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सुख-दुख

विभा के शो ‘सास बहू और साजिश’ ने एक समय देश के हर बड़े न्यूज़ चैनल के पसीने निकाल दिए थे!

संजय सिंहा-

एक नस टस से मस

मैं ‘जनसत्ता’ छोड़ कर ‘ज़ी न्यूज़’ गया था। पत्रकारिता मेरे लिए नई नहीं थी, टीवी माध्यम नया था। उन दिनों में रिपोर्टिंग (इनपुट) में था। एक दोपहर की याद है-

मैं अपनी एक रिपोर्ट डेस्क इंचार्ज को दिखलाने के लिए न्यूज़ रूम (जिसे हम टीवी की भाषा में आउटपुट कहते हैं) गया। आउटपुट हेड की कुर्सी पर थे उमेश उपाध्याय।

वो मेरी कॉपी चेक कर रहे थे कि अचानक एक लड़की के जोर-जोर से रोने की आवाज़ आई। सबका ध्यान उधर गया।

एक लड़की हाथ में मोबाइल फोन लिए थी, और अचानक जोर-जोर से रोने लगी थी।

सब एकदम हैरान रह गए थे। वो लड़की चीख रही थी। किसी ने पानी पिलाया, किसी ने पुचकारा। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या?

किसी ने फोन हाथ से लिया- संदेश था, “पापा नहीं रहे।” मैंने उमेश उपाध्याय से पूछा, ये लड़की कौन है?

उन्होंने बताया, “ये विभा कौल है।” विभा ‘ज़ी न्यूज़’ में डेस्क पर थी। फिर विभा छुट्टी पर चली गई। वो छुट्टी से आई तो हमारी मुलाकात हुई। बात भी हुई।

मैंने सांत्वना के दो शब्द बोले, “सिर से पिता का साया उठ जाने की पीड़ा मैं समझता हूं।” विभा से मेरा परिचय हुआ।

फिर मैं अमेरिका चला गया। विभा की शादी हो गई और वो विभा कौल से विभा कौल भट्ट हो गई। आज संजय सिन्हा अचानक विभा कौल भट्ट को क्यों याद कर रहे हैं?

कल मेरे मित्र मिलिंद खांडेकर की वॉल से जानकारी मिली की विभा कौल भट्ट नहीं रही। मैं एक पल को फिर ठहर गया।

मेरी आंखों के आगे उस लड़की का वो चेहरा घूम गया, जिसने अपने पिता को अचानक ऑफिस में बैठे-बैठे खो दिया था। वो छोटी सी लड़की।

आज 25 साल बाद वो लड़की नहीं है। विभा कौल भट्ट को आप नहीं जानते। आप नहीं जानते क्योंकि वो टीवी न्यूज चैनल की दुनिया में पर्दे के पीछे थी। पर आप उसकी कृति को जानते हैं।

वो विभा कौल भट्ट ही थी, जिसने टीवी न्यूज चैनल में इंटरटेनमेंट को विशेष मुकाम दिया। वर्ना टीवी न्यूज चैनल तो खबरों के लिए थे। मनोरंजन कहां?

कल मिलिंद की वॉल पर ही गिरिजेश वशिष्ठ ने लिखा है कि विभा का बनाया कार्यक्रम सास बहू और साजिश शो एक अजेय शो है और एक समय देश के हर टीवी न्यूज चैनल के लिए सिरदर्द बन गया था। यही सच है।

विभा ने टीवी सोप आपेरा की कहानियों और उनसे जुड़े कलाकारों की कहानियों को टीवी न्यूज चैनल में पेश किया, दोपहर के समय। उससे पहले दोपहर का समय टीआरपी वाली कमाई का समय नहीं होता था। शाम सात से रात दस बजे तक का समय कमाई का होता था।

लेकिन ये विभा ही थी, जिसने स्टार (एबीपी) न्यूज चैनल पर प्रसारित होने वाले इस कार्यक्रम को रंग दिया और वो कार्यक्रम इतना बड़ा हो गया, कि जब अमेरिका से लौट कर आने के बाद मैंने ‘आजतक’ ज्वाइन किया तो एक समय था जब पूरा प्रबंधन, संपादकीय विभाग इस जुगत में लगा था कि कैसे एबीपी के उस कार्यक्रम को टक्कर दें।

आजतक ने उसी से प्रभावित होकर सास बहू और बेटियां शो शुरु किया। दोपहर के समय को प्राइम टाइम में बदलने की फिर सबने कोशिश की लेकिन वो बात बनी ही नहीं।

एक ऐसा समय भी आया था, जब कभी विभा को हायर करने के लिए हमने बहुत कोशिश की लेकिन विभा टस से मस नहीं हुई। अधिक पैसे ऑफर किए, लेकिन उसने कहा कि वो जहां है खुश है।

विभा ने मनोरंजन न्यूज की दुनिया में जो हासिल किया, वो कमाल ही था। वो हमेशा खुश रहती थी।

कल मिलिंद की वॉल से जब ये पता चला कि अपनी बातों से टस से मस न होने वाली वो सुंदर-सी लड़की अचानक दुनिया से चली गई।

नोट- यूं बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस…


मिलिंद खांडेकर-

सुबह पता चला , अब तक यकीन नहीं हो रहा. विभा कौल भट्ट को विनम्र श्रद्धांजलि. ABP न्यूज़ के शो सास बहू और साज़िश की कर्ता धर्ता रहीं थीं. कल लीलावती अस्पताल में सर्जरी हुई थी, आज सुबह निधन हुआ


अजेय शो था सास बहू और साजिश. पसीने निकाल दिए थे बड़े बड़े चैनलों केगिरिजेश वशिष्ठ


राकेश कायस्थ-

ओह! बिल्कुल अकल्पनीय है। हम टेलिविजन पत्रकारिता के शुरुआती दिनों के साथी थे। जी से निकलकर मैं आजतक गया था और विभा ने स्टार न्यूज़ (एबीपी) का रुख किया था। स्मृतियों को नमन

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