पूछिए तो स्थिति यहां तक पहुंचनी ही नहीं चाहिए थी पर पहुंची, खबर नहीं के बराबर छपी तो विरोध प्रदर्शन हुआ, उसमें पुलिस ने ज्यादाती की। उसकी खबर नहीं छपी है और अमर उजाला ने बताया है, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज होगा मामला। यह लोकतंत्र की अम्मी का हाल है। मोटे तौर पर इसका मतलब हुआ – सरकार अपना काम नहीं कर रही है या कर रही हो तो उसका पर्याप्त असर नहीं है और इसका विरोध करने वालों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई तो हो ही रही है प्रदर्शन करने वालों पर मामला भी दर्ज होगा। यह स्थिति क्यों और कैसे है बताना मेरा काम नहीं है। आपको चिन्ता होगी तो जानते होंगे कि एक्यूआई कम दिखाने के लिए दिल्ली सरकार का स्प्रिंकलर आनंद विहार के पास निगरानी केंद्र के चारो ओर चक्कर लगाता और काम करता देखा गया था। इसी तरह, प्रधानमंत्री के छठ करने के लिए एक नकली यमुना घाट बनाया गया था और उसकी पोल खुल गई तो प्रधानमंत्री नहीं गए। इलजाम राहुल गांधी पर मढ़ दिया गया जबकि उन्होंने छठ के खिलाफ वैसा कुछ कहा ही नहीं था। जो भी हो, यह खबरों का मामला है। कल के प्रदर्शन के खिलाफ आज देशबन्धु की खबर है, दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन, नारे लगाए – एक्यूआई 400 पार कहां गई मोदी सरकार, कहां है दिल्ली सरकार

नवोदय टाइम्स का शीर्षक है, “प्रदूषण : दिल्ली के कई इलाके रेड जोन में”। इसके साथ प्रदर्शन की एक सामान्य तस्वीर छपी है जिसका कैप्शन है – खराब होती एयरक्वालिटी के खिलाफ इंडिया गेट पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाते पुलिस और सुरक्षाकर्मी। इसके साथ एक खबर का शीर्षक है, सीकर में 22 बीमार। इस खबर के अनुसार, राजस्थान के सीकर जिले में प्रदूषण के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर 22 लोगों व विद्यार्थियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एडीएम रतन लाल ने कहा, मामले की जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘यहां लाए गए बच्चे लगभग ठीक हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जांच के लिए कहा गया है। 15 बच्चों समेत 22 मरीजों को भर्ती कराया गया। पहली नजर में, इसका कारण पास की भट्टी में कपड़ों का जलना है। जो भी हो, खबर तो है ही और ऐसी नहीं कि पहले पन्ने पर नहीं छापी जाए। फिर भी आज मेरे अंग्रेजी अखबारों ने इसे पहले पन्ने पर नहीं छापा है तो आइये देख लेते हैं और क्या है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड उसकी कल की खबर का खंडन है। इसे ‘न्यूज मैन्युफैक्चरिंग’ कहा जाता है। ऐसी एक खबर कम से कम दो दिन काम आती है। सरकार ने श्रम सुधार की खबर बनाई (हालांकि उसे अधिकृत निर्माता भी माना जा सकता है)। कल मैंने बताया था कि द टेलीग्राफ ने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि श्रम सुधार की खबर पर विचार मांगे गए हैं और विरोध के कारण पूरा मामला ठंडे बस्ते में है। दूसरी ओर प्रचारक उसे व्हाट्सऐप्प कर रहे थे। सच्चाई देशबन्धु में छपी है – नए श्रम कानूनों के विरोध में आठ को प्रदर्शन। बाकी राम जानें। वैसे तो सरकार और पीआईबी आजकल फैक्ट चेक भी करते हैं लेकिन ऐसी खबरों का फैक्ट चेक नहीं होता है। उत्तर प्रदेश में एसआईआर हो रहा है, सख्ती और एफआईआर की खबर है लेकिन इसका फैक्ट चेक नहीं है कि समाजवादी पार्टी की शिकायत का क्या हुआ जिसके बारे में मुख्य चुनाव आयुक्त ने भरी प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि शिकायत के साथ शपथपत्र नहीं थे। अगले दिन अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी ने शपथपत्र देने और पावती आदि के सबूत दिए लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अब एसआईआर चल रहा है, गरीब बीएलओ की जान जा रही है जेल भी जाना पड़ सकता है लेकिन वर्षों पुरानी शिकायत पर कार्रवाई नहीं, खबर भी नहीं।

हेडलाइन मैनेजमेंट के इस खेल में आज इंडियन एक्सप्रेस की लीड है, “चंडीगढ़ विधेयक पर केंद्र का पुनर्विचार : अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है”। इसे वाटर टेस्टिंग कहते हैं इससे अंदाजा लगता है कि सरकार ऐसा कर दे तो कितना विरोध होगा। कैसा और क्या होगा। इससे हेडलाइन मैनेजमेंट का काम भी होता है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं। उन्होंने कहा है, “एआई वैश्विक अच्छाई है पर इसके दुरुपयोग से बचाव की जरूरत है”। मुझे नहीं लगता है कि यह कोई नई बात है और प्रधानमंत्री के स्तर की चिन्ता होनी चाहिए। एआई या तकनीक का दुरुपयोग तो होता ही रहा है और नहीं ही होना चाहिए पर मुद्दे की शुरुआत तो ईवीएम से ही हो जाती है। एक समय भाजपा ही नहीं तेलुगू देशम पार्टी उसका विरोधी करती थी अब बचाव करती है या मुद्दा ही नहीं है। बैलट पेपर से मतदान पर कागज और पेड़ कटने की बात तो की जाती है लेकिन एसआईआर के दौरान दो कॉपी में फॉर्म भरने की जरूरत भी है। वह भी, बहु प्रचारित डिजिटल इंडिया में। जहां मतदाता सूची डिजिटल नहीं दी जा रही है और मतदाता सूची से छेड़छाड़ करने वाले का विवरण नहीं दिया जा रहा है। अजीब स्थिति है। सब चल रहा है क्योंकि अखबार और मीडिया को सरकार से डर लगता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की भी लीड वही है जो प्रधानमंत्री ने कहा है। यहां शीर्षक है, वैश्विक आतंकवाद से संघर्ष में कोई दोहरा मापदंड नहीं। द हिन्दू की लीड वही है जो इंडियन एक्सप्रेस की है यानी इंडियन एक्सप्रेस की कल की खबर का खंडन। हालांकि, द हिन्दू में कल यह खबर पहले पन्ने पर नहीं थी। लेकिन दूसरे (प्रतिद्वंद्वी) अखबार की खबर गलत हो जाए तो उसे बताने का अलग मजा है। तरीका तो विशेष हो ही सकता है। दि एशियन एज की लीड भी प्रधानमंत्री का कहा ही है। यह एआई पर है लेकिन वैश्विक प्रभाव वाला। मोटे तौर पर इसका हिन्दी अनुवाद कुछ इस तरह होगा – प्रधानमंत्री ने मानव-केंद्रित तकनीक और एआई पर वैश्विक समझौते का आह्वान किया। द टेलीग्राफ की लीड सुंदरबन में लोगों की मुश्किल और खतरनाक जिन्दगी के बारे में एक्सक्लूसिव दास्तान है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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